POCSO Act : oral sex गंभीर यौन हमला नहीं: Allahabad High Court
POCSO Act: 10 साल के बच्चे के साथ ओरल सेक्स को Allahabad High Court ने ‘गंभीर यौन हमला’ ना मानते हुए दोषी की सजा 10 साल से सात साल कर दी। बता दें कि उच्च अदालत ने इसे पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत दंडनीय माना है। वहीं इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को धारा 377, 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी माना था।
उत्तर प्रदेश: बच्चे के साथ ओरल सेक्स के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस अपराध को 'गंभीर यौन हमला' नहीं माना है। कोर्ट ने इस प्रकार के अपराध को पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दंडनीय माना। pic.twitter.com/va7u7aQzcE
— News & Features Network (@mzn_news) November 24, 2021
हाईकोर्ट के सामने सवाल यह था कि नाबालिग से ओरल सेक्स करना क्या पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 या 9/10 के निहित है? जिसपर कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह दोनों धाराओं में से किसी में भी नहीं आएगा। इसके साथ ही अदालत ने इसे पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध करार दिया है।
अदालत ने कहा कि इस तरह के मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 10 के प्रावधानों के अंतर्गत सजा नहीं सुनाई जा सकती। ऐसे में ओरल सेक्स मामले में दोषी की 10 साल की सजा को कम करते हुए अदालत ने 7 साल कर दी। इसके अलावा दोषी पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
बता दें कि 2016 में शिकायतकर्ता का आरोप था दोषी सोनू कुशवाहा उसके घर आया और उसके 10 साल के बेटे को अपने साथ पास की एक जगह पर ले गया। उसने 20 रुपये देकर उसके साथ ओरल सेक्स किया। इस मामले में 2018 में झांसी की एक निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 377, धारा 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी।
सोनू कुशवाहा ने सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो अधिनियम, झांसी के निर्णय के खिलाफ सोनू ने इलाहाबाद उच्च अदालत में अपील दायर की थी। जिसपर जस्टिस अनिल कुमार ओझा की एकलपीठ ने सजा कम करते हुए सात साल कर दिया है।

