काली को प्रदूषित कर रहा शहर का गंदा पानी
मुजफ्फरनगर। काली नदी पर बने एसटीपी भी नदी को प्रदूषण से मुक्ति नहीं दिला पाए। शासन स्तर से किए गए एसटीपी संचालन के ठेके के बावजूद नदी पर बने प्लांट बंद पड़े हैं। श्मशान घाट के पास शहर के बड़े नाले का गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है। इससे नदी प्रदूषित हो रही है।
शहर से प्रतिदिन सौ मिलियन लीटर से भी ज्यादा गंदा पानी विभिन्न नालों के माध्यम से काली नदी में जाता है। इससे नदी दूषित हो रही है। नदी पर 23 एमएलडी की क्षमता का एसटीपी लगा है।
यह करीब डेढ़ साल से बंद था। कुछ दिन पूर्व शासन स्तर से एसटीपी संचालन का ठेका हुआ है। कार्यदायी संस्था ने इसका संचालन शुरू किया था। लेकिन कुछ दिन चलकर यह बंद हो गया।
श्मशान घाट के पास लगे पंपिंग स्टेशन से नगर का सबसे बड़ा नाला जुड़ा है, लेकिन पंपिंग स्टेशन बंद होने के कारण नाले का पानी सीधे नदी में जा रहा है। इसके अलावा एसटीपी के अन्य पंपिंग स्टेशन भी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। नालों का पानी सीधे काली नदी में जाने से प्रदूषण के हालात बने हुए हैं।
एसटीपी चलने से भी नहीं बनेगी बात-एसटीपी चल भी जाएं तो भी काली नदी को प्रदूषण से निजात नहीं मिल सकती। एसटीपी की क्षमता 32 एमएलडी है जबकि शहर से 100 एमएलडी से भी ज्यादा पानी निकलता है। इसे साफ करने के लिए ज्यादा क्षमता के एसटीपी की जरूरत है।
बढ़ाई जानी है एसटीपी की क्षमता-काली नदी के किनारे नए एसटीपी बनाए जाने हैं।
नमामि गंगे में शामिल होने के बाद नदी पर 22 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी बनाया जाएगा तथा पहले से चल रहे 32.5 एमएलडी के एसटीपी की क्षमता बढ़ाकर 65 एमएलडी की जाएगी। इसके लिए दो अरब 31 करोड़ 79 लाख रुपया स्वीकृत है।
एसटीपी का संचालन किया जा रहा है। पंपिंग स्टेशन बंद है तो संचालन कर रही कंपनी के अधिकारियों से जानकारी की जाएगी। इस संबंध में शासन स्तर को सूचना प्रेषित की जाएगी। – विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ।
