विधान भवन के गेट नंबर 7 के सामने पार्किंग में तैनात पुलिसकर्मी ने खुद को मारी गोली
विधान भवन के गेट नंबर 7 के सामने पार्किंग में ड्यूटी दे रहे दरोगार निर्मल कुमार चौबे (53) ने खुद को गोली से उड़ा दिया। उन्होंने सर्विस पिस्तौल से बाएं तरफ सीने में गोली मार ली।
गोली सीने को भेदती हुई पार हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सिविल अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक दरोगा के जेब से सुसाइड नोट मिला, जिसमें वह बीमारी से परेशान होकर खुदकुशी करने की बात लिखी थी।
दरोगा के मौत की सूचना मिलने पर सिविल अस्पताल पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर और जेसीपी नवीन अरोरा भी पहुंचे।पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक बंथरा थाने में तैनात दरोगा निर्मल कुमार चौबे की बृहस्पतिवार को विधान भवन पर ड्यूटी थी।
दोपहर करीब 3.03 बजे वह गेट नंबर 7 की पार्किंग के पास मौजूद थे। अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। आसपास के लोगों ने उनको पार्किंग में खून से लथपथ देखा।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने सिविल अस्पताल पहुंचाया। जहां उनकी मौत हो गई। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। जिसमें दरोगा द्वारा खुद को सर्विस पिस्तौल से गोली मारने की पुष्टि हुई। पुलिस को मौके से उनकी सर्विस पिस्तौल और कारतूस मिला। पुलिस ने पड़ताल शुरू कर दी है।
प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक दरोगा निर्मल चौबे मूलरूप से वाराणसी के चोलापुर थानाक्षेत्र के पलही पट्टी के रहने वाले थे।
परिवार में पिता की मौत हो चुकी है। बुजुर्ग मां विद्या देवी, तीन छोटे भाई प्रदीप कुमार, अतुल कुमार, अनिल कुमार, पत्नी निरूपमा, बेटा विकास चौबे, सर्वेश चौबे व विकास की बहू अर्चना हैं। वह चिनहट में परिवार सहित रहते थे। कुछ दिनों से वह बीमार चल रहे थे। डिप्रेशन में चले गये थे। इसी डिप्रेशन में उन्होंने खुद को गोली मारी है।
पुलिस ने दरोगा निर्मल की तलाशी ली। उनके जेब से एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें मुख्यमंत्री को संबोधन था। लिखा अपनी बीमारी से परेशान हो गया हूं।
अब जीने की इच्छा नहीं रही। आप से बस इतनी गुजारिश है कि मेरे बच्चों का ख्याल रखियेगा। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया है। उसे फोरेंसिक जांच केलिए भेज दिया है।
1987 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए निर्मल चौधरी को पदोन्नित मिली। हेड कांस्टेबल फिर दरोगा के पद पर तैनात हुए। बंथरा थाने में उनकी तैनाती 2019 में हुई थी। प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र सिंह के मुताबिक चिनहट से बंथरा काफी दूर होने केकारण उनकी अक्सर सचिवालय पर ड्यूटी लगती थी। ताकि वह आसानी से ड्यूटी कर वापस घर चले जाए।
उनकी बीमारी के बारे में सभी को जानकारी थी। सहूलियत के लिए ही सचिवालय के पास ड्यूटी पर भेजा जाता था। हालांकि सूत्रों के मुताबिक सचिवालय की लगातार ड्यूटी लगने से निर्मल नाराज थे। वह थाने में रहकर अपना काम करना चाहते थे। इसे लेकर उनकी बहस भी हो चुकी थी।
पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक गोली चलने की आवाज सुनने के बाद पुलिस कर्मियों ने घायल दरोगा को अस्पताल पहुंचाया। वहीं अधिकारियों ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी।
फुटेज में दरोगा निर्मल कुमार पार्किंग में अकेले खड़े दिखे। इसके बाद उन्होंने अचानक खुद को गोली मार ली। पूरे घटना के दौरान वहां आसपास कोई मौजूद नहीं था।
विधान भवन में बृहस्पतिवार को बजट सत्र चल रहा था। इसी दौरान दोपहर को अचानक गोली चलने की आवाज आई। बाहर काफी संख्या में लोग मौजूद थे। गोली चलने की आवाज आते ही अफरा-तफरी का माहौल हो गया।

