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Muzaffarnagar-7 साल का भोलेनाथ! नन्हा माधव बना शिव का स्वरूप, कांवड़ यात्रा में लूटी महफिल – लोग चरण छूकर मांग रहे आशीर्वाद

Muzaffarnagar श्रावण मास में आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा 2025 एक बार फिर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्वितीय संगम बन चुकी है। जहां लाखों शिवभक्त गंगाजल लेने हरिद्वार की ओर पैदल, बाइक, साइकिल या ट्रक से रवाना हो रहे हैं, वहीं इस बार यात्रा में सबसे खास आकर्षण बना है दिल्ली का 7 साल का माधव, जिसने भोलेनाथ का रूप धारण कर हर किसी का दिल जीत लिया है।

भोलेनाथ की वेशभूषा में साइकिल पर सवार नन्हा शिवभक्त बना श्रद्धा का प्रतीक

दिल्ली निवासी माधव ने अपनी छोटी सी साइकिल को इस तरह सजाया है कि वह प्रतीकात्मक रूप से एक पवित्र नदी — विशेष रूप से गंगा — का आभास देती है। रंग-बिरंगे वस्त्र, माथे पर तिलक, गले में रुद्राक्ष, हाथ में त्रिशूल और बदन पर भस्म लगाए हुए जब माधव रास्तों पर निकलता है, तो लोग खुद को रोक नहीं पाते। कोई उसका फोटो खींचता है, तो कोई उसके चरण छूकर आशीर्वाद लेता है। कांवड़ यात्रा में हजारों की भीड़ के बीच यह नन्हा शिवभक्त लोगों के लिए ‘चलता-फिरता शिवरूप’ बन चुका है।

तीन बार पैदल ला चुका कांवड़, अब छोटी साइकिल पर यात्रा

माधव के पिता प्रिंस बताते हैं कि बेटा पिछले तीन वर्षों से हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल कांवड़ ला चुका है। इस बार विशेष रूप से भोलेनाथ के वेश में छोटी साइकिल पर यात्रा कर रहा है। इस दौरान वह भक्ति गीतों पर झूमता है और रास्ते में “बोल बम” के जयकारों के साथ लोगों का उत्साह भी बढ़ाता है। सड़कों के किनारे खड़े श्रद्धालु उसे देख मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यह दृश्य हर किसी की आंखों में श्रद्धा की नमी और हृदय में भक्ति का संचार कर देता है।

भोलेनाथ की कृपा से बच्चा खुद बना है प्रेरणा स्रोत

माधव केवल एक बालक नहीं है, वह अब एक प्रेरणा स्रोत बन गया है उन लाखों लोगों के लिए जो बच्चों को मोबाइल, गेम और टीवी तक सीमित देखते हैं। इस नन्हे शिवभक्त ने यह साबित किया है कि श्रद्धा उम्र की मोहताज नहीं होती। माधव की आस्था, उसकी तैयारी, उसका शिवरूप और उसके चेहरे पर छाई भक्ति की चमक साफ बताती है कि यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि भीतर से निकली हुई श्रद्धा की अभिव्यक्ति है।


कांवड़ सेवा शिविर का भव्य उद्घाटन, विधायक कपिल देव अग्रवाल ने किया शुभारंभ

कांवड़ यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर में लगे निःशुल्क कांवड़ सेवा शिविर का उद्घाटन क्षेत्रीय विधायक कपिल देव अग्रवाल द्वारा किया गया। इस शिविर का संचालन भगवा रक्षा वाहिनी के माध्यम से किया जा रहा है, जो कि पिछले छह वर्षों से इस सेवा में निरंतर कार्यरत है।

राष्ट्रीय आईटी सेल प्रभारी गौरव सिंह आजाद ने जानकारी दी कि हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों शिवभक्तों की सेवा के लिए शिविर में चाय, भोजन, प्राथमिक चिकित्सा और विश्राम स्थल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उद्घाटन के अवसर पर रुचि सिंह (निवर्तमान महिला अध्यक्ष), सौरभ ठाकुर, आकाश, संदीप श्रीवास्तव सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। विधायक कपिल देव ने शिविर का निरीक्षण किया और सेवाभाव को सराहा।


बसपा जिलाध्यक्ष ने किया शिवभक्त का स्वागत, कांवड़ लाने पर हुआ सम्मान

मुजफ्फरनगर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर कांवड़ यात्रा कर रहे विवेक पाल का भी जोरदार स्वागत किया गया। अहिल्याबाई चौक पर बसपा जिलाध्यक्ष पुष्पांकर पाल भिक्की द्वारा फूलों की माला और अंगवस्त्र देकर उनका अभिनंदन किया गया।

हरिद्वार से पुरा महादेव तक की इस यात्रा में विवेक पाल के साथ हरेंद्र पाल, संदीप पाल, हर्ष पाल, दिनेश पाल, सुधीर पाल, प्रदीप पाल, देवीसिंह पाल सहित कई श्रद्धालु भी शामिल हुए। इस यात्रा के दौरान देवी अहिल्याबाई को समर्पित गीत और घोषणाओं ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया।


कांवड़ यात्रा बनी जनमानस की आस्था का प्रतीक, नन्हें माधव से लेकर बुजुर्ग शिवभक्त तक – हर कोई शामिल

Kanwar Yatra 2025 केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह अब सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का उत्सव बन चुका है। नन्हे माधव का भोलेनाथ बनकर यात्रा करना जहां श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रहा है, वहीं सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे सेवा शिविरों और कांवड़ सम्मान समारोहों ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया है।

यात्रा के मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था, सेवा शिविरों का संचालन, भजन-कीर्तन और भावनात्मक वातावरण ने यह सिद्ध किया है कि कांवड़ यात्रा एक जनआंदोलन की तरह है – जिसमें हर उम्र, हर वर्ग, हर धर्म के लोग श्रद्धा के साथ भाग ले रहे हैं।


7 साल के भोलेनाथ बने नन्हे माधव की कांवड़ यात्रा ने यह दिखा दिया है कि श्रद्धा का कोई मापदंड नहीं होता। सच्ची भक्ति जब मन से निकलती है, तो वह उम्र, साधन या साधना नहीं देखती। आज का समाज इस बालक से प्रेरणा ले सकता है कि कैसे आध्यात्मिकता और संस्कृति से जुड़कर नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। कांवड़ यात्रा 2025 सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि जीती-जागती आस्था है – जो हर साल दिलों को जोड़ती है, मन को शुद्ध करती है और समाज को एकसूत्र में बांधती है।

 

Akanksha Agarwal

Akanksha Agarwal (एमबीए - एचआर फाइनेंस) एचआर निदेशक हैं। उन्हें सुंदर प्राकृतिक समुद्र तटों और विभिन्न संस्कृतियों को समझने और सीखने के लिए विभिन्न देशों की यात्रा करना पसंद है।एक अनुभवी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व आकांक्षा, विभिन्न संस्कृतियों और लोगों के साथ निरंतर जुड़ती हैं। नई संस्कृतियों के साथ उनका विशेष ध्यान एक संवाद का माध्यम भी हैं.

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