Rwanda समर्थित विद्रोहियों ने गोमा पर किया कब्जा: 17 की मौत, 360 घायल; कांगो सरकार ने कहा ‘युद्ध का ऐलान
अफ्रीका के खनिज संपदा से भरपूर देश कांगो में एक बार फिर विद्रोहियों का आतंक चरम पर है। सोमवार तड़के Rwanda समर्थित एम23 विद्रोही गुट ने कांगो के पूर्वी हिस्से में स्थित गोमा शहर पर हमला बोल दिया। विद्रोहियों ने भारी गोलीबारी करते हुए शहर पर कब्जा कर लिया। इस दौरान 17 लोगों की मौत हो गई और 360 से अधिक घायल हो गए। विद्रोहियों ने शहर के 20 लाख लोगों को दहशत में डालते हुए चेतावनी दी है कि वे शांत रहें और कांगो के सैनिक सरेंडर कर दें।
युद्ध की घोषणा: कांगो सरकार का पलटवार
कांगो सरकार ने विद्रोहियों की इस कार्रवाई को सीधे तौर पर “युद्ध का ऐलान” करार दिया है। सरकार का कहना है कि यह हमला एक सोची-समझी साजिश के तहत हुआ है। कांगो में पहले से ही 100 से ज्यादा हथियारबंद गुट सक्रिय हैं, लेकिन एम23 गुट सबसे खतरनाक और प्रभावशाली है। इस गुट के इरादे शहर के प्रशासन और खनिज संपदा पर कब्जा करने के हैं।
सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि गोमा की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को घरों के अंदर रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया है।
विद्रोही गुट एम23 की पृष्ठभूमि
एम23 विद्रोही गुट की शुरुआत 2012 में हुई थी। इसे जातीय तुत्सी लोगों ने कांगो की सेना से अलग होकर बनाया था। उनका दावा है कि यह समूह जातीय भेदभाव और अन्याय के खिलाफ लड़ रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एम23 का मुख्य उद्देश्य कांगो के संसाधनों और इलाकों पर कब्जा करना है।
इस गुट ने कांगो में अपने नियंत्रण वाले इलाकों में समानांतर सरकार और टैक्स सिस्टम लागू कर रखा है। इनके कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थानीय लोग इनके नियमों के तहत काम करने को मजबूर हैं।
रवांडा का समर्थन: विवाद का केंद्र
कांगो और अमेरिका ने रवांडा पर आरोप लगाया है कि वह एम23 विद्रोही गुट को समर्थन दे रहा है। कांगो का दावा है कि रवांडा न केवल एम23 के लिए हथियार और संसाधन मुहैया करवा रहा है, बल्कि उसके सैनिक भी इस गुट के साथ लड़ाई में शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, रवांडा ने 2021 में कांगो में अपने सैनिक और मिसाइल सिस्टम तैनात किए थे। हालांकि रवांडा ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रवांडा के इस हस्तक्षेप ने एम23 की ताकत को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। 2021 में जहां इस गुट के पास केवल कुछ सैकड़ों लड़ाके थे, वहीं अब इसके पास 6,500 से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं।
गोमा में दहशत का माहौल
गोमा शहर, जो उत्तरी किवु प्रांत का सबसे बड़ा शहर है, पहले से ही विस्थापन और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। इस इलाके की एक तिहाई से अधिक आबादी पहले ही विस्थापित हो चुकी है। एम23 के हमले के बाद शहर में भय और अनिश्चितता का माहौल है। लगातार गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि स्कूल, बाजार और सरकारी कार्यालय बंद कर दिए गए हैं। लोग अपने घरों में छिपने को मजबूर हैं। कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है।
खनिज संपदा पर नियंत्रण की होड़
कांगो दुनिया के सबसे खनिज संपदा से भरपूर देशों में से एक है। यहां सोना, कोबाल्ट और टैंटलम जैसे बहुमूल्य खनिज पाए जाते हैं। यही वजह है कि देश के पूर्वी हिस्से में सैकड़ों विद्रोही गुट सक्रिय हैं। ये गुट इन खनिज संसाधनों पर कब्जा जमाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
एम23 विद्रोही गुट भी खनिज संपदा पर नियंत्रण के उद्देश्य से सक्रिय है। कांगो सरकार का कहना है कि अगर गोमा शहर पूरी तरह से इनके नियंत्रण में आ गया, तो यह विद्रोही गुट कांगो की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र ने इस संकट पर गहरी चिंता जताई है। यूएन ने कहा है कि अगर स्थिति जल्द काबू में नहीं आई, तो यह पूरे क्षेत्र में व्यापक संकट पैदा कर सकती है। यूएन विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि पूर्वी कांगो में लगभग 4,000 रवांडा सैनिक तैनात हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
आने वाले दिन और बढ़ा सकते हैं संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि कांगो में एम23 की बढ़ती ताकत और रवांडा की संदिग्ध भूमिका इस क्षेत्र को एक लंबे गृहयुद्ध की ओर ले जा सकती है। कांगो सरकार और विद्रोहियों के बीच किसी भी तरह की बातचीत का कोई संकेत नहीं है।
गोमा शहर के हालात लगातार खराब हो रहे हैं, और अगर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है।

