अनंतनाग के रूनीपोरा इलाके में मुठभेड़-तीन आतंकी मारे गए
कश्मीर में अनंतनाग के रूनीपोरा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए हैं। मारे गए आतंकियों के पास से एक एके 47 राइफल और 2 पिस्तौल बरामद की गई हैं।
बता दें कि इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर एसओजी, सेना की 19-आरआर(राष्ट्रीय राइफल्स) और सीआरपीएफ ने तलाशी अभियान शुरू किया था।
इस दौरान खुद को घिरा देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और कई घंटे चली मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया। मारे गए आतंकियों की पहचान अभी नहीं हो पाई है।
इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बता दें कि दक्षिणी कश्मीर में इस महीने 13वीं मुठभेड़ हुई है। जिसमें 36 आतंकियों का सफाया हुआ है।
डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि अनंतनाग में हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकी और हिजबुल कमांडर मसूद मारा गया है। उन्होंने कहा कि मसूद के मारे जाने के बाद जम्मू संभाग का डोडा जिला पूरी तरह से आतंक मुक्त हो गया है। बताया कि मसूद दुष्कर्म का आरोपी था, जोकि फरार चल रहा था। इसके बाद वह हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया, और कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
With today’s operation at Khulchohar area of Anantnag by Police along with Local RR unit in which 2 LeT terrorists including one district commander & one HM commander Masood (in pic) were neutralised, Doda dist in Jammu Zone becomes totally militancy free once again: J&K DGP pic.twitter.com/M1OEOHuhJ7
— ANI (@ANI) June 29, 2020
गौरतलब है कि मानसून में सरहद पर आतंकियों की घुसपैठ रोकना सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा। जिस तरह से कठुआ और सांबा जिलों के बॉर्डर को आतंकियों ने घुसपैठ के लिए इस्तेमाल किया है, उस लिहाज से मानसून में घुसपैठ रोकना एक बड़ी चुनौती होगा। बहुत से नाले दोनों जिलों को पाकिस्तान से जोड़ते हैं। मानसून में कई जगहों पर बारिश की वजह से फेंसिंग क्षतिग्रस्त हो जाती है जिसका लाभ उठाकर आतंकी घुसपैठ करते हैं।
जानकारी के अनुसार पिछले चार वर्षों में नगरोटा और झज्जर कोटली में चार आतंकी हमले हुए हैं। इन हमलों में शामिल आतंकियों के कठुआ और सांबा जिलों के बॉर्डर से घुसपैठ करके आने का मामला सामने आया था। पकड़े गए इन आतंकियों के मददगारों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि किस तरह से आतंकी बॉर्डर से आते हैं।
सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठन खराब मौसम पर नजर गढ़ाए हुए हैं। जैसे ही मानसून दस्तक देगा और बारिश का दौरा शुरू होगा तो आतंकी घुसपैठ के प्रयास तेज करेंगे। इसके लिए आतंकियों ने अपने मददगारों (ओजी वर्करों) को भी सक्रिय कर दिया है।
ओजी वर्करों को आतंकियों के लिए ठिकाने तैयार करने और घुसपैठ करने के बाद हथियार मुहैया कराने व कश्मीर पहुंचाने के लिए मदद करने को कहा गया है।
