Rani Mukerji के नाम एक और बड़ी उपलब्धि, ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने दी मानद डॉक्टरेट; शाहरुख खान के बाद बनीं दूसरी भारतीय कलाकार
News-Desk
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14 अगस्त 2026 को मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वेयर में आयोजित विशेष समारोह में रानी मुखर्जी ने यह सम्मान ग्रहण किया। समारोह का आयोजन Indian Film Festival of Melbourne (IFFM) 2026 के दौरान किया गया था।
सम्मान ग्रहण करने के दौरान रानी मुखर्जी भावुक नजर आईं। उनके लिए यह पल सिर्फ एक अभिनेत्री के तौर पर उपलब्धि का नहीं, बल्कि उस लंबी यात्रा की पहचान का भी था, जिसमें उन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों, सामाजिक समानता और वंचित वर्गों से जुड़े विषयों को अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाया।
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी की ओर से रानी को दिया गया यह सम्मान भारतीय सिनेमा के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को भी रेखांकित करता है।
तीन दशक के सफर को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
रानी मुखर्जी ने 1990 के दशक में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में लगातार अपनी अलग पहचान बनाई।
उनके करियर की खासियत यह रही कि उन्होंने केवल पारंपरिक ग्लैमरस भूमिकाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा। समय के साथ उन्होंने ऐसे किरदारों का चुनाव किया जिनमें अभिनय की चुनौती के साथ सामाजिक संदेश भी मौजूद था।
‘गुलाम’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘साथिया’, ‘हम तुम’, ‘बंटी और बबली’ और ‘युवा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई, जबकि ‘ब्लैक’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘हिचकी’, ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ जैसी फिल्मों ने उनकी अभिनय क्षमता का अलग पक्ष सामने रखा।
इसी लंबे और विविधतापूर्ण सफर को अब ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ने मानद अकादमिक सम्मान से मान्यता दी है।
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने क्यों चुना रानी मुखर्जी को?
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के अनुसार रानी मुखर्जी का योगदान केवल फिल्मों में मनोरंजन देने तक सीमित नहीं रहा है। उनके कई किरदार और फिल्में सामाजिक न्याय, समानता, लैंगिक न्याय और समावेश जैसे विषयों पर सार्वजनिक चर्चा का माध्यम बने।
यूनिवर्सिटी ने महिलाओं, बच्चों और वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनके निरंतर योगदान की सराहना की।
अभिनय के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की उनकी क्षमता को इस सम्मान के पीछे महत्वपूर्ण कारण माना गया।
किसी कलाकार को मानद Doctor of Letters की उपाधि दिया जाना सामान्य फिल्मी पुरस्कारों से अलग तरह का सम्मान है। यह किसी व्यक्ति के व्यापक बौद्धिक, सांस्कृतिक, कलात्मक या सामाजिक योगदान को मान्यता देने का एक तरीका है।
शाहरुख खान के बाद दूसरी भारतीय कलाकार
रानी मुखर्जी के लिए इस सम्मान की एक और खास वजह है। वह ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट प्राप्त करने वाली दूसरी भारतीय कलाकार बन गई हैं।
इससे पहले 2019 में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को इसी यूनिवर्सिटी ने सिनेमा और सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट प्रदान की थी। यूनिवर्सिटी ने उस समय उनके नाम पर पीएचडी स्कॉलरशिप की घोषणा भी की थी।
अब रानी मुखर्जी का नाम भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो गया है।
इस तरह रानी और शाहरुख दोनों भारतीय सिनेमा की उन हस्तियों में शामिल हैं, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने उनके व्यापक योगदान के लिए सम्मानित किया है।
सम्मान लेते समय भावुक हुईं रानी मुखर्जी
सम्मान समारोह के दौरान रानी मुखर्जी भावुक दिखाई दीं। उन्होंने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे विनम्र और भावुक क्षणों में से एक बताया।
रानी ने अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए कहा कि बचपन में उनका सपना अपने माता-पिता और अपने देश को गौरवान्वित करना था।
सिनेमा उनके लिए इस सपने को पूरा करने का माध्यम बन गया।
यह बात उनके करियर की दिशा को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रानी ने लोकप्रिय फिल्मों के साथ ऐसे किरदार भी चुने जिन्हें निभाना आसान नहीं था।
‘जो दिल को छुआ, वही कहानी चुनी’
रानी मुखर्जी ने अपने करियर के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही जोखिम लेने वाले किरदारों का चुनाव किया।
उनके अनुसार वह उन कहानियों का हिस्सा बनना चाहती थीं जो सबसे पहले उनके अपने दिल को छूती हों और फिर दर्शकों को भी प्रेरित कर सकें।
यही सोच उनके फिल्मी सफर में कई अलग-अलग तरह के किरदारों में दिखाई देती है।
कभी उन्होंने सामाजिक संघर्ष से जूझती महिला का किरदार निभाया तो कभी ऐसे पात्र को पर्दे पर उतारा जो अपनी व्यक्तिगत सीमाओं को चुनौती देकर आगे बढ़ता है।
अभिनय के लिए भी IFFM 2026 में विशेष सम्मान
रानी मुखर्जी को केवल मानद डॉक्टरेट ही नहीं मिली। Indian Film Festival of Melbourne 2026 में उन्हें उनकी अभिनय क्षमता और अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए विशेष प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया।
इस सम्मान ने समारोह को रानी के लिए और भी खास बना दिया।
एक तरफ यूनिवर्सिटी ने उनके व्यापक सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को सम्मानित किया, वहीं फिल्म फेस्टिवल ने उनके अभिनय और भारतीय सिनेमा में योगदान को रेखांकित किया।
मितु भौमिक लांगे ने रानी के योगदान को बताया खास
IFFM की फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने रानी मुखर्जी के सम्मान को भारतीय सिनेमा की ताकत से जोड़कर देखा।
उनके अनुसार यह सम्मान रानी की कला और उस सिनेमा का उत्सव है, जो दो देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करता है।
भारतीय फिल्मों ने पिछले कुछ दशकों में ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के कई देशों में अपनी पहुंच बनाई है। ऐसे में IFFM जैसे मंच भारतीय कलाकारों और फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
13 से 23 अगस्त तक चल रहा है IFFM 2026
Indian Film Festival of Melbourne 2026 का आयोजन 13 से 23 अगस्त तक किया जा रहा है।
इस फेस्टिवल में भारतीय सिनेमा की विभिन्न भाषाओं, शैलियों और कहानियों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
फेस्टिवल केवल फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है। इसके जरिए भारतीय कलाकारों, निर्देशकों और सिनेमा से जुड़े रचनाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच भी मिलता है।
इसी आयोजन के दौरान रानी मुखर्जी को सम्मानित किया जाना भारतीय सिनेमा के लिए भी महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
‘ब्लैक’ ने दिखाई अभिनय की दूसरी दुनिया
रानी मुखर्जी के करियर में ‘ब्लैक’ एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इस फिल्म में उन्होंने चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया और अभिनय की अपनी क्षमता का गंभीर पक्ष सामने रखा।
फिल्म ने शिक्षा, दिव्यांगता, संवाद और मानवीय संबंधों जैसे विषयों को भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया।
रानी के अभिनय ने दर्शकों को यह दिखाया कि मुख्यधारा की अभिनेत्री भी ऐसे किरदारों को पूरी ताकत से निभा सकती है जिनमें ग्लैमर से ज्यादा अभिनय की मांग होती है।
उनकी इसी तरह की भूमिकाओं ने उनके करियर को सिर्फ व्यावसायिक सफलता तक सीमित नहीं रहने दिया।
‘मर्दानी’ में महिला शक्ति और अपराध के खिलाफ संघर्ष
‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी रानी मुखर्जी के करियर की उन फिल्मों में शामिल है, जिसमें उन्होंने एक मजबूत महिला पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया।
फिल्मों में महिलाओं के खिलाफ अपराध, मानव तस्करी और बच्चों की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों को केंद्र में रखा गया।
रानी का किरदार एक ऐसी महिला अधिकारी के रूप में सामने आया जो अपराधियों के खिलाफ संघर्ष करती है और व्यवस्था की सीमाओं के बीच अपने कर्तव्य को निभाती है।
इस तरह की भूमिकाओं ने सामाजिक मुद्दों को लोकप्रिय सिनेमा के बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
‘नो वन किल्ड जेसिका’ में न्याय की लड़ाई
‘नो वन किल्ड जेसिका’ में रानी ने एक पत्रकार का किरदार निभाया। फिल्म का केंद्र न्याय के लिए संघर्ष और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश थी।
इस भूमिका ने उनके करियर में एक और गंभीर आयाम जोड़ा।
फिल्मों के जरिए सामाजिक और न्यायिक मुद्दों पर चर्चा पैदा करना रानी के अभिनय सफर की महत्वपूर्ण विशेषता रही है।
‘हिचकी’ ने शिक्षा और समावेश का संदेश दिया
‘हिचकी’ में रानी मुखर्जी ने एक ऐसी शिक्षिका की भूमिका निभाई जो अपनी शारीरिक समस्या के बावजूद विद्यार्थियों को पढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करती है।
फिल्म का केंद्रीय विचार यह था कि किसी व्यक्ति की कमजोरी या अलग पहचान उसकी क्षमता का अंतिम निर्धारण नहीं करती।
शिक्षा, आत्मविश्वास और अवसर की समानता जैसे विषयों को फिल्म ने सरल और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया।
रानी के इस किरदार को भी उनके करियर की अलग तरह की भूमिकाओं में गिना जाता है।
‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ में मां की लड़ाई
हाल के वर्षों में ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ ने रानी मुखर्जी को एक और अत्यंत भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण भूमिका में पेश किया।
फिल्म एक मां के संघर्ष पर आधारित कहानी के जरिए परिवार, मातृत्व, बच्चों और अधिकारों से जुड़े सवाल उठाती है।
रानी ने फिल्म में मां की भूमिका को भावनात्मक गहराई के साथ निभाया। इस किरदार ने उनके अभिनय के उस पक्ष को सामने रखा जिसमें व्यक्तिगत पीड़ा, संघर्ष और दृढ़ता एक साथ दिखाई देती है।
लोकप्रिय सिनेमा से गंभीर भूमिकाओं तक लंबा सफर
रानी मुखर्जी का फिल्मी सफर इस मायने में अलग रहा है कि उन्होंने एक ही तरह के किरदारों में खुद को सीमित नहीं रखा।
एक दौर में वह रोमांटिक और कॉमेडी फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री रहीं। ‘कुछ कुछ होता है’, ‘हम तुम’ और ‘बंटी और बबली’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाया।
लेकिन इसी लोकप्रियता के बीच उन्होंने गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं की ओर भी कदम बढ़ाया।
यही विविधता उनके लंबे करियर की महत्वपूर्ण ताकत बनी।
रानी के लिए यह सम्मान सिर्फ फिल्मी पुरस्कार से अलग
फिल्मी पुरस्कार आम तौर पर किसी फिल्म या किरदार में अभिनय के लिए दिए जाते हैं। मानद डॉक्टरेट का स्वरूप अलग है।
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का सम्मान रानी मुखर्जी के व्यापक योगदान को रेखांकित करता है। इसमें उनकी कला के साथ उन सामाजिक विषयों को भी महत्व दिया गया है जिन्हें उन्होंने फिल्मों के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया।
इस वजह से Rani Mukerji Honorary Doctorate उनके करियर के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में शामिल हो गया है।
भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच का प्रतीक
रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया में मिला यह सम्मान भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच की भी कहानी बताता है।
आज भारतीय फिल्में केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में भारतीय कलाकारों और कहानियों के लिए दर्शक मौजूद हैं।
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की बड़ी मौजूदगी ने भी भारतीय फिल्मों के लिए मजबूत दर्शक आधार तैयार किया है। ऐसे मंचों के जरिए भारतीय सिनेमा की सांस्कृतिक पहुंच और मजबूत होती है।
फेडरेशन स्क्वेयर में यादगार बना समारोह
मेलबर्न का फेडरेशन स्क्वेयर इस विशेष आयोजन का केंद्र बना। यहीं रानी मुखर्जी को मानद डॉक्टरेट प्रदान की गई।
एक लोकप्रिय भारतीय अभिनेत्री को अकादमिक जगत की प्रतिष्ठित उपाधि मिलते देखना समारोह में मौजूद लोगों के लिए भी खास अनुभव रहा।
रानी का भावुक होना इस बात का संकेत था कि यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत रूप से कितना महत्वपूर्ण था।
रानी मुखर्जी के करियर में एक और सुनहरा अध्याय
तीन दशक से ज्यादा लंबे सफर में रानी मुखर्जी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक दौर में वह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल रहीं और बाद में उन्होंने चयनित फिल्मों के जरिए अपनी वापसी को मजबूत किया।
उनकी फिल्मों में अभिनय की विविधता के साथ सामाजिक विषयों की मौजूदगी भी दिखाई देती है।
अब ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का सम्मान उनके इसी लंबे सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है।
महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर फिल्मों की भूमिका
रानी मुखर्जी के सम्मान के दौरान जिन विषयों का उल्लेख किया गया, उनमें महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
उनकी कई फिल्मों ने महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता, शिक्षा, सम्मान और न्याय जैसे विषयों को दर्शकों के सामने रखा है।
बड़े पर्दे पर इन मुद्दों की प्रस्तुति ने मनोरंजन के साथ सामाजिक चर्चा को भी जगह दी।
यही वह पहलू है जिसे ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने उनके योगदान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना।
सिनेमा की ताकत को मिली अकादमिक पहचान
रानी मुखर्जी को D.Litt. की मानद उपाधि दिए जाने का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि सिनेमा का प्रभाव केवल बॉक्स ऑफिस या मनोरंजन तक सीमित नहीं होता।
कहानियां समाज में बहस पैदा कर सकती हैं, लोगों के नजरिए को प्रभावित कर सकती हैं और उन मुद्दों को चर्चा में ला सकती हैं जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
रानी के करियर में ऐसी कई फिल्मों का उल्लेख किया जा सकता है जिन्होंने सामाजिक मुद्दों को लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बनाया।
शाहरुख और रानी की उपलब्धि में जुड़ी एक कड़ी
2019 में शाहरुख खान और अब 2026 में रानी मुखर्जी—दोनों भारतीय सिनेमा के ऐसे कलाकार हैं जिन्हें ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने सम्मानित किया है।
शाहरुख खान को सिनेमा और सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट दी गई थी। अब रानी मुखर्जी को भी D.Litt. से सम्मानित किया गया है।
इससे ला ट्रोब यूनिवर्सिटी और भारतीय सिनेमा के बीच एक विशेष सांस्कृतिक संबंध भी दिखाई देता है।
रानी की भावुक प्रतिक्रिया ने समारोह को बनाया खास
सम्मान ग्रहण करते समय रानी मुखर्जी का भावुक होना समारोह का सबसे मानवीय पक्ष रहा।
एक अभिनेत्री के रूप में दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन करने वाली रानी ने अपने शुरुआती सपनों को याद किया और बताया कि सिनेमा उनके लिए अपने माता-पिता और देश को गौरवान्वित करने का माध्यम बना।
करियर की शुरुआत में जोखिम लेने और अलग तरह की कहानियों का चुनाव करने की उनकी बात भी इस अवसर पर खास रही।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला कलाकार की उपलब्धि
ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में एक भारतीय अभिनेत्री को यूनिवर्सिटी की मानद डॉक्टरेट मिलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला कलाकारों की बढ़ती पहचान को भी दिखाता है।
रानी मुखर्जी ने अपने करियर में कई मजबूत महिला किरदार निभाए हैं। इन भूमिकाओं ने भारतीय सिनेमा में महिलाओं की अलग-अलग परिस्थितियों और संघर्षों को दर्शाया।
अब उन्हीं योगदानों को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच से सम्मान मिला है।
रानी मुखर्जी के लिए आगे की यात्रा भी महत्वपूर्ण
मानद डॉक्टरेट के साथ रानी मुखर्जी के करियर का एक नया चरण दर्ज हुआ है। तीन दशक से ज्यादा समय तक लगातार सक्रिय रहने के बाद भी उन्होंने अपनी भूमिकाओं में विविधता बनाए रखी है।
उनकी फिल्मों का चुनाव यह दिखाता है कि वह केवल लोकप्रियता पर निर्भर रहने के बजाय ऐसे किरदारों की ओर भी बढ़ती रही हैं जिनमें अभिनय की चुनौती और सामाजिक महत्व दोनों मौजूद हों।
बॉलीवुड से अकादमिक सम्मान तक पहुंची रानी की कहानी
एक अभिनेत्री के लिए यूनिवर्सिटी की मानद डॉक्टरेट अपने आप में असाधारण उपलब्धि है। रानी मुखर्जी की यात्रा बॉलीवुड की मुख्यधारा से शुरू होकर ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची जहां उनके अभिनय और सामाजिक प्रभाव दोनों को सम्मान मिला।
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का D.Litt. सम्मान उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की सांस्कृतिक शक्ति की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति के रूप में भी देखा जा सकता है।
Rani Mukerji Honorary Doctorate ने बनाया यादगार 2026
2026 रानी मुखर्जी के करियर में याद रखने वाला साल बन गया है। ऑस्ट्रेलिया में मानद Doctor of Letters उपाधि और IFFM 2026 में विशेष प्रशस्ति पत्र—दोनों सम्मान एक ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिलना उनके लिए विशेष उपलब्धि है।
एक ओर विश्वविद्यालय ने उनके व्यापक योगदान को मान्यता दी और दूसरी ओर फिल्म फेस्टिवल ने उनकी अभिनय यात्रा का उत्सव मनाया।
रानी मुखर्जी के तीन दशक लंबे करियर को देखते हुए यह सम्मान उनके सफर की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनकर सामने आया है।

