उत्तर प्रदेश

Bareilly- प्रेमिका के शौक पूरे करने के लिए नर्सिंग कर्मचारी बना किडनैपर! मंदिर से मासूम अगवा, दिल्ली तक फैला बच्चा तस्करी गिरोह

Bareilly मंडल से सामने आया एक सनसनीखेज मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। यहां एक नर्सिंग कर्मचारी ने कथित तौर पर अपनी प्रेमिका के शौक और महंगे खर्च पूरे करने के लिए मासूम बच्चों की तस्करी जैसे खतरनाक अपराध का रास्ता चुन लिया। आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर मंदिर परिसर से एक छोटे बच्चे का अपहरण कर लिया और उसे दिल्ली ले जाकर बेचने की तैयारी कर रहा था। हालांकि पुलिस की सतर्कता के चलते आरोपी ज्यादा दूर नहीं जा सके और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस मामले के तार केवल बरेली मंडल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लखीमपुर खीरी और दिल्ली तक फैले एक संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। अब पुलिस इस पूरे गिरोह के सरगना और अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।


नर्सिंग कर्मचारी ने कबूला- ‘प्रेमिका के शौक पूरे करने के लिए लालच में आया’

गिरफ्तार आरोपी की पहचान शाहजहांपुर निवासी योगेश कन्नौजिया के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि वह एमएससी नर्सिंग करने के बाद पिछले चार वर्षों से एक मेडिकल कॉलेज और बंथरा स्थित अस्पताल में स्टाफ नर्स के तौर पर काम कर रहा था।

इसी दौरान उसकी मुलाकात लखीमपुर खीरी निवासी उत्तम सिंह से हुई थी। उत्तम अपने परिवार के एक सदस्य का इलाज कराने अस्पताल आया था। इलाज के दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और बाद में संपर्क लगातार बना रहा।

पूछताछ में योगेश ने बताया कि उत्तम सिंह ने उसे बताया था कि जिन अमीर लोगों के बच्चे नहीं होते, उन्हें छोटे बच्चों को गोद दिलाने या अवैध तरीके से उपलब्ध कराने का काम कर वह मोटी रकम कमाता है।

यहीं से योगेश के मन में भी लालच पैदा हुआ। आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह अपनी प्रेमिका के महंगे शौक पूरे करना चाहता था और जल्दी पैसा कमाने के लालच में इस धंधे में उतर गया।


दोस्त को बनाया साथी, पैसों में आधी हिस्सेदारी का सौदा

योगेश ने आगे बताया कि उसने इस योजना में अपने दोस्त पवन चंदेल को भी शामिल कर लिया। पवन मूल रूप से बदायूं के ककराला का रहने वाला है और फिलहाल जलालाबाद में रह रहा था।

जब योगेश ने उसे बच्चों की तस्करी के जरिए पैसे कमाने का प्लान बताया तो वह भी तैयार हो गया। दोनों के बीच तय हुआ कि जो भी रकम मिलेगी, उसमें आधा हिस्सा पवन को दिया जाएगा।

इसके बाद दोनों कई दिनों तक छोटे बच्चों की तलाश में अलग-अलग शहरों, मंदिरों, मेलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में घूमते रहे।


मंदिर में की रेकी, फिर मासूम को बनाया निशाना

पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने पहले रेकी की और फिर पूरी योजना बनाकर बच्चे का अपहरण किया।

आरोपियों को जानकारी मिली थी कि आंवला के मनौना गांव स्थित श्याम मंदिर में काफी भीड़ रहती है और वहां बच्चों का आना-जाना ज्यादा रहता है। इसके बाद दोनों 23 मई को पहली बार मंदिर पहुंचे और पूरे इलाके का निरीक्षण किया।

पूछताछ में बताया गया कि मंदिर परिसर के पीछे टिन की झोपड़ी में मंदिर कर्मचारियों का परिवार रहता था। वहीं सफाईकर्मी रमन के बच्चे खेलते हुए दिखाई दिए। आरोपियों की नजर रमन के छोटे बेटे ऋषभ पर पड़ी, जिसे उन्होंने आसान निशाना माना।


40 रुपये, टॉफी और जूस का लालच देकर ले गए बच्चा

अगले दिन यानी 24 मई की सुबह दोनों आरोपी दोबारा मंदिर पहुंचे। इस बार उन्होंने बच्चों से दोस्ती करने की कोशिश की।

उन्होंने रमन के तीनों बच्चों को 40 रुपये और टॉफियां दीं। इसके बाद बच्चों से कहा गया कि पास की दुकान से उन्हें जूस दिलाया जाएगा। बच्चे उनके साथ चल पड़े।

रास्ते में आरोपी योगेश ने दो बड़े बच्चों को खीरा देकर बहलाया, जबकि छोटे बच्चे ऋषभ को गोद में उठा लिया। उसी समय उसका साथी पवन बाइक लेकर पास आ गया और दोनों बच्चे को लेकर वहां से फरार हो गए।


भागते समय हादसे का शिकार हुए आरोपी

पूछताछ में यह भी सामने आया कि बच्चा लेकर भागते समय आरोपियों की बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में दोनों आरोपियों के हाथों में चोट आई, जबकि बच्चे के सिर पर भी चोट लग गई।

इसके बाद दोनों ने अपना इलाज कराया और बच्चे के सिर पर भी पट्टी बंधवाई ताकि शक न हो। पुलिस का मानना है कि इस दौरान आरोपियों ने सामान्य परिवार जैसा दिखने की कोशिश की ताकि रास्ते में कोई उन्हें रोक न सके।


दिल्ली ले जाकर बेचने की थी तैयारी

पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी बच्चे को लेकर दिल्ली जाने की फिराक में थे। योजना थी कि रास्ते में फुलासी होते हुए दिल्ली पहुंचा जाए, जहां कथित रूप से उत्तम सिंह उनसे मिलने वाला था।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बच्चे के बदले उन्हें करीब 60 हजार रुपये मिलने थे। हालांकि पुलिस की सक्रियता के चलते वे अपने मकसद में सफल नहीं हो सके और गिरफ्तार कर लिए गए।


पुलिस को मिले अहम सुराग, गिरोह के सरगना की तलाश तेज

बरेली पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उनके पास से तमंचे, कारतूस और बिना नंबर की बाइक भी बरामद की है।

अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार मामले के मुख्य सरगना और अन्य संदिग्ध लोगों की तलाश के लिए तीन अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी बच्चों की तस्करी की है और इसके तार किन-किन राज्यों तक फैले हुए हैं।


बच्चों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों, मेलों और सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि माता-पिता और अभिभावकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। बच्चों को अनजान लोगों से दूरी बनाए रखने और किसी लालच में न आने के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।


मानव तस्करी के बदलते तरीके बने चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह अब नए और चालाक तरीके अपना रहे हैं। कई मामलों में आरोपी खुद को सामान्य व्यक्ति, रिश्तेदार या मददगार बताकर बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाते हैं।

इस तरह के मामलों में सोशल मीडिया, नकली पहचान और फर्जी गोद लेने के नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि पुलिस एजेंसियां अब संगठित मानव तस्करी नेटवर्क पर अधिक सख्ती से नजर रख रही हैं।


उत्तर प्रदेश से सामने आया यह मामला केवल एक अपहरण की घटना नहीं बल्कि तेजी से फैलते संगठित बाल तस्करी नेटवर्क की गंभीर चेतावनी भी माना जा रहा है। मामूली लालच और तेज कमाई की चाह कैसे लोगों को खतरनाक अपराध की दुनिया में धकेल सकती है, यह घटना उसी की भयावह तस्वीर पेश करती है। पुलिस अब पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है।

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