Religious

बृहस्पति कृत पीड़ा शान्ति के विशेष उपाय

जन्मपत्रिका अथवा गोचर के गुरु के अशुभ प्रभाव को समाप्त कर उनको शुभ भाव में बदलने के लिये मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूं जिनके करने से आप अवश्य ही लाभान्वित होंगे। यह उपाय आप निश्चिन्त होकर कर सकते हैं।

इनसे आपको किसी भी प्रकार की कोई हानि नहीं होगी क्योंकि यह वर्षों के अनुभव के स्वानुभूत उपाय हैं तथा पूर्णतः सात्विक हैं। आप इन पर जितना अधिक विश्वास करेंगे वह उतना ही अधिक लाभ देंगे। अशुभ फल में परिवर्तन आप स्वयं अनुभव करेंगे। कोई भी उपाय आप शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से ही
आरम्भ करें।

👉 गुरु से सम्बन्धित किसी भी वस्तु को मुफ्त न लें।

👉 पत्रिका में गुरु के उच्च होने पर उसकी किसी भी वस्तु का दान न करें।

👉 नित्य केसर का तिलक अथवा जिव्हा पर लगाकर प्रयोग अवश्य करें।

👉 गले में स्वर्ण की चेन धारण करें।

👉 अष्टम भाव का गुरु जातक को प्रत्येक प्रकार से हानि देता है, इसके लिये
आप पीले कपड़े में 300 ग्राम गुड़ व इतनी ही चने की दाल लगातार 3 गुरुवार श्री
हनुमान मन्दिर में अर्पित करें।

👉 पीपल व केले के वृक्ष में जल अवश्य दें।

👉 हल्दी की 3 गांठे 43 दिन लगातार जल में प्रवाहित करें।

👉 किसी की पत्रिका में विवाह बाधा अथवा विवाह के पश्चात् वैवाहिक जीवन में समस्या का योग हो अथवा विद्या बाधा हो तो विद्या के लिये बच्चे का पिता प्रथम
गुरुवार को एक ही वजन के दो सोने के टुकड़े अथवा दो स्थान में अलग-अलग 3 ग्राम केशर व 3 हल्दी की गांठें बच्चे को उपहार में दे ।

बच्चा इनमें से स्वर्ण का एक टुकड़ा अथवा एक स्थान की वस्तु जल में प्रवाहित कर दे तथा दूसरे स्थान की दोनों वस्तुयें इस विश्वास के साथ कि श्री बृहस्पति की कृपा से मेरी विद्या के अवरोध दूर होंगे, अपने पास रखे।

जब तक यह दोनों वस्तुयें बच्चे के पास रहेंगी. तब ना में कोई अवरोध नहीं आयेगा। विवाह के लिये यही क्रिया करें। स्वर्ण अथवा केसर व
हल्दी जब तक कन्या के पास रहेगी, तब तक वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। इससे ध्यान रहे कि अवरोध दूर होने पर स्वर्ण को बेचे नहीं अथवा केशर-हल्दी खोये नही।

👉 प्रथम गुरुवार से लगातार तीन गुरुवार को मीठे चावल किसी भी पर दान करें। ऐसा 3 गुरुवार ही करें। यदि आप लाभ मिलने पर अधिक इच्छक हैं तो 3 गुरुवार के बाद अगले शुक्लपक्ष से फिर आरम्भ कर सकते है इसमे एक गुरुवार का अन्तर आ जायेगा।

👉 आर्थिक लाभ के लिये गुरुवार को सुहाग सामग्री किसी सुहागिन को और पीले वस्त्र किसी वृद्ध साधु को दें।

👉 तीन गुरुवार घोड़े को चने की दाल व गुड़ खिलाये । एक गुरुवार का अंतर देकर फिर ऐसा 7 बार करें

👉 गुरु लीलामृत का पाठ अथवा श्रवण करें।

👉 पीपल के वृक्ष के नीचे तीन गुरुवार लगातार पांच प्रकार की मिठाई के साथ
हरी इलायची का जोड़ा रखें।

👉 श्री दत्तात्रेय भगवान का पूजन करें।

👉 09 गुरुवार को 9 पीले कनेर व 9 चमेली के पुष्प जल में प्रवाहित करें।

👉 श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ गुरुवार को करें।

👉 रुद्राष्टाध्यायी अथवा शिव सहस्त्र नाम का भी पाठ कर सकते हैं।

👉 पत्रिका में गुरु किसी भी पापी ग्रह के साथ पंचम भाव में होने अथवा दृष्टि
से संतान कष्ट देता है, इसके लिये गोपाल सहस्त्र नाम का पाठ तथा वटवृक्ष में घी
का दीपक व जल देना आवश्यक है।

👉 गुरुकृत कष्टों से मुक्ति के लिये अथवा गुरु की बलवृद्धि के लिये एकादशी व्रत अथवा पूर्णिमा को भगवान सत्यनारायण की कथा अत्यधिक लाभ देती है।

👉 यदि गुरुवार किसी पूर्णिमा को आ रहा हो तो उस दिन केशर मिश्रित खीर बनवा कर चांदनी रात में रख दें, अगले दिन उसका सेवन करें।

👉 सदैव वृद्धों को सम्मान दें।

Editorial Desk

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