स्वास्थ्य

दमा/अस्थमा में हमारे अनुभव: लक्षणों के अनुसार चिकित्सा

31. हीपर सल्फर- 30,200 : – खुश्क ठंडी हवा . लगने से सर्दी – खांसी , दमा आदि के कष्ठ बढ़ जाते है गर्म मौसम , गर्मी और नमी वाले स्थान में इसके लक्षणों में कमी आती है .

32. ऐसाफिटिडा : – सामान्य दिनचर्या से अधिक कार्य करने से , होने वाले दमा को यह ठीक करता है .व्यक्ति अपने सामान्य परिश्रम से अधिक कठिन और जी – तोड़ मेहनत करता है , या सामान्य से अधिक खाना खाता है .

33. गौसिपियम वैसे मजदूर या कर्मचारी जो रूई धुनने या सूती कपड़ा बनाने वाले कारखानों में काम करता है . वैसे लोगों को दमा होने पर यह दवा उपयोगी है ।

34. सोरिनम : – रोगी को सर्दी बिलकुल सहन नहीं होता , उसके रोग सर्दी में बढ़ जाते हैं . गर्मी में उसे आराम मिलता है . बिछावन पर लेट कर अपने दोनों हाथ – पैर को दूर फैला कर रखना चाहता है . इससे दमे में आराम महसुस करता है

35. सिफिलिनम : – दमा सूर्य के अस्त होते शुरू हो जाता है और सारी रात रहता है . सुबह सूर्योदय के साथ ही खत्म हो जाता है .

36. सल्फर 200 , 1 एम : – सिफलिस , गनोरिया , एक्जीमा या चर्म रोग के ऊपर मलहम लगाकर या अंग्रेजी दवा या किसी अन्य औषधियों से दबा देने के पश्चात् दमा होने पर यह उपयोगी है .

37. ट्यूबरकुलिनम 200 , 1 एम : – जिसे बार – बार दमा हो , जिसके वंश में क्षय रोग या दमा का इतिहास हो , सुनिर्वाचित औषधि यदि लाभ न करे . बार – बार हल्की ठंडी हवा में भी सर्दी – जुकाम , दमा हो जाता हो , तो महीने में एक खुराक देना चाहिए .

 

38. मेहोरिनम : – गनोरिया विष के दब जाने से उत्पन्न हुए दमा में उपयोगी है . समुद्र तट पर एवं पेट के बल , केहुनी और घुटने के सहारे बैठने से दमा के रोगी को आराम मिलता है . सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोग में वृद्धि होती है . दमे के खेशी से उसके वंशानुगत इतिहास अवश्य पूछना चाहिए . नोसॉर्ड औषधि को उच्च शक्ति में मध्यवर्ती औषधि के रूप में देना चाहिए 

39. स्ट्रामोनियम : – गठिया की प्रकृति के साथ दमे का बार – बार होना .

40 मर्क बिन आयोड- 3x विचूण ) : – रात में दमा का दौरा आने की प्रकृति हो , तो इसे सोते समय लेने से दौरा पड़ने की स्थिति को निष्फल करेगा .

41. साइलिशिया : – पत्थर काटने – तोड़ने वाले मजदूरों या कर्मचारियों को दमा होने पर उपयोगी .

42. एमिल नाइट्रेट Q : – 7-8 बूंद मूल अर्क रूई या • रूमाल पर डालकर रोगी को सुंघाते रहना चाहिए . इससे दमा का खिचाव तत्काल कम होता है .

43. जिजिंबर Q पाक स्थली में वायु संचय के कारण दमा हो . दमा का खिंचाव तत्काल कम होता है 

44. नेट्रम सल्फ – 6x :- नमीयुक्त हवा , बरसाती समुद्री हवा , आसमान में बादल आदि में इसके रोग कष्ट बढ़ जाते हैं . खुश्क हवा में यानि जिस हवा में नमी नहीं रहती है , रोग : में आराम लगता है . लेटने पर खास कष्ट बढ़ जाते हैं . रोगी को उठ कर बैठना पड़ता है . ठंडी हवा के लिए खिड़की – दरवाजे खोल कर रखता है , बच्चों के दमा में उपयोगी दवा है .

45. काली सल्फ – 6x : – दमा व खांसी में खुली हवा में आराम मिलता है . गर्मी के मौसम और गर्मी से रोग बढ़ जाते हैं , जुकाम व बलगम में पीलापन आता है .

Dr. Ved Prakash

डा0 वेद प्रकाश विश्वप्रसिद्ध इलेक्ट्रो होमियोपैथी (MD), के साथ साथ प्राकृतिक एवं घरेलू चिकित्सक के रूप में जाने जाते हैं। जन सामान्य की भाषा में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को घर घर पहुँचा रही "समस्या आपकी- समाधान मेरा" , "रसोई चिकित्सा वर्कशाप" , "बिना दवाई के इलाज संभव है" जैसे दर्जनों व्हाट्सएप ग्रुप Dr. Ved Prakash की एक अनूठी पहल हैं। इन्होंने रात्रि 9:00 से 10:00 के बीच का जो समय रखा है वह बाहरी रोगियों की नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श के लिए रखा है । इनका मोबाइल नंबर है- 8709871868/8051556455

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