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BRICS समिट से पहले भारत-बांग्लादेश में बढ़ा सस्पेंस! Tarique Rahman आएंगे या नहीं? शेख हसीना पर अटका पूरा मामला

Tarique Rahman की दिल्ली यात्रा को लेकर स्थिति साफ होने के साथ यह भी पता चलेगा कि दोनों पड़ोसी देश टकराव की राजनीति से आगे बढ़कर बातचीत का रास्ता कितना खोल पाते हैं। फिलहाल BRICS Summit 2026 के मंच पर बांग्लादेश की संभावित मौजूदगी से ज्यादा चर्चा उस कूटनीतिक पेंच की है, जिसका एक सिरा दिल्ली में है और दूसरा ढाका में—और बीच में सबसे बड़ा सवाल शेख हसीना का है।

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Bangladesh में हिंदू परिवार के 4 लोगों की संदिग्ध मौत से सनसनी, बंद घर में मिले रिटायर्ड शिक्षक, पत्नी, बेटी और 12 साल के बेटे के शव

Bangladesh रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध मौत का मामला फिलहाल जांच के दौर में है। रिटायर्ड शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी प्रीतिलता, 23 वर्षीय बेटी आगमी और 12 वर्षीय बेटे प्रियम के शव शनिवार रात दासपाड़ा स्थित बंद घर से मिले। गुरुवार के बाद परिवार से संपर्क नहीं हो पा रहा था और चारों मोबाइल फोन बंद थे।

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भारत आने से पहले ही Tarique Rahman का दौरा टला! शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अड़ा बांग्लादेश, दिल्ली से रिश्तों में फिर बढ़ी तल्खी

Tarique Rahman की प्रस्तावित भारत यात्रा फिलहाल टल गई है और इसके केंद्र में शेख हसीना का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण बना हुआ है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में यात्रा के लिए उचित माहौल नहीं है और ढाका भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। बांग्लादेश ने भारत के सामने शेख हसीना तथा अन्य फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण और शाहिद शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को सौंपने की मांग रखी है। दूसरी ओर, भारत और बांग्लादेश के बीच उच्चस्तरीय संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और दोनों पक्षों के अधिकारी द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई दिल्ली इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों देश कूटनीतिक संवाद के जरिए ऐसा रास्ता निकाल पाते हैं जिससे तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा दोबारा पटरी पर लौट सके।

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Bangladesh में बिजली संकट से हाहाकार! रोज 10 घंटे तक कटौती, रात 8 बजे बाजार बंद; अब भारत से मांगा अतिरिक्त डीजल

Bangladesh का मौजूदा बिजली संकट अब केवल लंबे पावर कट तक सीमित नहीं रहा है। कई क्षेत्रों में रोजाना कई घंटे बिजली गुल रहने, गर्मी और हीटवेव के बीच लोगों की परेशानी बढ़ने तथा कृषि, कारोबार, गारमेंट उद्योग और झींगा पालन पर असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं। बिजली उत्पादन में करीब 1,500 मेगावाट की कमी को प्राकृतिक गैस और LNG आपूर्ति में बाधाओं से जोड़ा जा रहा है।

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Bangladesh में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला: BNP प्रत्याशी फखरुल की जीत तय; कट्टरपंथी जमात ने रिटायर्ड आर्मी अफसर को उम्मीदवार बनाया

Bangladesh में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए वास्तविक चुनावी मुकाबला देखने को मिल रहा है। BNP ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद ने नामांकन दाखिल किया है। 20 अगस्त को संसद सदस्य मतदान करेंगे। फरवरी के आम चुनाव में BNP को दो-तिहाई बहुमत मिलने के कारण फखरुल की स्थिति मजबूत मानी जा रही है

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भारत की दहलीज तक पहुंचा चीन! Bangladesh ने तीस्ता नदी परियोजना सौंपी, अब फाइटर जेट और एयरबेस डील से बढ़ी नई रणनीतिक चिंता

चीन और Bangladesh के बीच बढ़ता आर्थिक तथा रक्षा सहयोग दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है। दूसरी ओर भारत भी बांग्लादेश के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए विभिन्न आर्थिक, कूटनीतिक और विकास परियोजनाओं पर लगातार कार्य कर रहा है।

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Bangladesh में ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच हिंदुओं का विशाल मशाल मार्च: राम प्रतिमा प्रोजेक्ट रुकने पर फूटा गुस्सा, सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम

Bangladesh में निकला विशाल मशाल मार्च केवल एक धार्मिक परियोजना के समर्थन का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा, धार्मिक अधिकारों और न्याय की मांग से जुड़ा एक बड़ा सामाजिक संदेश भी बनकर उभरा। अब सबकी निगाहें सरकार और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मामले में संतोषजनक कदम उठाए जाते हैं तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन प्रदर्शनकारी संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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Bangladesh में हिंदुओं पर हमले तेज़, नोबेल विजेता यूनुस की चुप्पी पर सवाल?

Bangladesh में हाल की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि धार्मिक असहनशीलता केवल अल्पसंख्यकों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए खतरनाक हो सकती है। हिंदू समुदाय की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना बांग्लादेश के हर नागरिक और उसके नेताओं की जिम्मेदारी है। मोहम्मद यूनुस को अब इस सवाल का जवाब देना होगा कि क्या वे सच में धार्मिक सहिष्णुता के पक्षधर हैं या केवल अपनी विश्व स्तर पर बनाई गई छवि को बचाने में व्यस्त हैं।

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Bangladesh में हिंदुओं पर अत्याचार: भारत की कड़ी नजर, पीएम मोदी और जयशंकर ने बनाई सख्त रणनीति

Bangladesh में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का इतिहास लंबा है। विभाजन के बाद से ही वहां अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जाता रहा है। हालांकि, शेख हसीना की सरकार के तहत कुछ हद तक स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में यह समस्या और गंभीर हो गई है।

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Bangladesh की बदलती राजनीति: जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध हटाने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर

बांग्लादेश (Bangladesh) में मोहम्मद युनुस की सरकार के आने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक माहौल में तेजी से बदलाव हो रहा है। जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध हटाने का फैसला न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में उथल-पुथल मचा रहा है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों को भी प्रभावित कर रहा है।

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Bangladesh में प्रमुख बदलाव: Yunus सरकार का विस्तार

Bangladesh में हो रहे राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों ने देश के भविष्य की दिशा को प्रभावित किया है। प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का विस्तार, धार्मिक हिंसा की बढ़ती घटनाएँ, और हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रहे हमले बांग्लादेश की राजनीति और समाज में एक नया बदलाव लाए हैं। आने वाले समय में, इन मुद्दों के समाधान और स्थिरता की दिशा में किए गए प्रयास ही बांग्लादेश की समृद्धि और सामाजिक सौहार्द को सुनिश्चित करेंगे।

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