Muzaffarnagar – दिवाली के कुछ सामान सड़क पर बैठे बुजुर्गों से खरीद लिया करो?
खतौली (Muzaffarnagar ) दीपावली के पावन पर्व पर अपनी पुरानी परंपरा और रिवाजों को बखूबी ढंग से निभाने के काम को खतौली के गाँव पाल के रहने वाले बुजुर्ग बीर सिंह अंजाम दे रहे हैं, पिछले लगभग पंद्रह साल से जिला परिषद मार्केट के सामने दीपावली के अवसर पर खील बतासे और मिट्टी के बने दियों से लोगों की दीवाली रोशन करते हैं
बीर सिंह का कहना है कि समय के हिसाब से बहुत कुछ बदल गया है। अब लोग खील बतासे और दिये बहुत कम खरीदते हैं, जबकि हमारी माटी और दीपावली की असल पहचान यही है कि हम अपनी परंपराओं और धार्मिक रिवाजों को न बदले लेकिन धीरे-धीरे बहुत कुछ बदल रहा है, चाईनीज सामान ने रोजी रोटी का संकट पैदा कर दिया है, दिक्कत और दुश्वारियों के बीच भी बीर सिंह अपने पुराने काम को अपने बेटे के साथ अंजाम दे रहे है।
दिपावली से चार पांच दिन पहले वो अपने गाँव से आकर यहीं शहर में रहते हैं और फिर दिपावली की शाम को अपने घर अपनी दिपावली मनाने के लिए चले जाते हैं, इनकी दीपावली इन दियों और खील बतासों की बिक्री पर ही निर्भर करती है, अपनी सभ्यता और रिवाजों को भूलकर हम कभी आगे नहीं बढ सकते
हमें त्यौहार मनाते वक्त विलुप्त होती इस खील बतासों और माटी के दियों की महक को लेकर जरूर मंथन करना चाहिए। ऐसे कर्मठ और धार्मिक अनुष्ठान की सामग्री बेचकर अपना घर चलाने वालों के बारे में सोचकर इनसे कुछ ना कुछ जरूर खरीदना चाहिए, इससे हमारी परंपरा भी बची रहेगी।

