संपादकीय विशेष

Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…दीपावली मेले के नाम पर सर्दियों में नुमाईश

लोग कहते है कि इस शहर के इतिहास में संभवत पहली बार ऐसा हुआ की सर्दियों में Muzaffarnagar नुमाईश लग भी गई और समाप्त भी हो गई और वो भी बिना किसी हल्ले-गुल्ले के, बड़े आकाओं की रणनीति ऐसी चली कि हरफनमौला नेता भी चारों खाने चित्त नजर आये। किसी को कानो कान तक खबर नहीं लगी कि नुमाईश लगने जा रही है, केवल अधीनस्थ अफसरों को इसका पता था।

लोगों का कहना है कि इस बार दीपावली मेले के नाम पर सर्दियों में नुमाईश लगवा दी गई और न तो अखबारों में विज्ञापन छपे और न ही नेताओं की बैठकें बुलाई गई, फिर भी नुमाईश लगवा दी गयी। मजे की बात यह रही कि दीपावली पर हर साल मेले लगाने वाले समाजसेवा वाले क्लब और समाजसेवी भी इस बार सक्रिय नजर नहीं आये।

शायद वे लोग टिकट मांगने के जुगाड़ में इतने मशगूल हो गये थे कि उन्हें आभास ही नहीं हुआ कि शहर में नुमाईश लगने जा रही है। लोग कहते है कि यूं तो नुमाईश में रंग पूरा जमा रहा, ठेका लेने वाले ने भी मनमुताबिक दामों पर दुकानदारों को जगह दी। पुलिस मुश्तैद रही, लेकिन नुमाईश के भोपू और विज्ञापन के लाउडस्पीकर जो मीनाक्षी चैक से आगे पूरे शहर में बजते थे, वे इस बार खामोश नजर आये।

लोग कहते है कि इस बार दीपावली बनाम नुमाईश में कोई भी सांस्कृतिक प्रतियोगिता नहीं हुई और न ही नेताओं को दावत पानी पर बुलाया गया, बस नुमाईश का बाजा खूब बजा। आम जनता में चर्चा है कि ‘बड़े आका’ ने पूरी तैयारी इस हिसाब से तैयार करा दी थी कि पंखा भी न हिल सके और नेताओं का डंक दबा रहे। लोगों का मानना है कि आखिर बड़े आका भी रिटायर्डमेंट के नजदीक जा रहे है। उम्र भर का तजुर्बा कब काम आयेगा। लोग कहते है कि नुमाईश की समाप्ति पर जब दुकानदार अपना सामान उठाकर अन्य जगह जाने के लिए समेटने लगे तो वसूली वालों ने पुलिस वालों की छत्रछाया में उनका बोरिया बिस्तर रूकवा दिया। हार-झकमारकर दुकानदारों ने जिले के मुखिया से बातचीत कर अपनी जान छुड़ाने की गुहार लगाई।

दुकानदारों का कहना था कि दो ह∂ते के मेले में इतनी तो मोटी कमाई भी नहीं हुई, जितनी की देनी पड़ रही है। शुरूआत में जो पैसा दिया गया उनकी रसीद उनके पास है। दुकानों ने आॅप्शन दिया कि यदि नुमाईश की अवधि बढ़ा दी जाये तो उनका खर्चा निकल जायेगा, लेकिन नुमाईश बढ़ाने का कोई मूड प्रशासन का नजर नहीं आता। दूसरी ओर प्रशासन के अफसरों ने ठेकेदार के ≈पर बकाया जमा कराने का भी दबाव बनाया हुआ है।

Dr. S.K. Agarwal

डॉ. एस.के. अग्रवाल न्यूज नेटवर्क के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह मीडिया योजना, समाचार प्रचार और समन्वय सहित समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। उन्हें मीडिया, पत्रकारिता और इवेंट-मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में लगभग 3.5 दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, चैनलों और पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं। संपर्क ई.मेल- [email protected]

Dr. S.K. Agarwal has 404 posts and counting. See all posts by Dr. S.K. Agarwal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

5 × 5 =