Muzaffarnagar साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: ₹20 हजार का इनामी साइबर ठग गिरफ्तार, 31.95 करोड़ की ठगी से जुड़े 20 मामलों का खुलासा
News-Desk
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Muzaffarnagar News, एसएसपी संजय कुमार वर्मा, एसपी क्राइम इन्दु सिद्धार्थ, ऑनलाइन फ्रॉड, कर्मवीर सिंह, डिजिटल अरेस्ट, प्रतिविंब पोर्टल, मुज़फ्फरनगर न्यूज़, रिहान गिरफ्तार, साइबर क्राइम, साइबर ठगीMuzaffarnagar की साइबर क्राइम पुलिस को ऑनलाइन ठगी और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। थाना साइबर क्राइम पुलिस ने ₹20 हजार के इनामी वांछित आरोपी रिहान को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खातों में 31.71 लाख रुपये की साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी, जबकि विभिन्न राज्यों में दर्ज करीब 20 साइबर शिकायतों में उससे जुड़े लगभग 31.95 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई है।
यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ एवं थाना प्रभारी साइबर क्राइम कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में की गई।
‘प्रतिबिंब’ पोर्टल पर मिली शिकायतों से खुला मामला
पुलिस के अनुसार गृह मंत्रालय के ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल पर मुजफ्फरनगर से संचालित फर्जी कॉल के माध्यम से साइबर ठगी किए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों के आधार पर थाना साइबर क्राइम ने तकनीकी जांच शुरू की।
जांच के दौरान जिन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध में किया जा रहा था, उनका संचालन मुजफ्फरनगर से होने की पुष्टि हुई। इसके बाद थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच प्रारंभ की गई।
पहले पांच आरोपी गिरफ्तार, अब इनामी आरोपी भी पुलिस गिरफ्त में
पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण में पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी थी।
इसी क्रम में मंगलवार को मुखबिर की सूचना पर रिहान पुत्र मोहम्मद मेहराज, निवासी मक्कीनगर, योगेंद्रपुरी, थाना खालापार, मुजफ्फरनगर को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी पर ₹20 हजार का इनाम घोषित था।
पुलिस ने आरोपी को नियमानुसार हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
फर्जी फर्म बनाकर खुलवाए गए बैंक खाते
पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने सहआरोपी मयूर अफजल राणा के कहने पर अपने नाम से कई बैंक खाते खुलवाए थे। इसके अलावा ‘रिहान ट्रांसपोर्ट’ नाम से एक फर्म के नाम पर भी बैंक खाता खोला गया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह कोई वास्तविक व्यावसायिक संस्था नहीं थी। केवल ऑनलाइन फर्जी पंजीकरण के आधार पर बैंक खाता खुलवाया गया था, जिसका उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि के लेनदेन के लिए किया जा रहा था।
डिजिटल अरेस्ट और ट्रेडिंग के नाम पर ठगी की रकम होती थी ट्रांसफर
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बैंक खातों का इस्तेमाल कथित ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से प्राप्त धनराशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।
उसने यह भी स्वीकार किया कि वह बैंक, एटीएम और जनसेवा केंद्रों के माध्यम से नकदी निकालकर मुख्य आरोपी तक पहुंचाता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी को प्रत्येक बैंक खाते के बदले 60 हजार रुपये तथा प्रत्येक लेनदेन पर अलग से कमीशन दिया जाता था।
31.71 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन, 31.95 करोड़ से जुड़े मामले
साइबर क्राइम पुलिस की जांच में आरोपी के खातों में 31.71 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की राशि ट्रांसफर होने की जानकारी मिली है।
इसके अलावा विभिन्न राज्यों में दर्ज लगभग 20 साइबर शिकायतों में करीब 31.95 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी की भूमिका इन मामलों में किस स्तर तक रही है।
अधिकारियों के अनुसार जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आगे की विवेचना के आधार पर और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
अन्य बैंक खातों और सहयोगियों की भी जांच जारी
थाना साइबर क्राइम पुलिस अब आरोपी से जुड़े अन्य बैंक खातों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, सहयोगियों तथा विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों की जानकारी जुटा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि गिरोह में कितने लोग सक्रिय थे, धनराशि किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई और साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क किस प्रकार संचालित किया जा रहा था।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस मामले की जांच आगे बढ़ने पर अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में तथाकथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को फोन कॉल या वीडियो कॉल के माध्यम से डराकर धन उगाही के मामलों में वृद्धि देखी गई है। ऐसे मामलों में अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को भयभीत करते हैं और उनसे धनराशि ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं।
पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन लेनदेन के मामले में सतर्क रहें तथा सत्यापन किए बिना किसी भी खाते में धनराशि ट्रांसफर न करें।

