Uttar Pradesh: Yogi 2.0 सरकार बनने से पहले रिटायर हुए धार्मिक कट्टरता और धर्मांतरण कराने वाले Mohammad Iftikharuddin
Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के कमिश्नर रहे और अपने सरकारी आवास पर धार्मिक कट्टरता सिखाने वाले आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन (Mohammad Iftikharuddin) रिटायर हो गए हैं। वहीं, उनके खिलाफ विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट एक तरह से ठंडे बस्ते में चली गई है।
आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन (Mohammad Iftikharuddin) फरवरी में रिटायर हो गए थे और एसआईटी की सिफारिश पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि प्रदेश में दूसरी बार योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है।
आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन (Mohammad Iftikharuddin) के खिलाफ पिछले साल कुछ वीडियो वायरल हुए थे और जिसके बाद राज्य सरकार ने उनके खिलाफ एसआईटी का गठन किया था। दरअसल, वीडियो में वह अपने सरकारी आवास पर धार्मिक चरमपंथ का पाठ पढ़ा रहे थे। वहीं, मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने माना था कि ये वीडियो उनके सरकारी आवास के हैं।
इसके साथ ही मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने एक किताब भी लिखी थी और इसके लिए उन्होंने सरकार से अनुमति भी नहीं ली थी। जिसके बाद माना जा रहा था कि राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन राज्य सरकार ने एसआईटी की जांच करवाई लेकिन वह अपनी रिपोर्ट पर कार्रवाई करने से बचती रही।
राज्य सरकार ने गठित की थी एसआईटी
मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन का मामला सामने आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी और उसके बाद सरकार ने एसआईटी का गठन किया, जिसमें सीबीसीआईडी के तत्कालीन डीजी जीएल मीणा और कानपुर एडीजी भानु भास्कर शामिल थे।
एसआईटी की जांच में पाया गया कि इस तरह के छह दर्जन से अधिक ऑडियो और वीडियो बनाए गए थे और मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने धार्मिक कट्टरता पर किताबें भी लिखी थीं
इसके साथ ही उसने धर्मांतरण कराने की भी कोशिश की। जांच के बाद एसआईटी ने नवंबर में अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी और उस समय इफ्तिखारुद्दीन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के एमडी थे।
मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन (Mohammad Iftikharuddin) रिटायर्ड
मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन (Mohammad Iftikharuddin) सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके हैं। वह 1985 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और बिहार के रहने वाले हैं। मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन कानपुर में कमिश्नर होने के साथ कई अहम पदों पर रहे।
हालांकि माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य सरकार मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दूसरी ओर, अगर राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करती है, तो वह उन्हें कई प्रकार की सरकारी सुविधाओं से वंचित कर सकती है।

