धर्म के सकारात्मक और नकारात्मक पहलू
यदि धर्म को व्यापक रूप में समझें तो धर्म शक्ति संपन्न लोगों के हाथ में ताकतवर हथियार बन गया है तथा इसका प्रयोग वे सांप्रदायिक संबंधों को बनाने बिगाड़ने में कर रहे हैं।। किसी देश में जन्म लेने पर हमें उस देश के नागरिक के रूप में पहचान मिल जाती है ठीक उसी प्रकार एक विशेष धर्म किसी व्यक्ति को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।। यदि व्यक्ति किसी धर्म में आस्था रखता है तो संकटकाल में चाहे अनचाहे रूप में उसे एक मनोवैज्ञानिक आश्रय मिल जाता है।।
श्री कृष्ण के अनुसार कर्म करो फल की इच्छा ना करें अर्थात फल मनुष्य के नियंत्रण में नहीं हैं।। धर्म व्यक्ति को अवसाद मुक्त रखता है और इससे लोग आत्महत्या नहीं करेंगे क्योंकि परिणाम उनके नियंत्रण में नहीं है लेकिन इसे नकारात्मक रूप में भी ले सकते हैं जैसे कोई व्यक्ति कह सकता है कि वह किसी भी अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं हैं क्योंकि फल जो मिल रहा है उसका कारण ईश्वर है वह नहीं ।।
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धर्म हमें जीवन के लक्ष्यों की जानकारी देता है और बहुत विस्तृत प्रश्नों के जवाब भी इसी के द्वारा हमें मिलते हैं जैसे हम क्यों पैदा हुए हैं, जन्म लेने से पहले हम कहां थे या मरने के बाद हम कहां जाएंगेll धर्म के नियम हमें कुछ हद तक गलत या सही का एहसास कराते हैं वरना निजी स्वार्थों में व्यक्ति अंधा बनकर एक दूसरे का जीवन समाप्त कर देगाll यदि हम धर्म के नकारात्मक पहलुओं पर नजर डालें तो धर्म एक बंधन है जिसमें हम बंध चुके हैंll
एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन के 52% लोग नास्तिक हैं इसका मतलब उनका कोई धर्म नहीं है लेकिन वह अपने कार्य को ही अपना धर्म समझते हैं इसका अर्थ यह निकलता है कि हमारे जीवन में धर्म ही सब कुछ नहीं है।। कार्ल मार्क्स के शब्दों में यदि हम धर्म को समझें तो धर्म एक अफीम है।। धर्म का नकारात्मक पहलू यह भी है कि विभिन्न सरकारें जनता को धर्म तक ही सीमित रखती हैं और उन्हें तार्किक जीवन से दूर रखती हैं।।
मैं लेखक होने के नाते अपने लेख के माध्यम से यह समझाने का प्रयास करना चाहता हूं कि उपासना को ही हम धर्म ना समझे।। हमें आचरण की महत्ता को भी समझना होगा और मेरा मानना यह है कि धर्म में व्यक्ति तार्किकता रखें अन्यथा यह अंधविश्वास का रूप धारण कर लेगा क्योंकि धर्म एक विश्वास भी है और यदि विश्वास में तार्किकता को हटा दें तो वह अंधविश्वास बन जाता है ।।मैं अपने लेख के माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि हमारे विश्वास में तार्किकता अवश्य होनी चाहिए तभी हम धर्म के पहलुओं को समझ सकते हैं।।
सभी मस्जिद संचालकों से मेरा निवेदन है कि जो भी व्यक्ति विदेश से आए हैं वह जानकारी पुलिस प्रशासन को दें यह कार्य प्रशासन समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भलाई के लिए ही कर रहा है ऐसा न करने की स्थिति में आप अपने को ही खतरे में नहीं डाल रहे हैं बल्कि देश के प्रत्येक व्यक्ति के लिए खतरा बन रहे हैं


अक्षय कुमार वत्स, मुजफ्फरनगर
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