एस०डी० कॉलेज ऑफ मैनेजमेन्ट स्टडीज: ऑनलाईन पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन
मुजफ्फरनगर। एस०डी० कॉलेज ऑफ मैनेजमेन्ट स्टडीज के सभागार में मिशन शक्ति के अन्तर्गत नारी सुरक्षा, नारी स्वावलंबन पर पाठ्यक्रम डी०एल०एड० (बी०टी०सी०) द्वारा कॉलेज ग्रुप पर महिला सशक्तिकरण के उपलक्ष में एक आनलाईन पोस्टर मेकिग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कॉलेज प्राचार्य डा० आलोक कुमार गुप्ता व प्राचार्या बबली तोमर एवं डी०एल०एड० (बी०टी०सी०) के छात्र/छात्राओं ने अपनी आनलाईन उपस्थिति देकर किया।
सर्वप्रथम प्रतियोगिता में डी०एल०एड० (बी०टी०सी०) के छात्र/छात्राओं द्वारा कॉलेज ग्रुप पर महिला सशक्तिकरण के उपलक्ष में घर पर रहकर ही महिला सशक्तिकरण के विषय पर भिन्न-भिन्न आकर्षक पोस्टर बनाकर कॉलेज ग्रुप पर भेजें
तत्पश्चात् सभी प्रतिभाग करने वाले छात्र/छात्राओं में से गठित चयन समिति द्वारा प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान चयनित किये गये। जिसमें प्रथम विजेता ऑचल धीमान, संयुक्त रूप से द्वितीय विजेता- प्रिति वर्मा व साक्षी एवं तृतीय विजेता सना प्रवीण रही। कॉलेज प्राचार्य डा० आलोक कुमार गुप्ता ने इस विषय पर आनलाईन अपने विचार प्रस्तुत किये
कहा कि मिशन शक्ति से नारियों में आत्म सुरक्षा का विकास होगा तथा मानसिक व बौद्विक रूप से भी महिलायें सशक्त होगी। महिलाओं में परिमित शक्ति और क्षमताएँ हैं।
व्यवहारिक जगत के सभी क्षेत्रों में उन्होने कीर्तिमान स्थापित किये हैं। अपने अद्भुद साहस, अथक परिश्रम तथा दूरदर्शी बुद्धिमता के आधार पर विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रही हैं। यह विशेष दिन अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं का सम्मान करने और उनकी उपलब्धियों का उत्सव मनाने का दिन है।
डी०एल०एड० (बी०टी०सी०) की प्राचार्या बबली तोमर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्त्री प्राचीन काल से ही सशक्त रही है, परन्तु विदेशी आक्रन्ताओं की गाज मुख्यतः मन्दिरों व महिलाओं पर गिरी, जिसके फलस्वरूप अनेको कुरितियों जैसे बाल विवाह, विधवा का विवाह न होना तथा सती प्रथा का जन्म आदि कुरितियाँ उत्पन्न हुई।
आधुनिक युग में महिलाओं को झॉसी की रानी की तरह होना है, जिसके हाथ मे तलवार, पीठ पर स्नेह के साथ पुत्र अर्थात जननी का स्वरूप व अपने अधिकारों के प्रति जागरूक, मानवीय संवेदना, करूणा, वात्सल्य जैसे भावो से परिपूर्ण अनेक नारियों ने युग निर्माण में अपना योगदान दिया है।
उन्होनें देश की उन्नति में महिलाओं के योगदान को अनुपम बताया। उन्होने कहा कि समाज स्त्री-पुरूष रूपी दो पहियों के सहारे चल रहा है। दोनो ही जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिये आवश्यक है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डी०एल०एड० (बी०टी०सी०) के शिक्षकगण वरूण कुमार, राजीव कुमार, प्रिया गोयल, संगीता कौशिक, सोनिका गर्ग, रजनी, रूपम सक्शेना, श्वेता, शशांक भारद्वाज, संदीप गर्ग व रश्मि कौशिक एवं छात्र/छात्राओं ने योगदान दिया।
