असम और पूर्वी लद्दाख में अग्रिम मोर्चे पर तेज गति चिनूक हेलिकॉप्टर शामिल
चीन के साथ सीमा समेत दूर दराज के इलाकों में सैनिकों और मशीनों को पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना ने असम में मोहनबाड़ी एयरबेस पर चिनूक हेलिकॉप्टर शामिल किए हैं।
गुरुवार को चिनूक को पहली बार अरुणाचल प्रदेश के विजयनगर सेक्टर में कार्य के लिए भेजा गया। इसने राज्य के सबसे दुर्गम इलाके में जो म्यांमार से तीन ओर से जुड़ा हुआ है, 8.3 टन आवश्यक वस्तुएं पहुंचाईं।
There goes Chinook Helicopter of @IAF_MCC carrying 83 quintals of essential commodities for remote Vijoynagar in Changlang dist from Miao today. Thankfully weather cleared enabling essential items to be delivered to the needy in this pandemic, completing day’s task in 2 sorties. pic.twitter.com/8xKlfp1zQh
— Pema Khandu (@PemaKhanduBJP) May 28, 2020
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया जिसमें विजय नगर के निवासियों के लिए हेलिकॉप्टर आवश्यक वस्तुएं लेकर उड़ान भर रहा है।
चिनूक को मोहनबाड़ी एयरबेस पर हाल ही में शामिल किया गया है और जल्द ही इन्हें सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और अन्य नजदीकी स्थानों पर कार्रवाई को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
अमेरिकी चिनूक हेलिकॉप्टर एक घाटी से दूसरी घाटी में सैनिकों को ले जाने में सबसे बेहतरीन हेलिकॉप्टर में से एक माने जाते हैं। ये ऐसी परिस्थितियों में बेहतर काम कर सकते हैं जैसी हाल के दिनों में उत्तरी सिक्किम में बन गई थी
जब चीन के सैनिक बड़ी संख्या में भारतीय सीमा में आ गए थे। इसका इस्तेमाल मानवीय सहायता के लिए और आपदा के समय प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने के लिए भी किया जाएगा।
चिनूक हेलीकॉप्टकर की सबसे खास बात इसकी तेज गति है। चिनूक चॉपर की मदद से देश के दुर्गम इलाकों में सड़क निर्माण की परियोजनाओं में मदद मिलेगी।
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना की घुसपैठ को रोकने और निगरानी के लिए भारत की थल और वायुसेना मुस्तैद हो गई हैं।
थल सेना ने गलवन घाटी और पैगांग त्सो इलाके में यूएवी (अनमैंड एरियल व्हीकल) तैनात कर दिए हैं। वहीं, वायुसेना ने भी पूर्वी लद्दाख में अपनी गतिविधियों को बढ़ाते हुए चिनूक हेलीकॉप्टर को अग्रिम इलाकों में उतारा है।
लेह स्थित सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के अधीन सेना की 81 और 114 ब्रिगेड ने चीनी सेना से निपटने के लिए अपने जवानों और अधिकारियों को चौबीस घंटे ऑपरेशनल मोड में रहने के आदेश दिए हैं।
सेना के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और उसके अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
