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भारत सरकार से Canada के साथ सहयोग करने का भी अनुरोध करेंगे-Vedant Patel

Principal Deputy Spokesperson at the Department of State, USA Vedant Patel ने कहा, ‘‘हमने भारत सरकार से कनाडाई जांच में सहयोग करने का भी अनुरोध किया है.’’ Vedant Patel ने कहा कि अमेरिका ने नयी दिल्ली में कनाडा उच्चायोग में राजनयिकों की संख्या में कमी लाने संबंधी खबरें देखी हैं.

पटेल ने कहा, ‘‘भारत के साथ हम क्वाड और कई अन्य समूहों में साझेदार हैं और हम कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर क्षेत्र में उनके तथा अन्य देशों के साथ काम करते रहेंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जैसा कि मैंने कहा है कि हम इन आरोपों को बहुत गंभीरता से लेते हैं और हम न केवल अपने कनाडाई साझेदारों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे बल्कि भारत सरकार से कनाडा के साथ सहयोग करने का भी अनुरोध करेंगे.’’

समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या नई दिल्ली द्वारा कनाडाई राजनयिकों को डिपोर्ट करने वाली रिपोर्ट सटीक है? न तो Canada विदेश मंत्री मेलानी जोली और न ही प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसका स्पष्ट जवाब दिया. जोली ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम भारत सरकार के संपर्क में हैं. हम कनाडाई राजनयिकों की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लेते हैं और हम निजी तौर पर बातचीत करना जारी रखेंगे. क्योंकि हमारा मानना ​​है कि राजनयिक बातचीत तब सबसे अच्छी होती है जब यह प्राइवेटली होती है.’

Canada की विदेश मंत्री मेलानी जोली की ओर से मंगलवार को यह बयान तब सामने आया, जब भारत ने ओटावा को अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने का फरमान जारी किया. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, भारत ने कनाडा से कहा है कि उसे 10 अक्टूबर तक राजनयिकों को वापस बुलाना होगा.

जस्टिन ट्रूडो ने अपने देश की संसद में दिए एक बयान में आशंका जताई थी कि इस साल जून में Canada में सिख अलगाववादी नेता और कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय सरकारी एजेंटों का हाथ था, जिसे भारत ने ‘आतंकवादी’ करार दिया था. कनाडा के इस संदेह पर दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध गंभीर रूप से तनावपूर्ण हो गए हैं. भारत ने इस आरोप को बेतुका बताते हुए खारिज कर दिया.

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने कनाडा के 41 राजनयिकों को 10 अक्टूबर के बाद देश में रहने पर उनकी राजनयिक छूट रद्द करने की चेतावनी दी है. कनाडा के भारत में 62 राजनयिक हैं.  इससे पहले भारत ने 22 सितंबर को कनाडाई लोगों के लिए नए वीजा निलंबित कर दिए और ओटावा से देश में अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने को कहा था. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि ओटावा विवाद को बढ़ाना नहीं चाह रहा है.

उन्होंने कहा, ‘हम इसे बेहद गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन हम भारत सरकार के साथ जिम्मेदारीपूर्वक और रचनात्मक रूप से बातचीत जारी रखेंगे.’ भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कुछ दिन पहले कहा था कि कनाडा में भारतीय राजनयिकों के खिलाफ ‘हिंसा और धमकी का माहौल’ ​है, जहां सिख अलगाववादी समूहों की मौजूदगी ने नई दिल्ली को निराश किया है. जयशंकर ने कहा था कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथियों को वहां की सरकार का प्रश्रय मिल रहा है.

News-Desk

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