नेपाल में भोटे कोशी की बाढ़ से मचा हाहाकार, Rakesh Tikait समेत भाकियू का 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल फंसा; बोले- सभी सुरक्षित
Nepal में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ और खराब मौसम के बीच भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) टिकैत का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी नेपाल में फंस गया है। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait भी शामिल हैं।
राकेश टिकैत ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि वह फिलहाल पोखरा क्षेत्र में सुरक्षित हैं। उनके साथ मौजूद सभी किसान प्रतिनिधि भी सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि जिस इलाके में वह मौजूद हैं, वहां मौसम खराब है, लेकिन बाढ़ का असर उतना गंभीर नहीं है जितना नेपाल के भोटे कोशी और उससे जुड़े प्रभावित क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को देखते हुए यात्रा कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। चितवन और पोखरा को जोड़ने वाले पृथ्वी राजमार्ग को सुरक्षा कारणों से बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में प्रतिनिधिमंडल अब निर्धारित मार्ग के बजाय वैकल्पिक तरीके से आगे बढ़ने की तैयारी में है।
भोटे कोशी की बाढ़ ने नेपाल में मचाई भारी तबाही
नेपाल में बुधवार को भोटे कोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आने के बाद कई इलाकों में तबाही का मंजर देखने को मिला।
नदी के तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं और राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश में जुटे हैं।
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
नेपाल दौरे पर तीन दिन पहले पहुंचा था प्रतिनिधिमंडल
राकेश टिकैत ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल करीब तीन दिन पहले नेपाल पहुंचा था।
प्रतिनिधिमंडल के नेपाल दौरे का कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। लेकिन अचानक मौसम खराब होने और भोटे कोशी नदी में बाढ़ आने के बाद परिस्थितियां बदल गईं।
प्रतिनिधिमंडल में राकेश टिकैत के अलावा अजय ठाकुर समेत अन्य किसान प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
यात्रा के दौरान बाढ़ के हालात सामने आने के बाद प्रतिनिधिमंडल को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा।
पोखरा में सुरक्षित हैं राकेश टिकैत
राकेश टिकैत के अनुसार, वह फिलहाल पोखरा क्षेत्र में हैं।
उन्होंने फोन पर बताया कि मौसम खराब है, लेकिन जिस स्थान पर प्रतिनिधिमंडल मौजूद है, वहां बाढ़ का असर अपेक्षाकृत कम है।
टिकैत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और उन्हें फिलहाल किसी प्रकार की गंभीर समस्या नहीं है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों को छोड़कर सभी लोग सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हैं।
गाड़ियों को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे किसान प्रतिनिधि
बाढ़ और खराब मौसम के बीच सड़क मार्ग से आगे बढ़ना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
राकेश टिकैत ने बताया कि गाड़ियों को छोड़कर सभी लोग सुरक्षित स्थान पर आ गए हैं।
ऐसे हालात में यात्रा जारी रखने के बजाय किसी सुरक्षित स्थान पर रुकना जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने, भूस्खलन और सड़क संपर्क टूटने का खतरा बना रहता है।
चितवन-पोखरा मार्ग पर भी बढ़ी चुनौती
बाढ़ के हालात का असर नेपाल के महत्वपूर्ण सड़क संपर्क मार्गों पर भी पड़ा है।
चितवन और पोखरा को जोड़ने वाले पृथ्वी राजमार्ग को सुरक्षा कारणों से बंद किए जाने की जानकारी राकेश टिकैत ने दी है।
यह मार्ग नेपाल में यात्रियों और स्थानीय परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सड़क बंद होने के कारण सामान्य यातायात प्रभावित हुआ है और यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
प्रतिनिधिमंडल के लिए भी यही स्थिति यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
पोखरा से पहले काठमांडू जाने की योजना
राकेश टिकैत ने बताया कि अब प्रतिनिधिमंडल की आगे की यात्रा योजना में बदलाव किया गया है।
उन्होंने कहा कि वह पोखरा से पहले काठमांडू पहुंचेंगे और इसके बाद मुजफ्फरनगर लौटेंगे।
उनके अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के 28 अगस्त तक मुजफ्फरनगर वापस पहुंचने की योजना है।
हालांकि, नेपाल में मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए यात्रा कार्यक्रम परिस्थितियों के अनुसार बदल भी सकता है।
राकेश टिकैत ने सोशल मीडिया के जरिए भी दी जानकारी
नेपाल की स्थिति को लेकर राकेश टिकैत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से भी वीडियो जारी किया है।
वीडियो के जरिए उन्होंने नेपाल में बने हालात और अपनी स्थिति के बारे में जानकारी साझा की।
ऐसे समय में जब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अलग-अलग तरह की सूचनाएं सामने आ रही हैं, उनका स्वयं सुरक्षित होने की जानकारी देना उनके समर्थकों और परिवार के लिए राहत की बात है।
मुजफ्फरनगर से नेपाल गया था किसान प्रतिनिधिमंडल
राकेश टिकैत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं और भारतीय किसान यूनियन से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर हैं।
नेपाल गए प्रतिनिधिमंडल में किसानों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं। अजय ठाकुर समेत अन्य किसान भी इस दल का हिस्सा हैं।
प्रतिनिधिमंडल का नेपाल दौरा पहले से तय कार्यक्रम के तहत हुआ था, लेकिन अचानक आई बाढ़ ने पूरी यात्रा की परिस्थितियां बदल दीं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल के प्रभावित इलाकों में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।
लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव दलों को लगाया गया है। कई स्थानों पर सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव कार्य में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।
पहाड़ी इलाकों में बाढ़ के साथ मलबा और चट्टानों का तेज बहाव राहत टीमों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है।
भोटे कोशी नदी में अचानक क्यों बढ़ा पानी?
भोटे कोशी नदी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ को लेकर शुरुआती तौर पर कई संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।
हिमालयी क्षेत्र में अचानक बाढ़ के पीछे अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन, बर्फ या चट्टानों के नदी में गिरने और ग्लेशियल झील से अचानक पानी निकलने जैसी प्राकृतिक परिस्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं।
ऐसी घटनाओं में नदी का जलस्तर बहुत कम समय में तेजी से बढ़ सकता है, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
बाढ़ के वास्तविक कारण की पुष्टि संबंधित अधिकारियों और तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़ सबसे बड़ा खतरा
नेपाल का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित है। यहां नदियां संकरी घाटियों से होकर गुजरती हैं।
जब ऊंचाई वाले इलाके से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आता है, तो संकरी नदी घाटियों में पानी की रफ्तार बेहद तेज हो सकती है।
इसके साथ मलबा, पेड़, पत्थर और अन्य सामग्री भी बहने लगती है। इससे पुल, सड़क और नदी किनारे बने मकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
भोटे कोशी क्षेत्र में भी ऐसी ही परिस्थितियों ने स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी की है।
प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर समर्थकों में चिंता
राकेश टिकैत के नेपाल में फंसे होने की खबर सामने आने के बाद उनके समर्थकों और किसान संगठनों से जुड़े लोगों में चिंता पैदा होना स्वाभाविक है।
हालांकि, टिकैत द्वारा स्वयं फोन पर सुरक्षित होने की जानकारी दिए जाने के बाद स्थिति को लेकर राहत मिली है।
उनके साथ मौजूद सभी सदस्यों के सुरक्षित होने की जानकारी भी महत्वपूर्ण है।
अब प्राथमिकता यह है कि मौसम और सड़क की स्थिति सामान्य होने तक प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित स्थान पर रहे।
किसान प्रतिनिधियों ने बदली यात्रा रणनीति
बाढ़ जैसी आपदा के दौरान किसी भी यात्रा दल के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा होती है।
राकेश टिकैत के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने भी इसी को ध्यान में रखते हुए अपने वाहनों को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का फैसला किया।
इसके बाद काठमांडू के रास्ते भारत लौटने की योजना बनाई गई है।
इससे साफ है कि प्रतिनिधिमंडल फिलहाल नेपाल में बने हालात को देखते हुए जोखिम लेकर आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित रास्ते का इंतजार कर रहा है।
28 अगस्त तक मुजफ्फरनगर लौटने की उम्मीद
राकेश टिकैत ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल के 28 अगस्त तक मुजफ्फरनगर लौटने की योजना है।
हालांकि, पहाड़ी क्षेत्र में बाढ़ और खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग की स्थिति लगातार बदल सकती है।
ऐसे में वापसी का वास्तविक समय स्थानीय प्रशासन और सड़क संपर्क की स्थिति पर निर्भर करेगा।
अजय ठाकुर समेत कई किसान प्रतिनिधिमंडल में शामिल
नेपाल दौरे पर गए नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में राकेश टिकैत के साथ अजय ठाकुर समेत अन्य किसान प्रतिनिधि शामिल हैं।
इन सभी के सुरक्षित होने की जानकारी दी गई है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और आगे की यात्रा परिस्थितियों के अनुसार तय की जा रही है।
नेपाल की बाढ़ ने एक बार फिर दिखाई हिमालयी क्षेत्र की चुनौती
भोटे कोशी नदी की बाढ़ ने नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली आपदाओं की गंभीरता को सामने ला दिया है।
ऐसी आपदाओं में कुछ ही समय के भीतर सामान्य परिस्थितियां पूरी तरह बदल सकती हैं। सड़कें बंद हो जाती हैं, पुल टूट सकते हैं और संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ वहां यात्रा कर रहे लोगों के लिए भी प्रशासनिक चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है।
मुजफ्फरनगर में परिवार और समर्थकों को राहत
राकेश टिकैत के सुरक्षित होने की जानकारी के बाद मुजफ्फरनगर में उनके परिवार, समर्थकों और किसान संगठन से जुड़े लोगों को राहत मिली है।
नेपाल में स्थिति सामान्य होने और सड़क संपर्क बहाल होने के बाद प्रतिनिधिमंडल के भारत लौटने की उम्मीद है।
फिलहाल राकेश टिकैत और उनके साथ मौजूद किसान प्रतिनिधियों की प्राथमिकता सुरक्षित स्थान पर रहना और मौसम तथा प्रशासन की स्थिति पर नजर बनाए रखना है।
राहत और बचाव के बीच जारी है वापसी का इंतजार
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। दूसरी ओर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान पर मौजूद भारतीय किसान प्रतिनिधिमंडल भी परिस्थितियां सामान्य होने का इंतजार कर रहा है।
राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया है कि वह और उनके साथी सुरक्षित हैं। अब काठमांडू के रास्ते भारत लौटने और 28 अगस्त तक मुजफ्फरनगर पहुंचने की योजना है।

