शस्त्र लाइसेंस रिपोर्ट पर उठे सवाल: वरिष्ठ अधिवक्ता Pramod Tyagi ने पुलिस संस्तुति को बताया तथ्यात्मक रूप से गलत, निष्पक्ष जांच की मांग
मुजफ्फरनगर में वरिष्ठ अधिवक्ता Pramod Tyagi ने आरोप लगाया है कि उनके शस्त्र लाइसेंस के स्थानांतरण /संबंधित पुलिस सत्यापन के दौरान तैयार की गई संस्तुति रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटियां दर्ज कर दी गईं। उनका कहना है कि रिपोर्ट में उनके दोनों पुत्रों के नाम ऐसे मामलों से जोड़कर दर्शाए गए हैं, जिनमें उनके अनुसार न तो कोई आपराधिक दोष सिद्ध हुआ है और न ही परिवार के किसी सदस्य को कभी वांछित घोषित किया गया।
उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सही तथ्यों के आधार पर नई संस्तुति तैयार किए जाने की मांग की है।
एक महीने बाद भेजी गई रिपोर्ट पर जताई आपत्ति
प्रमोद त्यागी के अनुसार, थाना मंसूरपुर द्वारा शस्त्र लाइसेंस से संबंधित संस्तुति एक महीने से अधिक समय बाद भेजी गई। उनका आरोप है कि इस रिपोर्ट में उनके दोनों पुत्रों के संबंध में ऐसे उल्लेख किए गए हैं, जिन पर उन्हें गंभीर आपत्ति है।
उनका कहना है कि रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है मानो उनके परिवार के सदस्यों का आपराधिक मामलों से प्रतिकूल संबंध रहा हो, जबकि वे इसे पूरी तरह गलत बताते हैं।
परिवार के विरुद्ध किसी सदस्य के वांछित होने से किया इनकार
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद त्यागी का कहना है कि उनके अथवा उनके परिवार के किसी भी सदस्य के विरुद्ध आज तक ऐसी कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई, जिसमें किसी को वांछित (Wanted) घोषित किया गया हो।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके दोनों पुत्र शिक्षित एवं सामाजिक जीवन से जुड़े हुए हैं और उनके विरुद्ध दर्ज तथ्यों का सही परीक्षण किया जाना आवश्यक है। उनका आरोप है कि यदि किसी रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटि रह जाती है तो उसका सीधा असर संबंधित व्यक्ति के वैधानिक अधिकारों और प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।
एसपी सिटी ने स्पष्ट संस्तुति के लिए वापस भेजी फाइल
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद त्यागी के अनुसार, मामले में एसपी सिटी मुजफ्फरनगर ने स्थानांतरण संस्तुति को स्पष्ट कराने के उद्देश्य से फाइल पुनः क्षेत्राधिकारी (सीओ) खतौली रूपाली राव के कार्यालय भेजी।
इसके बाद कार्यालय स्तर से जांच के लिए प्रकरण दोबारा थाना मंसूरपुर को भेजे जाने की कार्रवाई की गई, ताकि उपलब्ध तथ्यों का पुनः परीक्षण कर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।
पूर्व में एसएसपी और डीजीपी को भी भेजा था प्रार्थना पत्र
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद त्यागी का कहना है कि उन्होंने इस स्थानांतरण मामले को लेकर पहले भी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मुजफ्फरनगर तथा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), उत्तर प्रदेश को व्हाट्सएप के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अनुरोध के बावजूद अभी तक अपेक्षित समाधान नहीं निकल सका है। इस संबंध में उन्होंने एक हस्तलिखित प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया है, जिसमें संस्तुति रिपोर्ट में संशोधन की मांग की गई है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सही तथ्यों के आधार पर निर्णय की अपेक्षा
प्रमोद त्यागी का कहना है कि यदि किसी सरकारी सत्यापन रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटि रह जाती है तो उसे समय रहते ठीक किया जाना आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लेने की मांग की है।
दूसरी ओर, समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है। यदि संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
हस्तलिखित प्रार्थना पत्र में भी दोहराई गई मांग
उपलब्ध हस्तलिखित प्रार्थना पत्र में भी प्रमोद त्यागी ने यही अनुरोध किया है कि उनके दोनों पुत्रों के संबंध में तैयार की गई स्थानांतरण संस्तुति का पुनः परीक्षण कराया जाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके अनुसार परिवार के विरुद्ध किसी सदस्य को कभी वांछित घोषित नहीं किया गया है और इसलिए सही तथ्यों के आधार पर स्पष्ट रिपोर्ट तैयार की जाए।

