दो घातक इंजेक्शन के बाद भी नहीं हुई मौत! अमेरिका में फांसी की प्रक्रिया पर रोक, Christa Pike मामले ने उठाए बड़े सवाल
News-Desk
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America news, Christa Pike, Christa Pike Execution, crime news, Death Penalty, Death Row, Failed Execution, Lethal Injection, Tennessee News, US Newsइंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका के टेनेसी राज्य से मौत की सजा की प्रक्रिया से जुड़ा एक असाधारण मामला सामने आया है। Christa Pike नाम की महिला कैदी को घातक इंजेक्शन के जरिए मौत की सजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन दो इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी मौत नहीं हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी धड़कन चलती रही और वह नींद में खर्राटे लेती नजर आईं।
मामला सामने आने के बाद पाइक के वकीलों ने देर रात अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आपात याचिका दाखिल कर प्रक्रिया रोकने की मांग की। इसके बाद टेनेसी के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कराई है। राज्य के गवर्नर ने इस घटना के बाद इस साल होने वाली बाकी मौत की सजाओं पर फिलहाल रोक लगा दी है।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इससे पहले अमेरिका में ऐसे कुछ मामले सामने आए थे, जिनमें घातक इंजेक्शन देने की प्रक्रिया तकनीकी या चिकित्सकीय दिक्कतों के कारण पूरी नहीं हो सकी थी। लेकिन पाइक के मामले में दावा है कि घातक दवा शरीर में पहुंचने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई।
क्या हुआ मौत का इंजेक्शन देने के दौरान?
मौत की सजा की प्रक्रिया के दौरान घटनाक्रम कई घंटों तक चला। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक क्रिस्टा पाइक को स्ट्रेचर पर बांधा गया था और शुरुआत में वह होश में थीं।
घटनाक्रम इस तरह बताया गया है—
रात 7:27 बजे: पाइक को स्ट्रेचर पर बांधकर प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान वह होश में थीं और उन्हें पहला इंजेक्शन दिया गया।
रात 8:26 बजे: उन्हें पेंटोबार्बिटल का दूसरा इंजेक्शन दिया गया। इस समय तक वह नींद में थीं।
रात 8:53 बजे: पाइक का माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और गवाहों को कमरे से बाहर जाने के लिए कहा गया।
इसके बाद भी उनकी मौत नहीं हुई। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी धड़कन चलती रही और वह सांस ले रही थीं।
इसी दौरान उनके वकीलों ने अदालत का रुख किया और प्रक्रिया को रोकने के लिए आपात हस्तक्षेप की मांग की।
दो इंजेक्शन के बाद भी जिंदा रहने का दावा
पाइक के वकीलों द्वारा अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कहा गया कि अधिकारियों ने उन्हें पेंटोबार्बिटल के दो इंजेक्शन दिए, लेकिन इसके बावजूद उनकी मृत्यु नहीं हुई।
यह स्थिति इसलिए असामान्य मानी जा रही है क्योंकि मौत की सजा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया का उद्देश्य दवा के माध्यम से कैदी की मृत्यु सुनिश्चित करना होता है। यहां मामला तब और पेचीदा हो गया जब कथित तौर पर निर्धारित दवाएं दिए जाने के बाद भी पाइक की धड़कन जारी रही।
टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा कि अधिकारियों ने अदालत द्वारा मंजूर मौत के इंजेक्शन की प्रक्रिया में निर्धारित हर कदम का पालन किया था। इसके बावजूद प्रक्रिया सफल नहीं हुई।
अमेरिका में पहले भी हुई हैं फेल्ड एग्जीक्यूशन की घटनाएं
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जब घातक इंजेक्शन देने के बावजूद मौत की सजा पाए व्यक्ति की जान बच गई।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसे सात मामलों में नस में घातक दवा पहुंचाने में परेशानी हुई थी। मेडिकल प्रक्रिया में समस्या आने के कारण निर्धारित तरीके से मौत नहीं हो सकी।
लेकिन पाइक का मामला उन घटनाओं से अलग बताया जा रहा है। यहां सवाल यह है कि जब घातक दवा शरीर में पहुंच चुकी थी, तब भी उनकी मृत्यु क्यों नहीं हुई।
यही पहलू इस घटना को अमेरिकी मौत की सजा की प्रक्रिया के संदर्भ में असामान्य बनाता है।
दूसरे इंजेक्शन के बाद क्या होना चाहिए, इस पर नियम स्पष्ट नहीं
इस मामले का एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार टेनेसी के नियमों में ऐसी स्थिति के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं है कि यदि पहले इंजेक्शन के बाद कैदी की मौत न हो और दूसरा इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी वह जीवित रहे तो आगे क्या किया जाए।
यानी निर्धारित प्रक्रिया के दौरान मौत न होने की स्थिति में अधिकारियों के सामने कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े हो सकते हैं।
पाइक के मामले में यही स्थिति बनी। दो इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई और इसके बाद उनके वकीलों ने अदालत में हस्तक्षेप की मांग की।
क्रिस्टा पाइक कौन हैं?
क्रिस्टा गेल पाइक को वर्ष 1995 में 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। हत्या के समय पाइक की उम्र केवल 18 वर्ष थी।
जनवरी 1995 में पाइक, उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड तादारिल शिप और एक अन्य दोस्त ने स्लेमर को टेनेसी यूनिवर्सिटी के कैंपस के पास एक जंगल में बुलाया था।
अदालत में पेश किए गए मामले के मुताबिक वहां स्लेमर के साथ मारपीट की गई और धारदार वस्तु से हमला किया गया। बाद में इसी मामले में पाइक को हत्या का दोषी पाया गया।
बॉयफ्रेंड तादारिल शिप को भी मिली थी उम्रकैद
इस मामले में पाइक के तत्कालीन बॉयफ्रेंड तादारिल शिप भी आरोपी थे। अपराध के समय उनकी उम्र 17 वर्ष थी।
शिप ने बाद में मामले में गवाही दी। नाबालिग होने के कारण उन्हें मौत की सजा नहीं दी गई और अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
पाइक को वर्ष 1995 में दोषी ठहराया गया और अगले वर्ष उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।
टेनेसी में 200 साल से ज्यादा समय बाद महिला की मौत की सजा
क्रिस्टा पाइक टेनेसी की मौत की सजा पाने वाली महिला कैदियों में विशेष रूप से चर्चित नाम रही हैं। अगर निर्धारित प्रक्रिया पूरी हो जाती तो वह 200 साल से अधिक समय में टेनेसी में मौत की सजा पाने वाली पहली महिला बनतीं।
यही वजह है कि उनका मामला राज्य में मौत की सजा के इतिहास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
पाइक को 30 मार्च 1996 को मौत की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने कई साल जेल में बिताए।
पाइक के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी उठे सवाल
जेल में रहने के दौरान पाइक ने अपने अपराध को लेकर पछतावा व्यक्त किया था। उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का भी इलाज किया गया था।
उनके वकीलों ने अदालत में यह तर्क रखा था कि पाइक के बचपन में हुए कुछ खराब अनुभवों और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का उनके व्यवहार पर असर पड़ा था।
हालांकि, पीड़िता कोलीन स्लेमर के परिवार ने पाइक को दी गई मौत की सजा का समर्थन किया था। स्लेमर की मां का कहना था कि उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, इसलिए पाइक को अपने अपराध की सजा मिलनी चाहिए।
गवर्नर ने बाकी मौत की सजाओं पर लगाई रोक
पाइक को मौत की सजा देने की प्रक्रिया विफल होने के बाद टेनेसी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। राज्य के गवर्नर ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही इस साल टेनेसी में होने वाली बाकी मौत की सजाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन होने के बावजूद मौत क्यों नहीं हुई और क्या प्रोटोकॉल में किसी तरह की तकनीकी या चिकित्सकीय समस्या सामने आई।
टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने क्या कहा?
टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन की ओर से कहा गया कि अधिकारियों ने अदालत से मंजूर मौत के इंजेक्शन की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का पालन किया था।
विभाग के अनुसार प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल के मुताबिक की गई, लेकिन इसके बावजूद वह सफल नहीं हुई।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब जांच में यह देखा जाएगा कि प्रोटोकॉल के पालन के बावजूद दवा का अपेक्षित प्रभाव क्यों नहीं पड़ा।
मौत की सजा की प्रक्रिया पर फिर उठ सकते हैं सवाल
क्रिस्टा पाइक का मामला अमेरिका में मौत की सजा और घातक इंजेक्शन की प्रक्रिया को लेकर पहले से मौजूद बहस में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
घातक इंजेक्शन को लंबे समय से मौत की सजा के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में इसके प्रोटोकॉल, दवाओं और प्रक्रियाओं को लेकर विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आती रही हैं।
पाइक के मामले में मुख्य सवाल यह है कि यदि निर्धारित दवा देने के बाद भी कैदी की मौत नहीं होती, तो प्रशासन के पास कानूनी रूप से आगे बढ़ने का क्या विकल्प है।
इस घटना ने कई कानूनी और चिकित्सकीय सवाल खड़े किए
दो इंजेक्शन के बाद भी मौत न होने की घटना के बाद कई सवाल सामने आए हैं। क्या दवा की मात्रा पर्याप्त थी? क्या दवा ने अपेक्षित तरीके से काम किया? क्या कैदी के शरीर की प्रतिक्रिया अलग थी? क्या प्रक्रिया में कोई तकनीकी समस्या आई? और सबसे अहम—अगर निर्धारित प्रक्रिया के बाद भी मृत्यु न हो तो कानून आगे क्या करने की अनुमति देता है?
इन सवालों के जवाब जांच और अदालत की आगे की कार्यवाही से ही स्पष्ट होंगे।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि क्रिस्टा पाइक की मौत की सजा देने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और इसके बाद टेनेसी ने इस साल की अन्य निर्धारित executions को रोक दिया है।
1995 की हत्या से 2026 की असफल फांसी तक
क्रिस्टा पाइक का मामला करीब तीन दशक पुराना है। 1995 में 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पाइक को 1996 में मौत की सजा सुनाई गई थी।
इसके बाद वर्षों तक वह टेनेसी की डेथ रो में रहीं। अब जब उन्हें घातक इंजेक्शन दिया गया, तो प्रक्रिया अपेक्षित परिणाम तक नहीं पहुंच सकी।
उनके मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया, राज्य की जांच और अदालतों के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।

