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US में पढ़ाई के बाद नौकरी अब पड़ेगी बेहद महंगी? विदेशी छात्रों के OPT पर ₹68 लाख की फीस का प्रस्ताव, भारतीय छात्रों पर बड़ा असर

US में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले विदेशी छात्रों के लिए एक प्रस्तावित नीति चिंता बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। US OPT Fee से जुड़े नए प्रस्ताव के तहत अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने की अनुमति पाने वाले विदेशी छात्रों के लिए भारी शुल्क लगाने की योजना सामने आई है।

प्रस्ताव के मुताबिक, किसी विदेशी छात्र के Optional Practical Training यानी OPT के लिए पहली बार आवेदन करने पर उसके कॉलेज या यूनिवर्सिटी को 70 हजार डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 68 लाख रुपये का शुल्क देना पड़ सकता है।

अगर छात्र आगे OPT को जारी रखना चाहता है तो हर बार नवीनीकरण के लिए 30 हजार डॉलर, यानी करीब 29 लाख रुपये की फीस का प्रस्ताव है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह रकम सीधे छात्र से लेने का प्रावधान नहीं बताया गया है। शुल्क छात्र के बजाय उस कॉलेज या यूनिवर्सिटी को देना होगा, जहां वह पढ़ाई कर रहा है। लेकिन रकम इतनी बड़ी है कि इसका अप्रत्यक्ष असर विदेशी छात्रों पर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि संस्थानों के लिए OPT से जुड़े खर्च और जोखिम काफी बढ़ जाएंगे।

इस प्रस्ताव का असर खास तौर पर भारत और चीन के छात्रों पर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में इन दोनों देशों की बड़ी हिस्सेदारी है।


OPT क्या है और विदेशी छात्रों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

OPT यानी Optional Practical Training अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है।

इसके तहत पात्र अंतरराष्ट्रीय छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने अध्ययन से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक काम का अनुभव हासिल कर सकते हैं।

आसान भाषा में समझें तो कोई भारतीय छात्र अमेरिका में इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, फाइनेंस या किसी अन्य पात्र विषय की पढ़ाई करता है, तो डिग्री पूरी करने के बाद OPT के माध्यम से संबंधित क्षेत्र में काम करने का अवसर पा सकता है।

आमतौर पर OPT के तहत एक साल तक काम करने की अनुमति मिल सकती है।

वहीं STEM यानी Science, Technology, Engineering और Mathematics से जुड़े पात्र छात्रों को अतिरिक्त अवधि के लिए काम करने का मौका मिल सकता है।

यही वजह है कि अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों के लिए OPT केवल पढ़ाई के बाद नौकरी का विकल्प नहीं है, बल्कि अमेरिका में आगे करियर बनाने की पूरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।


70 हजार डॉलर की फीस का मतलब भारतीय छात्रों के लिए क्या होगा?

अब सवाल यह है कि 70 हजार डॉलर की प्रस्तावित फीस वास्तव में कितनी बड़ी रकम है?

भारतीय रुपये में यह करीब 68 लाख रुपये बैठती है।

यानी किसी छात्र ने अमेरिका में लाखों रुपये खर्च करके अपनी पढ़ाई पूरी की और उसके बाद OPT के जरिए नौकरी का अनुभव हासिल करना चाहा, तो उसके कॉलेज या यूनिवर्सिटी को उसके OPT के लिए लगभग 68 लाख रुपये के बराबर शुल्क देना पड़ सकता है।

यहां फिर से समझना जरूरी है कि प्रस्ताव के अनुसार यह रकम सीधे छात्र से नहीं ली जाएगी।

लेकिन किसी विश्वविद्यालय के लिए एक छात्र के OPT पर इतना बड़ा खर्च उठाना आसान नहीं होगा।

संस्थान इस अतिरिक्त लागत को अपने बजट में शामिल कर सकते हैं, कुछ मामलों में छात्रों से दूसरे तरीके से लागत वसूलने की कोशिश हो सकती है या फिर संस्थान विदेशी छात्रों को OPT प्रक्रिया में सहायता देने से बच सकते हैं।

यही वह बिंदु है जिसकी वजह से प्रस्ताव को लेकर विदेशी छात्रों और अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों में चिंता बढ़ी है।


OPT रिन्यू कराने पर भी 30 हजार डॉलर की फीस

सिर्फ पहली बार का शुल्क ही चिंता की वजह नहीं है।

प्रस्ताव में OPT के विस्तार या नवीनीकरण के लिए 30 हजार डॉलर, यानी लगभग 29 लाख रुपये, की फीस का भी प्रावधान बताया गया है।

इसका मतलब यह हुआ कि पहली बार OPT के लिए करीब 68 लाख रुपये और उसके बाद विस्तार के लिए लगभग 29 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ सामने आ सकता है।

हालांकि यह पैसा सीधे छात्र से लेने की बात नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी राशि के कारण विदेशी छात्रों और अमेरिकी विश्वविद्यालयों के बीच OPT को लेकर नई आर्थिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

विशेष रूप से वे संस्थान प्रभावित हो सकते हैं जहां बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र STEM विषयों की पढ़ाई करते हैं।


भारतीय छात्रों पर सबसे बड़ा असर क्यों पड़ सकता है?

अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में भारत का हिस्सा काफी बड़ा है।

2024-25 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में करीब 3.63 लाख भारतीय छात्र पढ़ रहे थे।

वहीं चीन से करीब 2.66 लाख छात्र अमेरिका में थे।

यानी केवल भारत और चीन से आने वाले छात्रों की संख्या लगभग 6.3 लाख बैठती है।

इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने के विकल्प तलाशते हैं।

भारतीय छात्रों में खास तौर पर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, टेक्नोलॉजी और अन्य STEM विषय काफी लोकप्रिय हैं।

ऐसे छात्रों के लिए OPT का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि यह उन्हें अपनी पढ़ाई से संबंधित अमेरिकी कार्यस्थल का अनुभव हासिल करने का अवसर देता है।


भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई का पूरा गणित बदल सकता है

अमेरिका में उच्च शिक्षा पहले से ही महंगी मानी जाती है।

ट्यूशन फीस के अलावा छात्रों को रहने, खाने, स्वास्थ्य बीमा, परिवहन, किताबों और अन्य खर्चों का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में अगर पढ़ाई के बाद काम करने की व्यवस्था से जुड़ी लागत भी अप्रत्यक्ष रूप से बहुत ज्यादा बढ़ती है, तो परिवारों के लिए अमेरिका में पढ़ाई की पूरी आर्थिक योजना बदल सकती है।

कई भारतीय परिवार अमेरिका में पढ़ाई का फैसला केवल डिग्री के आधार पर नहीं करते। वे इस संभावना को भी देखते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र को कुछ समय तक अमेरिका में काम करने का अवसर मिल सकता है।

OPT इसी योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अगर विश्वविद्यालयों पर भारी शुल्क का दबाव पड़ता है तो विदेशी छात्रों के लिए यह रास्ता पहले की तुलना में ज्यादा कठिन हो सकता है।


टेक्नोलॉजी और STEM छात्रों के लिए क्यों अहम है OPT?

अमेरिका की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है।

कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य STEM क्षेत्रों में दुनिया के अलग-अलग देशों से छात्र अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में पढ़ने जाते हैं।

पढ़ाई पूरी होने के बाद इनमें से कई छात्र OPT के जरिए अमेरिकी कंपनियों में काम शुरू करते हैं।

इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिलता है और कंपनियों को प्रशिक्षित युवा प्रतिभाएं मिलती हैं।

इसी कारण प्रस्तावित US OPT Fee को लेकर केवल छात्र समुदाय ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा और उद्योग जगत में भी बहस हो सकती है।


अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर पड़ेगा सीधा वित्तीय दबाव

प्रस्ताव का सबसे अलग पहलू यह है कि शुल्क का भुगतान छात्र के बजाय कॉलेज या यूनिवर्सिटी को करना होगा।

यानी सरकार और छात्र के बीच सीधे शुल्क का संबंध नहीं होगा।

लेकिन विश्वविद्यालय के लिए हर पात्र छात्र पर 70 हजार डॉलर खर्च करना कोई मामूली बात नहीं है।

अगर किसी बड़े विश्वविद्यालय में सैकड़ों या हजारों विदेशी छात्र OPT के लिए आवेदन करते हैं, तो कुल वित्तीय बोझ बहुत बड़ा हो सकता है।

इससे विश्वविद्यालयों को अपनी अंतरराष्ट्रीय छात्र नीतियों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।

कुछ संस्थान अतिरिक्त शुल्क या प्रशासनिक लागत छात्रों से वसूलने की कोशिश कर सकते हैं, जबकि कुछ दूसरे संस्थान OPT से जुड़ी सहायता को सीमित कर सकते हैं।

हालांकि यह अभी संभावित प्रभाव है, अंतिम नीति लागू होने से पहले यह स्पष्ट नहीं है कि विश्वविद्यालय वास्तव में किस तरह प्रतिक्रिया देंगे।


NAFSA ने प्रस्ताव का विरोध किया

अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े संगठन NAFSA ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।

संगठन का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका से दूर करने वाली नीतियों से देश के उच्च शिक्षा तंत्र के साथ-साथ इनोवेशन और आर्थिक विकास को भी नुकसान पहुंच सकता है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटीज लंबे समय से दुनिया भर के प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करती रही हैं।

विदेशी छात्रों की मौजूदगी से विश्वविद्यालयों को आर्थिक लाभ के साथ-साथ शोध, नवाचार और वैश्विक अकादमिक सहयोग में भी फायदा होता है।

इसलिए उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों की चिंता यह है कि अगर अमेरिका में पढ़ाई और पढ़ाई के बाद काम करने की प्रक्रिया बहुत कठिन या महंगी हो गई तो प्रतिभाशाली छात्र दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं।


अमेरिकी सरकार का तर्क क्या है?

दूसरी तरफ अमेरिकी Department of Homeland Security यानी DHS का तर्क अलग है।

विभाग का कहना है कि OPT कार्यक्रम में धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल को रोकने की जरूरत है।

DHS ने आरोप लगाया है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल कुछ मामलों में सस्ते विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाने के लिए किया जा रहा है।

सरकार की नजर में प्रस्ताव का उद्देश्य केवल विदेशी छात्रों पर आर्थिक बोझ डालना नहीं, बल्कि OPT कार्यक्रम की निगरानी और उसके इस्तेमाल को ज्यादा नियंत्रित करना भी है।

यानी यहां दो बिल्कुल अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।

एक तरफ उच्च शिक्षा संस्थान और विदेशी छात्र इसे भारी वित्तीय बाधा के रूप में देख रहे हैं, वहीं सरकार इसे कार्यक्रम में संभावित दुरुपयोग रोकने की दिशा में कदम बता रही है।


अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है

यह बात बेहद महत्वपूर्ण है कि 70 हजार डॉलर की फीस अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है।

यह फिलहाल प्रस्ताव है।

प्रस्ताव पर लोगों, संस्थानों और संबंधित पक्षों से राय मांगी जाएगी। इसके लिए 60 दिनों का समय दिया जाएगा।

इसके बाद सरकार प्राप्त टिप्पणियों और प्रक्रिया के आधार पर अंतिम नियम तैयार कर सकती है।

इसलिए विदेशी छात्रों को फिलहाल इसे अंतिम शुल्क व्यवस्था मानकर नहीं चलना चाहिए।

अंतिम नियम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शुल्क की वास्तविक राशि क्या होगी, किन छात्रों पर लागू होगी और विश्वविद्यालयों को भुगतान किस तरीके से करना होगा।


ट्रम्प सरकार पहले भी विदेशी छात्रों पर सख्त रही है

विदेशी छात्रों को लेकर ट्रम्प सरकार की नीतियां पहले से ही चर्चा में रही हैं।

दिए गए विवरण के मुताबिक पिछले वर्ष हजारों विदेशी छात्रों का कानूनी दर्जा खत्म किया गया था।

इनमें से कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया और अमेरिका से बाहर भेजे जाने की कार्रवाई भी हुई।

इस तरह के कदमों ने अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच अनिश्चितता बढ़ाई है।

छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रहने और काम करने की प्रक्रिया कितनी स्थिर और अनुमानित होगी।


वीजा नियमों में बदलाव से भी बढ़ी चिंता

अमेरिका में विदेशी छात्रों को लेकर केवल OPT ही एकमात्र चिंता नहीं है।

वीजा और इमिग्रेशन नीतियों में लगातार बदलाव भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।

दिए गए विवरण के अनुसार अमेरिकी सरकार ने छात्र और विजिटर वीजा के लिए अमेरिका में रहने की अवधि से संबंधित व्यवस्था में बदलाव किया है।

कुछ मामलों में अमेरिका में रहने की समयसीमा चार साल तक सीमित हो सकती है।

लंबे समय के डिग्री कार्यक्रमों या आगे पढ़ाई करने की योजना बना रहे छात्रों के लिए ऐसी व्यवस्था अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा कर सकती है।


भारतीय छात्रों की संख्या में भी आई कमी

इन नीतिगत बदलावों का असर छात्रों के अमेरिका जाने के फैसले पर दिखाई देने की बात भी सामने आई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत से अमेरिका जाने वाले आवेदकों की संख्या में करीब 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

भारत लंबे समय से अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत रहा है।

इसलिए भारतीय छात्रों की संख्या में कमी को अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।

अगर वीजा नियम, इमिग्रेशन नीतियां और OPT से जुड़े खर्च लगातार अधिक कठिन होते जाते हैं, तो कुछ छात्र अमेरिका के बजाय कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप के दूसरे देशों में पढ़ाई के विकल्प तलाश सकते हैं।


भारतीय छात्रों में अमेरिका को लेकर चिंता की 3 बड़ी वजहें

1. सख्त वीजा और इमिग्रेशन नीतियां

विदेशी छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी वीजा और इमिग्रेशन नीतियों में बढ़ती सख्ती है।

छात्र सिर्फ यह नहीं देखते कि उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलेगा या नहीं। वे यह भी देखते हैं कि पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके पास अमेरिका में काम करने और अपने करियर को आगे बढ़ाने के कितने अवसर होंगे।

अगर इन दोनों चरणों के बीच नियम लगातार बदलते रहें तो परिवारों के लिए कई वर्षों की शिक्षा योजना बनाना मुश्किल हो सकता है।


2. अमेरिका में रहने की अवधि को लेकर अनिश्चितता

दूसरी चिंता वीजा की समयसीमा और अमेरिका में रहने की अवधि से जुड़ी है।

कई छात्र चार साल या उससे अधिक समय वाले कार्यक्रमों में दाखिला लेते हैं। यदि वीजा या स्टेटस की अवधि को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है तो उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान अतिरिक्त प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है।


3. OPT की भारी प्रस्तावित फीस

तीसरी और सबसे चर्चित चिंता US OPT Fee है।

70 हजार डॉलर की पहली फीस और 30 हजार डॉलर के नवीनीकरण शुल्क का प्रस्ताव अगर अंतिम रूप लेता है, तो विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने का रास्ता पहले की तुलना में काफी महंगा हो सकता है।

भले ही रकम सीधे छात्र से नहीं ली जाए, लेकिन विश्वविद्यालयों पर आने वाली लागत का असर किसी न किसी रूप में छात्र तक पहुंचने की आशंका बनी रहेगी।


क्या 70 हजार डॉलर की फीस छात्र को खुद देनी होगी?

नहीं।

दिए गए प्रस्ताव के अनुसार फीस सीधे छात्र से नहीं ली जाएगी।

इसका भुगतान उस कॉलेज या यूनिवर्सिटी को करना होगा जो छात्र के OPT आवेदन से जुड़ी प्रक्रिया संभालेगी।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि छात्र पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

यदि विश्वविद्यालय को किसी छात्र के OPT के लिए करीब 70 हजार डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, तो संस्थान अपनी वित्तीय नीति में बदलाव कर सकता है।

संभव है कि विश्वविद्यालय अतिरिक्त प्रशासनिक शुल्क लगाए, OPT सहायता सीमित करे या विदेशी छात्रों के लिए कुछ अलग शर्तें रखे।

हालांकि ये संभावित परिणाम हैं और अंतिम नियम आने के बाद ही वास्तविक असर स्पष्ट होगा।


क्या इससे भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना बंद हो जाएगा?

ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।

अमेरिका अब भी दुनिया के सबसे बड़े उच्च शिक्षा केंद्रों में से एक है और वहां की प्रमुख यूनिवर्सिटीज की वैश्विक प्रतिष्ठा बनी हुई है।

लेकिन छात्रों के फैसले केवल विश्वविद्यालय की रैंकिंग पर निर्भर नहीं करते।

फीस, वीजा, रहने का खर्च, पढ़ाई के बाद रोजगार, इमिग्रेशन नियम और भविष्य में करियर बनाने की संभावना—ये सभी चीजें मिलकर किसी छात्र के निर्णय को प्रभावित करती हैं।

यदि OPT और इमिग्रेशन नियम ज्यादा महंगे या अनिश्चित होते हैं, तो अमेरिका जाने वाले कुछ छात्रों की संख्या पर असर पड़ सकता है।


क्या कंपनियों पर भी पड़ेगा असर?

OPT व्यवस्था से अमेरिकी कंपनियों को भी लाभ मिलता रहा है क्योंकि इसके जरिए उन्हें अमेरिकी विश्वविद्यालयों से पढ़े हुए अंतरराष्ट्रीय छात्रों तक पहुंच मिलती है।

खासकर टेक्नोलॉजी और STEM क्षेत्रों में विदेशी छात्रों की मौजूदगी महत्वपूर्ण है।

यदि विश्वविद्यालय OPT से जुड़ी लागत के कारण छात्रों को सीमित करने लगते हैं, तो कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

इसका असर उन क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई दे सकता है जहां अत्यधिक प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की मांग रहती है।

हालांकि प्रस्ताव के वास्तविक व्यावसायिक प्रभाव का आकलन अंतिम नियम लागू होने के बाद ही किया जा सकेगा।


छात्रों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका में पढ़ाई का फैसला करते समय केवल वर्तमान खर्च नहीं, बल्कि पढ़ाई के बाद की पूरी स्थिति को भी ध्यान में रखना पड़ेगा।

पहले छात्र अक्सर ट्यूशन फीस और रहने के खर्च का हिसाब लगाकर अमेरिका में पढ़ाई की योजना बनाते थे।

अब वीजा नीति, OPT, काम करने की अनुमति और भविष्य के इमिग्रेशन विकल्प भी उसी गणित का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

यानी अमेरिका में विदेशी छात्र के रूप में पढ़ाई अब सिर्फ शिक्षा का फैसला नहीं रह गया है। यह एक लंबी अवधि के करियर और इमिग्रेशन प्लान का हिस्सा बन चुका है।


अमेरिका बनाम दूसरे देशों की होड़ और तेज हो सकती है

अगर अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए नियम लगातार कठिन होते हैं, तो दूसरे देश इसका फायदा उठा सकते हैं।

कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देश भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।

भारतीय छात्रों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेश में पढ़ने के इच्छुक छात्रों के पास अब पहले की तुलना में ज्यादा विकल्प हैं।

ऐसे में विश्वविद्यालय की गुणवत्ता के साथ-साथ पढ़ाई के बाद काम करने की नीति भी देश चुनने का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।


अभी छात्रों को क्या समझना चाहिए?

सबसे जरूरी बात यह है कि यह प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है।

इसलिए केवल प्रस्ताव के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर विदेशी छात्र को तुरंत 70 हजार डॉलर देने होंगे।

सरकार को अभी सार्वजनिक टिप्पणियां प्राप्त करनी हैं और इसके बाद अंतिम नियम तैयार किया जा सकता है।

अंतिम नियम में शुल्क की राशि, लागू होने की तारीख, पात्रता और विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारियों से जुड़े कई पहलू स्पष्ट हो सकते हैं।

इसलिए अमेरिका जाने की योजना बना रहे छात्रों को अंतिम आधिकारिक नियम आने तक स्थिति पर नजर रखनी होगी।


भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका का सपना, लेकिन अब बढ़ेगी सावधानी

अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए मौजूदा स्थिति निश्चित रूप से पहले से ज्यादा जटिल दिखाई देती है।

एक तरफ अमेरिका की विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटीज, रिसर्च सुविधाएं और टेक्नोलॉजी सेक्टर अब भी बड़ी ताकत हैं।

दूसरी तरफ वीजा नियमों में सख्ती, इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव और OPT को लेकर सामने आया भारी शुल्क प्रस्ताव छात्रों को दोबारा सोचने पर मजबूर कर सकता है।

विशेषकर उन छात्रों के लिए जो STEM विषयों में पढ़ाई करके अमेरिका में काम करने की योजना बनाते हैं, OPT उनके भविष्य की योजना का अहम हिस्सा है।

US OPT Fee का यह प्रस्ताव अगर अंतिम नियम का रूप लेता है तो अमेरिका में विदेशी छात्रों की पूरी शिक्षा और रोजगार रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि 70 हजार डॉलर की OPT फीस अभी प्रस्तावित व्यवस्था है, अंतिम नियम नहीं। आने वाले 60 दिनों में छात्र, विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा संगठन और अन्य संबंधित पक्ष अपनी राय रख सकेंगे। इसके बाद अमेरिकी सरकार अंतिम फैसला ले सकती है। यदि प्रस्तावित शुल्क इसी रूप में लागू होता है, तो भारतीय और चीनी छात्रों सहित अमेरिका में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद नौकरी का रास्ता पहले की तुलना में काफी महंगा और जटिल हो सकता है। वहीं अमेरिकी सरकार इसे OPT व्यवस्था में संभावित धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल को रोकने की कोशिश के रूप में देख रही है। अब असली नजर इस बात पर रहेगी कि अंतिम नियम में क्या बदलाव किए जाते हैं और विदेशी छात्रों के भविष्य पर इसका वास्तविक असर कितना पड़ता है।

अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के लिए OPT लंबे समय से पढ़ाई के बाद पेशेवर अनुभव हासिल करने का महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। 70 हजार डॉलर की प्रस्तावित फीस ने इस व्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर खड़ी कर दी है, लेकिन अभी इसे अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी। भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या और STEM क्षेत्रों में उनकी मजबूत मौजूदगी को देखते हुए आने वाले समय में यह मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल छात्रों और विश्वविद्यालयों की नजर प्रस्ताव पर होने वाली सार्वजनिक प्रक्रिया और उसके बाद आने वाले अंतिम नियमों पर है।

 

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