साइलेंट बीमारियों का घर है Thyroid: हल्के में लेना बड़ा सकता है मुसीबत, जानें लक्षण?
साइलेंट बीमारियों का घर है Thyroid- मानव शरीर की गुत्थी सुलझाना काफी जटिल समस्या है, मानव के हर वाहूय अथवा आंतरिक अंग का काम अलग-अलग है; परन्तु एक दूसरे से जुड़ा रहता है. अर्थात एक अपना कार्य कम या अधिक कर दिया तो दूसरे के लिए परेशानी होती है, मनुष्य के गले में Thyroid होती है. इसके श्राव से हमारे शरीर की कार्य प्रणाली सुचारू होती है. यह बीमारी आमतौर पर महिलाओं को अधिक होता है. लोग बाहरी बीमारी का इलाज तो करा लेते हैं परन्तु हार्मोनल गड़बड़ियों को अनदेखा कर दते हैं, हार्मोनल बीमारियां अनेक है परन्तु मैं यहां सिर्फ थॉयरायड की चर्चा कर रहा हूं.
Thyroid को ऑटो इम्यून बीमारी माना जाता है. यह पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों को अधिक होता है. इसके कोई खास कारण नहीं है. इसके लिए यह कहा जा सकता है कि महिलाओं मे शारीरिक उतार-चढ़ाव काफी अधिक होता है. इस उतार-चढ़ाव से हार्मोन अधिक प्रभावित होता है. इस बीमारी को मेरे विचार से साइलेंट बीमारी भी कहा जा सकता है.
इसकी वजह है कि Thyroid प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण इतने कम होते हैं कि लोग इसकी ओर ध्यान हीं नहीं देते ह. लोग आम समस्या समझ कर शरीर की गड़बड़ियों को अनदेखा कर देते हैं. जब यह अपनी पूर्ण अवस्था में होती है तो यह गंभीर हो जाती है. थॉयरायड ग्रंथि एक छोटी ग्रंथि होती है, परन्तु इसके कार्य बड़ी . यह ग्रंथि उचित मात्रा में थॉयरायड हार्मोन्स उत्पन्न करके मेटाबालिज्म को सही बनाए रखती है.
जब इस ग्रंथि में कोई खराबी होती है तो इसमें से या तो अधिक श्राव निकलता है अथवा कम निकलता है. जब श्राव अधिक होता है तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं, लेकिन जब श्राव कम निकलता है तो इसे हाइपरथॉयराडिज्म. कहते हैं, दोनों स्थिति मानव के लिए हानिकारक है.
Thyroid: होमियोपैथी जहां हो वहां तो लक्षणों की चर्चा तो होगी ही इसलिए सर्वप्रथम हाइपोथॉयराडिज्म के लक्षणों को जानते हैं :
(i) मरीज का मेटाबॉलिक स्तर गिरने लगता है.
(ii) रोगी उदास (डिप्रेशन) रहने लगता है.
iii) रोगी की कार्य क्षमता कम हो जाती, थकान महसुस करती है. (iv) कमजोरी का एहसास होना.
‘. (v) आवाज में रूखापन.
(vi) चेहरा सूजा हुआ लगना.
(vii) बालों का झड़ना.
(viii) कब्ज की शिकायत बने रहना.
(ix) धड़कन की गति कम हो जाना.
(x) निम्न रक्तचाप भी हो सकता है.
(Ni) मासिक अनियमित
तथा थक्केदार होना.
(xii) नींद अधिक आना.
(xiii) प्रजनन क्षमता कम हो जाना आदि. जबकि हाइपरथॉयराडिज्म से प्रभावित होने पर निम्नलिखित लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं
(i) महिलाओं को प्रभावित होने पर पसीना अधिक आता है.
(ii) शरीर का मेटाबॉलिक स्तर बढ़ जाता है.
(iii) भूख अधिक लगना,
(iv) मरीज का शरीर दिन-प्रतिदिन दुबली होती जाती है.
(v) धड़कन की गति अधिक होना..
(vi) नींद कम आना (अनिंद्रा).
(vii) खूली हवा पसन्द होता है. (viii) मासिक में अधिक रक्त श्राव होना.
(ix) प्रजनन क्षमता में कमी होना.
(x) Thyroid के मरीज को धूम्रपान से बचना चाहिए. हाइपोथॉयराडिज्म के केस लक्षणानुसार दवा देनी चाहिए. आमतौर कैल्केरिया कार्ब, सल्फर, चायना, स्पोंजिया आदि कारगर होती है. जबकि हाइपरथॉयराडिज्म के मामले में मैग्नेशिया कार्ब, आयोडियम, एम्ब्रा ग्रिसिया आदि उपयोगी है.
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थायरॉइड से सम्बन्धित बीमारी मुख्य रूप से अस्वस्थ खान-पान और तनावपूर्ण जीवन से होती होती है। ऐसे में सबसे पहले अपने खान-पान का ध्यान रखें और तनाव लेने से बचें। साथ ही Thyroid के इलाज के लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर कुछ मेडिकल जाँच के बाद इस बीमारी से लड़ने के लिए दवाइयां लिखेगा। जिससे आप कुछ ही दिनों में अच्छा महसूस करेंगे।

