स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 महामारी से लड़ने वाले स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता है। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया अध्यादेश इस संबंध में सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
The Epidemic Diseases (Amendment) Ordinance, 2020 manifests our commitment to protect each and every healthcare worker who is bravely battling COVID-19 on the frontline.
It will ensure safety of our professionals. There can be no compromise on their safety!
— Narendra Modi (@narendramodi) April 22, 2020
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी जिसमें कोरोना महारामी से लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों को परेशान करने या उन पर हमला करने के लिए कड़े दंड का प्रस्ताव किया गया। उन्होंने कहा कि अध्यादेश हमारे चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि उनकी सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 ने प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी की रक्षा करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को प्रकट किया, जो कोविड-19 से बहादुरी से लड़ रहे हैं।
कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों की पृष्ठभूमि में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसमें उनके खिलाफ हिंसा को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाया गया है। आज केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश में स्वास्थ्यकर्मियों के घायल होने, सम्पत्ति को नुकसान होने पर मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है। जावड़ेकर ने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश के माध्यम से महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन किया जाएगा। इससे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों की सुरक्षा और उनके रहने व काम करने की जगह को हिंसा से बचाने में मदद मिलेगी।
यह पूछे जाने पर क्या कोविड-19 के बाद भी नए बदलाव लागू रहेंगे, जावड़ेकर ने कहा कि अध्यादेश को महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन के लिए मंजूरी दी गई है। अध्यादेश में हिंसा के दोषी के लिए छह महीने से सात साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस महामारी से देश को बचाने की कोशिश कर रहे स्वास्थ्यकर्मी दुर्भाग्य से हमलों का सामना कर रहे हैं।
No decision has been taken yet on the resumption of flight operations. An announcement will be made on time as to when it will resume: Union Minister Prakash Javadekar pic.twitter.com/1M1tPMvt4X
— ANI (@ANI) April 22, 2020
जावड़ेकर ने बताया कि पैकेज के प्रमुख उद्देश्यों में कोरोना इलाज और कोविड-19 समर्पित उपचार सुविधाओं का विकास करना है ताकि भारत में वायरस के प्रसार को रोका जा सकें। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इसमें चिकित्सा उपकरणों की खरीद, संक्रमित रोगियों का इलाज और भविष्य में इस तरह की बीमारी के रोकथाम के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना भी शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पैकेज प्रयोगशालाओं और बोलस्टर निगरानी गतिविधियों, जैव-सुरक्षा तैयारियों, महामारी अनुसंधान और समुदायों को सक्रिय रूप से संलग्न करने और संचार गतिविधियों का संचालन करने में भी मदद करेगा। जावड़ेकर ने कहा कि इन हस्तक्षेपों और पहलों को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत लागू किया जाएगा।
उड़ान सेवाओं के फिर से शुरू किए जाने पर जावड़ेकर ने बताया कि उड़ान संचालन को फिर से शुरू करने पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। दोबारा शुरू करने के समय इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को लेकर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अगर कोई लाभार्थी कोरोना के अलावा किसी भी अन्य इलाज के लिए किसी भी अस्पताल में जाता है तो उसका इलाज मुफ्त में किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए मरीज के पास सरकारी अस्पताल से दिया गया सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
