सऊदी अरब के दो एयरपोर्ट पर Houthis का ड्रोन-मिसाइल हमला, 3 की मौत और 36 घायल; जवाब में यमन में 80 से ज्यादा ठिकानों पर कार्रवाई
Saudi Arabia सऊदी अरब के दो प्रमुख एयरपोर्ट्स को Houthis ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इन हमलों में कुल 3 लोगों की मौत हुई है, जबकि 36 लोग घायल बताए गए हैं।
सऊदी अरब की जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) के मुताबिक, आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 6 और 7 अक्टूबर को निशाना बनाया गया।
हमलों की जिम्मेदारी हूती विद्रोहियों ने ली है। दूसरी तरफ यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने जवाबी सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। गठबंधन के अनुसार, हूतियों के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यमन में चल रहा संघर्ष अब किस दिशा में जा रहा है और इसका असर सऊदी अरब के भीतर महत्वपूर्ण नागरिक एवं आर्थिक प्रतिष्ठानों तक किस स्तर पर पहुंच चुका है।
आभा और रियाद के एयरपोर्ट बने निशाना
GACA के अनुसार, 6 और 7 अक्टूबर को हुए हमलों में दो अलग-अलग एयरपोर्ट्स को निशाना बनाया गया।
पहला हमला आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुआ। यह एयरपोर्ट सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है और पहले भी क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान सुरक्षा संबंधी घटनाओं के केंद्र में रहा है।
दूसरा निशाना राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना।
एयरपोर्ट किसी भी देश के लिए केवल यात्री आवागमन का केंद्र नहीं होता। वहां नागरिकों के साथ-साथ एयरलाइन कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, ग्राउंड स्टाफ और अलग-अलग देशों से आने वाले यात्री मौजूद रहते हैं। ऐसे स्थान पर मिसाइल या ड्रोन हमला होने से खतरा केवल सैन्य प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी सीधे प्रभावित होती है।
यही वजह है कि इन हमलों के बाद सऊदी अधिकारियों ने एयरपोर्ट सुविधाओं की सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े कदमों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
आभा एयरपोर्ट हमले में दो विदेशी महिलाओं की मौत
आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में मोरक्को और अल्जीरिया की दो महिला नागरिकों की मौत होने की जानकारी दी गई है।
इस हमले में कुल 28 लोग घायल हुए। घायलों में सऊदी अरब के नागरिकों के साथ-साथ बांग्लादेश और फिलीपींस के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि मध्य पूर्व के इस संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों के नागरिकों तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक काम करते हैं और यात्रा करते हैं। ऐसे में किसी एयरपोर्ट या सार्वजनिक स्थान पर हमला होने पर अलग-अलग देशों के नागरिक इसकी चपेट में आ सकते हैं।
GACA ने बताया कि घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और उनकी चिकित्सा व्यवस्था की गई है।
किंग खालिद एयरपोर्ट पर सूडानी नागरिक की मौत
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक सूडानी नागरिक की मौत हुई है।
इस हमले में 8 लोग घायल बताए गए हैं। इनमें पांच सऊदी नागरिक, दो मिस्र के निवासी और एक पाकिस्तानी निवासी शामिल हैं।
इस तरह दोनों एयरपोर्ट्स पर हुई घटनाओं में अलग-अलग राष्ट्रीयताओं के लोग प्रभावित हुए हैं।
GACA के मुताबिक, सभी घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। अधिकारियों की ओर से एयरपोर्ट की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
हूती विद्रोहियों ने ली दोनों हमलों की जिम्मेदारी
इन हमलों को लेकर हूती पक्ष ने जिम्मेदारी स्वीकार की है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी अरब में कई स्थानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया। उनके अनुसार, संगठन ने बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल किया।
हूती पक्ष ने इन हमलों को यमन में सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई के जवाब के रूप में बताया है।
याह्या सरी के मुताबिक, हमलों से पहले के 24 घंटों में सऊदी अरब ने यमन पर 60 हवाई और मिसाइल हमले किए थे। यह आंकड़ा हूती पक्ष का दावा है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।
अरामको रिफाइनरी को भी निशाना बनाने का दावा
हूती सैन्य प्रवक्ता ने सऊदी अरब में अन्य स्थानों को निशाना बनाए जाने की भी बात कही।
इनमें रबीघ स्थित अरामको रिफाइनरी पर हमले का दावा भी शामिल है। हूती पक्ष ने इसे अपने सैन्य अभियानों का हिस्सा बताया।
याह्या सरी के मुताबिक, संगठन ने तीन बड़े सैन्य अभियान चलाए, जिनमें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
यह दावा ऐसे समय आया है जब यमन में सऊदी समर्थित सरकारी बल और हूती लड़ाके कई महत्वपूर्ण इलाकों में संघर्ष कर रहे हैं।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का पलटवार, 80 से ज्यादा ठिकानों पर कार्रवाई का दावा
हूती हमलों के बाद यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है।
गठबंधन के अनुसार, उसने हूतियों के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इस जवाबी कार्रवाई का मकसद हूती विद्रोहियों की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को कमजोर करना बताया गया है।
सऊदी गठबंधन का कहना है कि हूतियों की ओर से सऊदी अरब पर लगातार हमलों के खतरे को देखते हुए सैन्य कार्रवाई आवश्यक थी।
दूसरी ओर हूती पक्ष इन कार्रवाइयों को यमन पर सऊदी हमलों का हिस्सा बताता है। इस तरह दोनों पक्ष एक-दूसरे की सैन्य कार्रवाई को अपने हमलों का कारण बता रहे हैं।
रियाद पर हमले में इस्तेमाल मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म नष्ट करने का दावा
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह भी दावा किया है कि उसने रियाद पर हमले के लिए इस्तेमाल किए गए एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म को नष्ट कर दिया।
गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मालिकी के अनुसार, यह कार्रवाई यमन की राजधानी सना में की गई।
उनका दावा है कि जिस स्थान को निशाना बनाया गया, वहां सऊदी अरब पर एक और हमले की तैयारी चल रही थी और हमला जल्द किया जा सकता था।
सैन्य संघर्षों में इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग पक्षों से हमेशा संभव नहीं होती, इसलिए दोनों पक्षों के बयानों को उनके संबंधित दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
यमन में हूतियों के खिलाफ सरकारी सेना का अभियान तेज
यमन में संघर्ष केवल सऊदी अरब और हूतियों के बीच हवाई हमलों तक सीमित नहीं है। यमन की सरकार भी हूती विद्रोहियों के खिलाफ जमीन पर सैन्य अभियान चला रही है।
इस अभियान का घोषित उद्देश्य उन इलाकों को वापस हासिल करना है जिन पर हूतियों ने कब्जा कर रखा है।
खास तौर पर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बेहद ज्यादा है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी वजह से यहां किसी भी सशस्त्र समूह का नियंत्रण क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण विषय बन जाता है।
सितंबर में हूतियों ने मोचा और बाब अल-मंदेब के आसपास बढ़ाई थी पकड़
दिए गए विवरण के मुताबिक, सितंबर में हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर तेजी से बढ़त बनाई थी।
उन्होंने मोचा शहर और बाब अल-मंदेब के आसपास के कई महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्जा करने का दावा किया था।
अगर किसी पक्ष का इन इलाकों पर नियंत्रण मजबूत होता है तो उसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र के करीब सैन्य और राजनीतिक प्रभाव हासिल हो सकता है।
यही कारण है कि सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों ने इन क्षेत्रों को वापस हासिल करने के लिए अभियान तेज किया।
5 अक्टूबर से बदली संघर्ष की तस्वीर
दिए गए घटनाक्रम के मुताबिक, 5 अक्टूबर को सऊदी समर्थित यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ बड़ा जवाबी अभियान शुरू किया।
यमनी सेना ने बाब अल-मंदेब के पास धुबाब इलाके और कई अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने का दावा किया।
इसके बाद सरकारी बलों ने मोचा की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
यमनी सरकार ने बाद में मोचा शहर को भी हूतियों से वापस लेने का दावा किया।
इस घटनाक्रम के बाद जमीन पर संघर्ष और तेज हो गया और इसके साथ ही हूतियों की ओर से मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आईं।
मोचा और बाब अल-मंदेब क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
यमन के पश्चिमी हिस्से में स्थित मोचा ऐतिहासिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
इसके आसपास का समुद्री क्षेत्र लाल सागर और बाब अल-मंदेब के करीब है। बाब अल-मंदेब ऐसा समुद्री मार्ग है जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव केवल यमन की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहता।
समुद्री रास्तों के आसपास संघर्ष बढ़ने पर जहाजों की सुरक्षा, व्यापारिक आवाजाही और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।
हूतियों का दावा- सरकारी बलों पर 11 मिसाइलें दागीं
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने अलग से दावा किया कि पिछले 24 घंटों में संगठन ने यमन में सरकारी बलों के 11 ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया।
उनके मुताबिक, सरकारी बलों को बाब अल-मंदेब के पास प्रमुख रास्तों पर निशाना बनाया गया।
हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि इन हमलों में दर्जनों लोग हताहत हुए और कुछ सैन्य कमांडर भी प्रभावित हुए।
उन्होंने कई सैन्य वाहनों को नष्ट किए जाने का भी दावा किया।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
जायंट्स ब्रिगेड पर भी मिसाइल हमले का दावा
याह्या सरी ने यह भी दावा किया कि हूतियों ने सऊदी अरब के समर्थन वाले जायंट्स ब्रिगेड को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया।
हूती पक्ष के अनुसार, इस हमले में 30 से ज्यादा लोग मारे गए या घायल हुए।
जायंट्स ब्रिगेड यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाले सरकारी समर्थक बलों का हिस्सा है।
इस तरह संघर्ष अब कई स्तरों पर चल रहा है—एक तरफ सऊदी अरब और उसके सहयोगी सैन्य अभियान चला रहे हैं, दूसरी ओर हूती विद्रोही मिसाइल और ड्रोन के जरिए जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं और जमीन पर सरकारी समर्थक बलों के खिलाफ भी लड़ाई जारी है।
270 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा
मीडिया रिपोर्टों में इस संघर्ष में अब तक 270 से ज्यादा सरकारी सैनिकों और हूती लड़ाकों की मौत होने की बात सामने आई है।
यह आंकड़ा संघर्ष में शामिल सैन्य पक्षों की व्यापक क्षति को दर्शाता है, लेकिन ऐसे संघर्षों में मृतकों और घायलों की संख्या अलग-अलग स्रोतों में अलग हो सकती है।
जमीनी लड़ाई, हवाई हमले और मिसाइल हमलों के बीच वास्तविक नुकसान का आकलन करना भी कठिन होता है।
एयरपोर्ट हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
आभा और किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमलों के बाद सऊदी अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों की सुरक्षा है।
GACA ने कहा है कि अधिकारियों की ओर से एयरपोर्ट सुविधाओं की सुरक्षा की जांच की जा रही है।
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
एयरपोर्ट जैसे नागरिक प्रतिष्ठानों पर किसी भी हमले का प्रभाव केवल तत्काल नुकसान तक सीमित नहीं रहता। इससे यात्रियों में भय पैदा हो सकता है और विमानन सेवाओं के संचालन पर भी सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त दबाव आता है।
सऊदी अरब के लिए ड्रोन और मिसाइल हमले बड़ी सुरक्षा चुनौती
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। इस संघर्ष में ड्रोन और मिसाइल महत्वपूर्ण हथियार बन चुके हैं।
ड्रोन अपेक्षाकृत कम लागत में लंबी दूरी तक पहुंचने और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल अधिक गंभीर सैन्य खतरा पैदा कर सकती हैं।
हालिया घटनाक्रम में खास चिंता की बात यह है कि हमलों का असर एयरपोर्ट जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे तक पहुंचा है।
यमन में जमीन पर बढ़ती लड़ाई ने बढ़ाया तनाव
हूती और सरकारी बलों के बीच जमीन पर संघर्ष तेज होने के साथ हवाई और मिसाइल हमलों का खतरा भी बढ़ा है।
एक तरफ यमनी सरकारी बल रणनीतिक इलाकों पर फिर से कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ हूती संगठन अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों और सैन्य क्षमता को बनाए रखने के लिए मिसाइल हमलों का इस्तेमाल कर रहा है।
सऊदी अरब के लिए यह संघर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यमन उसके दक्षिणी पड़ोसी देश के रूप में सीधे उसकी सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
बाब अल-मंदेब पर नियंत्रण की लड़ाई का अंतरराष्ट्रीय महत्व
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का नाम इस पूरे संघर्ष में बार-बार सामने आ रहा है।
यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
इस क्षेत्र के आसपास सैन्य गतिविधि बढ़ने से केवल स्थानीय सुरक्षा ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन सकती है।
यही कारण है कि यमन में मोचा और बाब अल-मंदेब के आसपास होने वाली हर बड़ी सैन्य गतिविधि पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रहती है।
हूती और सऊदी गठबंधन के दावों में लगातार टकराव
मौजूदा स्थिति में दोनों पक्ष अपनी-अपनी सैन्य कार्रवाई को जवाबी कदम के रूप में पेश कर रहे हैं।
हूती पक्ष का कहना है कि उसके सऊदी अरब पर किए गए हमले यमन में सऊदी सैन्य कार्रवाई का जवाब हैं।
वहीं सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हूती मिसाइल और ड्रोन क्षमता को खत्म करने तथा सऊदी क्षेत्र को हमलों से बचाने को अपनी सैन्य कार्रवाई का कारण बता रहा है।
इस तरह संघर्ष में एक लगातार चलता हुआ चक्र दिखाई देता है—एक पक्ष का हमला दूसरे पक्ष के जवाबी हमले का आधार बनता है और फिर दूसरा हमला नए सैन्य अभियान को जन्म देता है।
अब आगे क्या हो सकता है?
आभा और रियाद के एयरपोर्ट पर हुए हमलों के बाद आने वाले दिनों में यमन में सैन्य कार्रवाई और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि आगे की घटनाओं का निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।
यदि सऊदी समर्थित यमनी सेना बाब अल-मंदेब और मोचा के आसपास अपनी बढ़त कायम रखती है तो हूती संगठन के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ यदि हूती विद्रोही लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की क्षमता बनाए रखते हैं तो सऊदी अरब के लिए अपने नागरिक और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।
सबसे बड़ी चिंता यही है कि सैन्य संघर्ष का दायरा बढ़ने पर आम नागरिकों को और नुकसान न उठाना पड़े।
नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
आभा एयरपोर्ट पर मोरक्को और अल्जीरिया की दो महिलाओं की मौत तथा रियाद में सूडानी नागरिक की मौत इस संघर्ष के मानवीय पक्ष को सामने लाती है।
घायलों में सऊदी नागरिकों के साथ बांग्लादेश, फिलीपींस, मिस्र और पाकिस्तान से जुड़े लोग भी शामिल हैं।
यानी यह संघर्ष केवल सैनिकों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है। जब मिसाइल और ड्रोन किसी नागरिक एयरपोर्ट तक पहुंचते हैं तो उसकी चपेट में अलग-अलग देशों के आम लोग आ सकते हैं।
इसी वजह से मौजूदा घटनाक्रम में सैन्य जवाबी कार्रवाई के साथ नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
सऊदी अरब में हुए ताजा हमले और यमन में जारी सैन्य अभियान ने एक बार फिर मध्य पूर्व के इस लंबे संघर्ष की गंभीरता को सामने ला दिया है। आभा और किंग खालिद एयरपोर्ट पर हुए हमलों में 3 लोगों की मौत और 36 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में 80 से ज्यादा हूती सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। दूसरी ओर हूती संगठन ने सऊदी अरब और यमन में सरकारी बलों के खिलाफ कई मिसाइल और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी या दावा किया है। आने वाले समय में संघर्ष किस दिशा में जाता है, यह जमीन पर सैन्य स्थिति और दोनों पक्षों की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे गंभीर सवाल यही है कि बढ़ते सैन्य तनाव के बीच नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को किस तरह बचाया जाए।

