ज्ञान का फल भगवान-डॉ. राघवेंद्र महाराज
मोरना। कथा व्यास स्वामी डॉ. राघवेंद्र महाराज ने कहा कि जीव अभिमान छोड़ करके भगवान की सतत भक्ति करें, तो भगवान कभी-कभी जीव को अपने से बड़ा बना देते हैं। जीव में अभिमान आए, तो भगवान उसकी उपेक्षा करते हैं। साधारण मानव को भय लगता है, तभी वह पाप को त्यागता है। भय से भक्ति उत्पन्न होती है। संसार में रहने से, संसार का चिंतन करने से मन बिगड़ता है। मन से भगवान को ध्यान करें, तो मन शुद्ध होता है। मन शुद्ध होने से शुद्ध भक्ति का उदय होता है।
गंगा तट स्थित शिवधाम में चल रही भागवत कथा के समापन पर अयोध्या से पधारे कथा व्यास स्वामी डॉ. राघवेंद्र महाराज ने कहा कि संध्या के समान श्रेष्ठ कोई धर्म नहीं होता। मन को शांत रखे, जो अपने हृदय को जलता है, उसको भगवान के मंदिर जैसा जलाने का पाप लगता है। आपके हृदय में भगवान है, कुछ भी हो हृदय को मत जलाना।
जीवन में पैसा मुख्य हो गया है, तभी से पाप बढ़ गया है। जीवन में पैसा गौण के समान है, परमात्मा मुख्य है। धन साध्य नहीं, धन साधन है। पैसों से सुख मिलता है यह बात सत्य है, जिसके हाथ में पैसा है, दुख भी उसी को झेलना पड़ता है। विद्या का फल, ज्ञान का फल भोग नहीं है। ज्ञान का फल भगवान है। जो भागवत कथा सुनता है वह जीव भगवान का हो जाता है।
कथा समापन पर शिवधाम अधिष्ठाता महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के सानिध्य में काशी से आए वेदमूर्ति पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित, ५१ पुरोाहितों आचार्यों की टीम ने विशाल महागणपति एवं महालक्ष्मी महायज्ञ में पूर्ण आहुति देकर संपन्न किया। इस मौके पर मुख्य यज्ञमान मनमोहन चैधरी कलकत्ता, राजेश अग्रवाल, शिवकुमार मालनी, अशोक जोशी, राजेंद्र पंसारी, तिलकराज शर्मा, प्रवीन नेमानी, हरिप्रकाश मंगला, दर्शन गुप्ता, सोम गर्ग, घनश्याम दास, सतेंद्र प्रधान, जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेंद्र आदि श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वहीं वृंदावन की प्रसिद्ध रास लीला मंडली ने श्री कृष्ण भगवान की रासलीला को सुंदर मंचन किया।

