दमा/अस्थमा में हमारे अनुभव: लक्षणों के अनुसार चिकित्सा
कहते हैं दमा दम के साथ ही जाता है . मैं जब मेडिकल एजुकेशन में नहीं था और मेरी माता जी को भयानक 10 वर्षों से दमा था तो उक्त वक्तव्य सही लगता था , पर डॉक्टरी शिक्षा समाप्त होने पर जब अनुभव बढ़ने लगे तो माता जी पर पूरी मेहनत कर डाली
एक वर्षों के प्रयास से बिल्कुल ठीक हो गयी . एक वह समय याद आता है कि गर्मी के मौसम में भी उन्हें गर्म पानी पीना पड़ता था , चावल तो बहुत दूर की बात थी , और आज रात में दही खाती है . मैं इस लेख में दमा के इलाज में उन उपायों और औषधियों के बारे में बताऊंगा जो प्रायोगिक रूप में सफल रहे हैं
मैं सर्व प्रथम मानसिक लक्षणों को प्रधानता देता हूं , मरीज से पूछता हूं कि दमे के समय मरीज आखिर करता क्या है ? कहता क्या है ? अभी क्लिनीक में वह कर क्या रहा है ? कह क्या रहा है ? गौर से पर ध्यान दें . सूत्र मिल जाएगा . बहुत ही बारिक विश्लेषण करें , जबाव कुछ भी हो सकते हैं
उसके बहुत सारे जबाव में एक या दो प्रधान एवं प्रजेन्ट स्टेट ऑफ माइंड के रूब्रिक चुने एवं दवा दें , आप आश्चर्यचकित हो जाएंगें , एक खुराक से कमाल का
दूसरा मैं दमा के दौरान होने वाले पोजिशन ऑफ बॉडी पर ध्यान देता हूं कि कैसे मरीज को दमा या हफनी में राहत मिलती है या बढ़ता है .
जैसे 1. आर्सेनिक एल्ब : – रोगी के दम घुट जाने के कारण लेट नहीं सकता है और आगे की ओर झुक का बैढ़ने को बाध्य होता है . 2. हीपर सल्फ :- रोगी को बैठ कर सिर पीछे की तरफ करने से आराम मिलता है . 3. लाइकोपोडियम : – सांस लेने में तकलीफ के कारण दोनों नथूने पंखे के तरह खुलते बंद होते हैं .
( Fan like motion ) 4. सोरिनम : – मरीज लेटकर दोनों हाथों को दूर फैला लेता है . इससे उसे आराम मिलता है . 5. कैनाबिस सैटाइदा : – रोगी घूटने पर हाथ रखकर खड़ा रहना चाहता है .
6. कैली कार्ब : – रोगी बैठकर आगे – पीछे झुलते रहता है . इससे मरीज को आराम मिलता है . 7. मेडोरिनम : – रोगी केहुनी और घूटने के बल झुक कर सिर को तकीये पर झुका लेने से आराम मिलता है .
8. एलिया : – सिर झुकाकर घूटने एवं कोहनी के ऊपर बैठता है . 9. नेपथेलिन : – तेज खांसी में सिर पकड़कर झुककर चुपचाप बैठा रहता है . 10. सिड्रोन_ पखाना के उपरान्त दमा तीव्रता कम हो जाय पोथस सीधा खड़ा होने से कम हो जाता है।
लक्षणों के अनुसार चिकित्सा :
1. एकोनाइट नेप 3x या Q और इपिकाक 3x या Q : एकाएक दमे का आक्रमण होने पर , जो कि बेचैनी व मृत्यु जनक हो , रोग की उग्रता को कम करने के लिए प्रर्यायक्रम से प्रत्येक 5 मिनट से 10 मिनट के बीच अदल – बदल कर आराम होने तक देना चाहिए .
2. लोबेलिया इनफ्लाटा 6 : – रोगी को ऐसा लगता हैं कि छाती संकुचित हो रही है . छाती पर बोझ महसुस हो . खांसते – खांसते दम अटक जाये , चेहरा नीला पड़ जाए , मामूली हरकत या मेहनत करने पर खांसी और हफनी का बढ़ जाना , मिचली और कै भी होता है .
3. इपिकाक – Q , 3,30 : – रोगी ठंडक में भी खिड़की – दरवाजे खोल कर रखना चाहता है , नहीं तो उसे दम घुटता – सा महसुस होता है . गर्मी , नमी या बरसाती हवा से रोग बढ़ जाते है . खांसते – खांसते मिचली , कै हो जाना , जरा – सा भी हिलने – डुलने पर कष्ट बढ़ जाता है . यह अल्पकालिक क्रिया करने वाली औषधि है . अतः 2-2 घंटे पर प्रयोग कर सकते है .
4. पॉथस फोइटिप्स Q.3x , 30 : – दमा जो किसी प्रकार धूल या किसी जीव – जन्तु के रोयें , बाल या पंख वायु के साथ सांस ले लेने से बढ़े और पखाना होने के बाद रोगी को आराम हो .
5. कलाव ओरियण्टेलिस- Q – 3x ( विचूर्ण ) : – इस दवा का मूल अर्क दमा के उग्र अवस्था में रामबाण है . दुबले – पतले रोगी की अपेक्षा हष्ट – पुष्ट और मोटे – ताजे शरीर वाले रोगियों पर अच्छा कार्य करती है , दमा जब उन अवस्था में हो तो इसका मूल अर्क 5-10 मिनट से आधे घंटे पर देते रहना चाहिए , जब रोग का उयावस्था कम जाए तो उच्च शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए .
6. मेफाइटिस – 1x , 3x : – रात में दमा का दौरा बहुत तेज व अधिक बार होता है , सांस को बाहर फेंकने में तकलीफ होता है . छाती का ऊपरी भाग बलगम से घड़धड़ाता है
7. सन्बुल –3 :- हृदयजनित रोगों के साथ दमा रहने पर इस दवा को मूल अर्क का 10 बूंद गर्म पानी के साथ सेवन करने से दमा के दौरां में आराम मिलता है
8. ऐरेलिया रेसिमोसा – 30 : – इसके रोगी को लेटने के योड़ी देर बाद नींद आते ही खांसी और हफनी बढ़ जाता है , चलने , हरकत करने से भी श्वास कष्ट बढ़ जाता है , इसलिए रोगी दिन – रात बिना हिले – डुले बैठा रहता है . रोगी घुटना – केहुनी की सहायता लेकर बैठा रहना चाहता है , या सोना होता है तो सिर झुका कर तकिए के सहारे झुककर बैठे – बैठे थोड़ी नींद ले लेता है , बलगम गरम निकलता है
9. येण्डेलिया रोवस्टा – 6,30 : – यह दवा कार्डिक दमा , बॉकियल दमा , ब्रॉको निमोनिया , क्रॉनिक ब्रॉकाइटिस , हूर्पिग – खांसी जैसे श्वास कष्ट वाले अनेकों बीमारियों की उत्कृष्ट औषधि है . श्वासकष्ट अधिक , श्वास लेने के लिए मुंह फाड़ता है . नींद आते ही सांस लेने में कष्ट होता है . गला घुटने लगता है और हड़बड़ाकर उठ बैठता है , बलगम लस्सेदार और झागवाला होता है , जिसे निकालना कठिन होता है , दमा के साथ हृदय व तिल्ली में दर्द हो सकता हैं , दमा के उग्रावस्था को कम करने में इसका मूल अर्क मैं हमेशा प्रयोग करता हूं ।
10. कैसिया सोफेरा — Q : – दमा और हफली के कारण रोगी मजबूर होकर उठ कर बैठने को बाध्य हो जाता है , रोग ज्यादातर बरसात में बढ़ जाते हैं
11. एस्पिडोस्पर्मा Q , ( विचूर्ण ) : — यह दवा सभी प्रकार की दमा की उत्कृष्ट औषधि है . दमे में श्वास बंद होने लगता है , यह दवा फेफड़े को बल प्रदान कर , इसकी क्रियाशीलता हो बढ़ाता है , साथ ही खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर श्वास की तकलीफ को दूर करता है
12. सिनेगा -Q : – यह वृद्ध व्यक्तियों के दमा में अधिक उपयोगी है , छाती में काफी कफ होता है , खांसते या सांस लेते समय सांय – सांय या घड़ – घड़ की आवाज होती है . सांस लेने छोड़ने में कष्ट होता है . बलगम लसदार होती है जो वायु – नली में जम जाती है जो आसानी से नहीं निकलती . काफी खांसने पर थोड़ – सा बलगम आता है . छाती में भी दर्द होता है .
13 . जस्टिशिया आघाटोडा – Q :- सभी प्रकार के दमा और खांसी में व्यवहार किया जाता है . खांसते – खांसते दम अटक जाता है , बलगम आसानी से नहीं निकलता . इस दवा के सेवन से बलगम छट कर निकलने लगता है , और खांसी , हफनी कम हो जाती है
14. ओसिनम सैकटम -Q : – हर प्रकार के सर्दी – जुकाम और दमा की प्रसिद्ध औषधि है . बच्चों के दमा में सर्वाधिक उपयोगी , खांसने व छींकने के समय छाती के दर्द बढ़ जाते हैं . छाती में धड़कन या सांय – सांय की आवाज होती है , सोने में असमर्थ , चित्त होकर रोगी सो नहीं सकता , उठ कर बैठने को बाध्य होता है , दमे का आक्रमण रात में अधिक होता है , दमा के साथ ज्वर भी हो सकता है . इसका दमा बसन्त और बरसात में अधिक होता है
15. एब्रोमा अगस्ट – Q :- मधुमेह रोगियों के दमा में सर्वाधिक उपयोगी है .
16. मायोसोटिक – Q : – खांसी व दमा में फेफड़े के बांया निचला भाग प्रभावित होता है , खांसी के साथ प्रचुर मात्रा में पीव मिला बलगम आता है . खांसते – खांसते गिचली और उल्टी हो जाया करती है . खाते समय या खाने के बाद खांसी अधिक बढ़ जाती है
17. मकरध्वज Q 2x ( विघूण ) : – हृदय के कमजोर या हृदय रोग के साय दमा के रोगी की बहुत ही श्रेष्ठ औषधि है . साधारणतः खांसी रात में बढ़ जाती है . यह स्नायविक कमजोरी , चक्कर , तेज धड़कन व हृदय का महान टॉनिक भी है
18. पेसिफ्लोरा इन्कारनेट Q : – यह दवा बच्चे – बुढ़े सभी की मूल्यवान औषधि है . दमा के घुटन और तकलीफ वाली अवस्था में देने से योड़े समय में ही आक्षेप घट कर रोगी को नींद आ जाती है , उग्रावस्था में 25-30 बूंद तक आवश्यकतानुसार शुशुम पानी के साथ 1-2 घंटे पर दिया जाना चाहिए
19. कोलोन मुटेबाइल घुटने – केहुनी के बल बैठने पर रोगी को आराम हो , शिशुओं के दमा के लिए उपयोगी
20. नक्स वोमिका पेट खराबी और अर्जीणी की वजह से होने वाले दमा में उपयोगी है . रोगी चिड़चिड़ा हो , रोग का आक्रमण प्रातः होता है .
21 . स्पोंजिया टोस्टा टी.बी. के रोगियों के दमा में उपयोगी
22. ऐलान्यस ग्लैण्डलोसा :- फूलों की गन्ध से दमा , शारीरिक दुर्बलता विशेष रूप से पायी जाती है .
23. आर्सेनिक एल्ब 6x , 30 : – दमा का आक्रमण 1 से 2 बजे मध्यरात्री या उसके बाद होता है . साथ में उद्देग , बेचैनी व प्यास जो थोड़ी देर पर एक – दो घुट हो . लेटने से रोग बढ़ जाता है इसलिए रोगी बैठा रहता है .
24. लैकेसिस : – इसका रोगी जगा रहता है , तो दमा का आक्रमण नहीं होता है , परन्तु जब नींद आ जाती है तो लक्षण प्रबल रूप में प्रकट होते हैं . छाती या गले पर किसी प्रकार का दबाव या कपड़ा बांधना सहन नहीं कर सकता , उसे बेचैनी , और दम घुटता – सा प्रतीत होता है . खांसते – खांसते देर सारा पतला श्लेष्मा निकलता जिससे उसे काफी राहत मिलती है .
25. कैनाविस इण्डिका 30 , 200,1 एम : – यह पुराना दमा के दौरा में ज्यादा फायदेमंद है , हृदय से बूंद – बूंद पानी टपकने की अनुभूति होती है , रोगी पंखे की हवा की इच्छा रखता है . बलगम पतला निकले , रोगी सिर्फ खड़ा होकर सांस लेना चाहता है , इससे उसे आराम मिलता है .
26. कार्बो वेज : – इसका रोगी जीवनी शक्ति से कमजोर होता है , विशेष रूप से वृद्धावस्था के दमे में ज्यादा उपयोगी है . दमे के आक्रमण में रोगी ताजी वायु के बिना बेहोश – सा हो जाता है . वह पंखे की हवा की लगातार इच्छा करता है और हवा के लिए व्याकुल रहता है . पेशाब , पैखाना व बलगम में बदबु होता है
27. कैली कार्ब : — दमे या अन्य बीमारियों में फेफड़े के दाहिने ओर के निचला भाग विशेष रूप प्रभावित होता है , रोग शांत बैठने से बढ़ता है , एवं हिलने – डुलने से आराम मिलता है . रात 2 बजे से 4 बजे के बीच दमा उग्र रूप धारण करता है . खासकर प्रातः 3 बजे अधिक . इस दवा की खास विशेषता एक और है कि सूई चुभने जैसा दर्द होता है .
28. सैम्बुकस नाइना : – यह दवा बच्चों के सर्दी – खांसी व दमे की श्रेष्ठ औषधियों में से एक है , रात्री में इसके रोग लक्षण बढ़ जाते हैं , वो भी जब बच्चा सोया रहता है . सोये में अचानक सांस रूकता – सा प्रतीत होता है , और खांसने लगता है . बच्चे का चेहरा नीला पड़ने लगता है . बच्चा मुंह से सांस लेने के लिए बाध्य होता है . जब तक वह नींद में रहता है शरीर सूखा रहता है ; परन्तु जागते ही पसीने से तर हो जाता है .
29. कैली बाइक्रोम 3
30 : – दमे के आक्रमण रात 2 बजे से 3 बजे के बीच बढ़ जाता है . बलगम चिपचिपा , लसदार खीचने पर सुत की तरह खिंच जाता है . ठंड या नमी एवं खाना खाने के बाद भी रोग बढ़ जाता है . रात में कष्ट के कारण सो नहीं पाता
ब्रोमियम : – समुद्र के मल्लाहों , जहाजों , नावों में रहकर काम करनेवाले व्यक्ति जब समुद्र तट पर आते हैं तो खुश्क हवा से उनके रोग उभर आते हैं . समुद्र में रहने से हवा में नमी के कारण दमा ठीक रहता है .
नोट : – ब्रोमियम का सेवन करने पर दूध पीना मना है .

