40 साल की सबसे बड़ी गिरावट से उबारने के लिए अमेरिका ने खरीदा Japanese येन, ट्रम्प बोले- ‘जापान को मदद की जरूरत थी’; जानिए पूरी कहानी….
News-Desk
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ट्रम्प ने कहा कि जापानी मुद्रा लगातार कमजोर हो रही थी और जापान को सहायता की आवश्यकता थी। उनके अनुसार अमेरिका अपने सहयोगी देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उसके साथ खड़ा हुआ।
यह घटनाक्रम केवल जापान की अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक मुद्रा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा कीमतों और निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
क्या हुआ जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा?
पिछले सप्ताह जापानी मुद्रा येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 164 येन प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई थी। यह लगभग चार दशकों का सबसे कमजोर स्तर माना गया।
येन में आई इस तेज गिरावट ने जापान की सरकार और केंद्रीय बैंक की चिंता बढ़ा दी। इसके बाद जापान और अमेरिका ने समन्वित रूप से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने का फैसला किया।
इस कार्रवाई का उद्देश्य बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना, निवेशकों के बीच विश्वास बनाए रखना और मुद्रा सट्टेबाजी (Currency Speculation) पर नियंत्रण करना बताया गया।
10 साल बाद अमेरिका ने क्यों खरीदा जापानी येन?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जापान की मुद्रा तेजी से कमजोर हो रही थी और जापान ने सहयोग की आवश्यकता महसूस की।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की आर्थिक स्थिरता का समर्थन करता है और जापान के साथ किया गया यह कदम उसी दिशा में उठाया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल जापान की मदद भर नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।
2011 के बाद पहली बार दोनों देशों ने मिलकर किया हस्तक्षेप
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2011 के बाद पहली बार अमेरिका और जापान ने मिलकर मुद्रा बाजार में समन्वित हस्तक्षेप किया है।
2011 में पूर्वी जापान में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी के बाद दोनों देशों ने संयुक्त कार्रवाई की थी। उस समय उद्देश्य येन को अत्यधिक मजबूत होने से रोकना था।
इस बार परिस्थितियां बिल्कुल उलट हैं। अब प्रयास येन को अत्यधिक कमजोर होने से बचाने का है।
कितनी रकम खर्च हुई?
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार बैंक ऑफ जापान ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के दौरान लगभग 59 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर राशि का उपयोग किया।
वहीं अमेरिका ने अपनी ओर से आधिकारिक रूप से कोई राशि घोषित नहीं की है।
हालांकि, मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की एक नोटबुक में 5 से 10 अरब डॉलर मूल्य के जापानी येन खरीदने का उल्लेख दिखाई दिया, जिससे अमेरिका की संभावित भागीदारी के संकेत मिले।
दोनों देशों के अधिकारियों ने क्या कहा?
जापान के वित्त मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त हस्तक्षेप से हाल के महीनों में येन में आई अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने में मदद मिली है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी कहा कि इस समन्वित कार्रवाई ने बाजार में संतुलन लाने में सकारात्मक भूमिका निभाई है और अमेरिका जापान के प्रयासों का समर्थन करता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देश जापान की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहेगा।
अमेरिका को जापान की मदद करने से क्या फायदा?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका का यह कदम केवल सहयोग की भावना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके अपने आर्थिक हित भी इससे जुड़े हैं।
यदि जापानी येन लगातार कमजोर होता और जापानी सरकारी बॉन्ड्स में बिकवाली बढ़ती, तो इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में अमेरिकी बॉन्ड बाजार और अमेरिका की उधारी लागत भी प्रभावित हो सकती थी। इसलिए दोनों देशों का समन्वित कदम वैश्विक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाजार पर क्या पड़ा तत्काल असर?
ट्रम्प के बयान और संयुक्त हस्तक्षेप के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में तुरंत असर देखने को मिला।
डॉलर की तुलना में जापानी येन कुछ मजबूत हुआ और डॉलर की विनिमय दर घटकर लगभग 157.07 येन प्रति डॉलर तक आ गई। यह हाल के निचले स्तर 164 की तुलना में उल्लेखनीय सुधार माना गया।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मुद्रा बाजार में ऐसी तेजी से होने वाली चालों का असर आगे की आर्थिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
भविष्य में भी हो सकता है हस्तक्षेप
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बाजार में दोबारा अत्यधिक अस्थिरता दिखाई देती है तो अमेरिका और जापान फिर से समन्वित हस्तक्षेप कर सकते हैं।
दोनों देशों के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में भी इसी प्रकार के कदम उठाए जा सकते हैं ताकि मुद्रा बाजार में संतुलन बना रहे।
येन आखिर इतना कमजोर क्यों हुआ?
जापानी येन की कमजोरी के पीछे कई आर्थिक कारण बताए जाते हैं।
1990 के दशक की आर्थिक मंदी के बाद जापान ने लंबे समय तक ब्याज दरों को बेहद कम या नकारात्मक स्तर पर बनाए रखा ताकि निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
हालांकि हाल के वर्षों में ब्याज दरों में कुछ बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वे अभी भी दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम हैं।
कम ब्याज दरों के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने येन में सस्ते कर्ज लेकर अधिक रिटर्न देने वाले देशों में निवेश किया। इससे येन पर लगातार दबाव बना रहा।
विदेशी निवेश और पूंजी प्रवाह का भी पड़ा असर
विशेषज्ञों के अनुसार जापानी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश भी येन की कमजोरी का एक प्रमुख कारण रहा।
कई कंपनियां अपनी विदेशी कमाई को जापान वापस लाने के बजाय विदेशों में ही निवेश करती रहीं, जिससे घरेलू स्तर पर येन की मांग अपेक्षाकृत कम बनी रही।
इसका भी मुद्रा विनिमय दर पर प्रभाव पड़ा।
क्या मध्य पूर्व तनाव ने भी बढ़ाई मुश्किलें?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल-गैस की कीमतों में वृद्धि ने भी जापान की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया।
जापान अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। तेल और गैस महंगे होने से आयात बिल बढ़ा, जिससे व्यापार संतुलन प्रभावित हुआ और येन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मुद्रा बाजार पर भी दिखाई देता है।
मजबूत डॉलर और कमजोर येन से किसे क्या फायदा?
अमेरिका के लिए:
मजबूत डॉलर का अर्थ है कि अमेरिकी वस्तुएं विदेशी बाजारों में महंगी हो जाती हैं। इससे अमेरिकी निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
जापान के लिए:
कमजोर येन से जापानी निर्यातकों को फायदा मिलता है क्योंकि उनके उत्पाद विदेशी बाजारों में अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं। वहीं विदेशी पर्यटकों के लिए जापान घूमना भी सस्ता पड़ता है।
लेकिन दूसरी ओर ऊर्जा, कच्चा माल और अन्य जरूरी वस्तुओं का आयात महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू महंगाई बढ़ने लगती है।
क्या येन में अब स्थायी सुधार आएगा?
अधिकांश बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से अल्पकालिक राहत तो मिल सकती है, लेकिन लंबे समय तक किसी मुद्रा को मजबूत बनाए रखने के लिए मजबूत आर्थिक आधार भी जरूरी होता है।
यदि जापान की मौद्रिक नीति, ब्याज दरें, महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में स्थायी सुधार होता है, तभी येन लंबे समय तक मजबूती बनाए रख सकेगा।
फिलहाल विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और दोनों देशों को समय-समय पर स्थिति पर नजर रखनी होगी।

