6 साल की Samaira Raghav पर गुजरात जायंट्स ने लगाया दांव, 10 लाख में WPL से जुड़ीं; अब टीम इंडिया की जर्सी है सपना
नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान पर बड़े सपने देखने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। दिल्ली की 16 वर्षीय युवा ऑलराउंडर Samaira Raghav ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर महिला प्रीमियर लीग (WPL) तक का सफर तय किया है। गुजरात जायंट्स ने WPL ऑक्शन में समायरा को 10 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया है। महज सात साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू करने वाली समायरा के लिए यह उपलब्धि उनके अब तक के सफर का एक बड़ा पड़ाव है। हालांकि, उनकी निगाहें इससे भी बड़े लक्ष्य पर हैं। वह अगले दो से तीन वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।
एथलेटिक्स से शुरू हुआ सफर, क्रिकेट ने बना ली जिंदगी की पहली पसंद
समायरा का खेलों से जुड़ाव बचपन से ही रहा है। क्रिकेट को करियर बनाने से पहले वह एथलेटिक्स से जुड़ी थीं और स्प्रिंटर के रूप में भी अभ्यास करती थीं। इसके अलावा उन्होंने स्केटिंग में भी हाथ आजमाया। समायरा के मुताबिक, बचपन में वह अलग-अलग खेलों को आजमाना चाहती थीं और उन्हें लगता था कि एक साथ कई खेलों में आगे बढ़ा जा सकता है।
उनके क्रिकेट सफर की शुरुआत भी कुछ अलग अंदाज में हुई। एक दिन उन्हें क्रिकेट अकादमी भेजा गया, जहां उस समय फील्डिंग का अभ्यास चल रहा था। वहां उन्हें क्रिकेट खेलने में काफी आनंद आया। इसके बाद उन्होंने अपनी इच्छा से अकादमी जाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे क्रिकेट के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया और उन्होंने इसी खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
पिता और मां का मिला साथ, छोटी बहन रही सबसे बड़ी हौसला-अफजाई करने वाली
समायरा अपनी इस यात्रा में परिवार के सहयोग को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि पिता ने हमेशा क्रिकेट खेलने के फैसले में उनका साथ दिया, जबकि मां ने भी हर कदम पर प्रोत्साहित किया। समायरा के लिए मां का साथ इसलिए भी खास रहा क्योंकि वह उनसे अपनी व्यक्तिगत और खेल से जुड़ी बातें खुलकर साझा कर पाती थीं।
हालांकि, समायरा अपनी छोटी बहन को अपना सबसे बड़ा समर्थक मानती हैं। उनके अनुसार, जब कभी मैदान पर प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता था, तब भी छोटी बहन का भरोसा उन पर बना रहता था। मुश्किल समय में मिलने वाला यही विश्वास उन्हें दोबारा मेहनत करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता रहा।
ऑक्शन में नाम आते ही खुशी से झूम उठीं समायरा
WPL ऑक्शन में गुजरात जायंट्स द्वारा 10 लाख रुपये में खरीदे जाने की खबर समायरा के लिए किसी यादगार पल से कम नहीं थी। उन्होंने बताया कि वह अपनी रूममेट के साथ होटल में बैठकर ऑक्शन देख रही थीं। उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उस दौरान उनका नाम भी सामने आएगा।
जैसे ही ऑक्शन में उनका नाम पुकारा गया और गुजरात जायंट्स ने उनके लिए बोली लगाई, वह और उनकी रूममेट खुशी से चिल्लाने लगीं। इसके बाद उनके कोच का फोन आया। समायरा के मुताबिक, यह खबर सुनकर उनके कोच भी भावुक हो गए थे। उनके लिए यह सिर्फ एक टीम में जगह मिलने की खुशी नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत और परिवार के सहयोग का सुखद परिणाम भी था।
गुजरात जायंट्स के कोच माइकल क्लिंगर से भी हुई मुलाकात
समायरा को गुजरात जायंट्स के कैंप में शामिल होने के लिए दो दिनों के लिए बेंगलुरु बुलाया गया था। वहां उनकी मुलाकात टीम के कोच माइकल क्लिंगर से हुई। समायरा ने बताया कि उन्हें महसूस हुआ कि उनकी बल्लेबाजी ने कोच को प्रभावित किया है। बातचीत के दौरान भी उन्हें लगा कि कोच उनके खेल से संतुष्ट हैं।
गुजरात जायंट्स के कोच माइकल क्लिंगर ने उनकी फिनिशिंग स्किल्स की तारीफ की थी। टी-20 क्रिकेट में मैच के अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाना और टीम को मजबूत स्थिति तक पहुंचाना बेहद अहम माना जाता है। समायरा की बल्लेबाजी में इस क्षमता को टीम के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
एश्ले गार्डनर को मानती हैं अपना आदर्श
गुजरात जायंट्स की टीम में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी मौजूद हैं। ऐसे में समायरा के लिए अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना सीखने का बड़ा अवसर होगा। उन्होंने बताया कि वह ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर एश्ले गार्डनर के साथ खेलने को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं और उन्हें अपना आदर्श मानती हैं।
इसके अलावा वह बेथ मूनी के साथ भी खेलने को लेकर उत्साहित हैं। समायरा बेथ मूनी को शानदार टी-20 बल्लेबाज मानती हैं। उनका कहना है कि टीम की सभी खिलाड़ियों से मिलने और उनके अनुभव से सीखने का उन्हें इंतजार है।
दिल्ली स्ट्राइकर्स के साथ जीता विमेंस दिल्ली प्रीमियर लीग का खिताब
WPL तक पहुंचने से पहले समायरा विमेंस दिल्ली प्रीमियर लीग में दिल्ली स्ट्राइकर्स की ओर से खेल चुकी हैं। इस प्रतियोगिता का अनुभव उनके लिए काफी अच्छा रहा। उनकी टीम चैंपियन बनी और खिलाड़ियों के बीच शानदार तालमेल के साथ मैदान पर सामूहिक प्रयास देखने को मिला। समायरा के अनुसार, टीम के सभी खिलाड़ियों ने मिलकर प्रदर्शन किया, जिसका सकारात्मक परिणाम खिताब के रूप में सामने आया।
दो-तीन साल में टीम इंडिया की जर्सी पहनना चाहती हैं समायरा
गुजरात जायंट्स के साथ WPL का सफर शुरू होने से समायरा के सामने अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर साबित करने का अवसर होगा। हालांकि, वह भविष्य को लेकर जल्दबाजी में कोई दावा नहीं करतीं। उनका मानना है कि अगले दो से तीन वर्षों में वह किस मुकाम पर पहुंचेंगी, यह उनके प्रदर्शन और निरंतर मेहनत पर निर्भर करेगा।
इसके बावजूद उनका सबसे बड़ा सपना स्पष्ट है—भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश के लिए खेलना। समायरा का कहना है कि देश का प्रतिनिधित्व करना हमेशा से उनका सपना रहा है। सात साल की उम्र में अकादमी के एक फील्डिंग सेशन से शुरू हुआ उनका क्रिकेट सफर अब WPL तक पहुंच चुका है। गुजरात जायंट्स के साथ मिलने वाला यह मौका उनके राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने के सपने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
सात साल की उम्र में क्रिकेट से जुड़ने वाली 16 वर्षीय समायरा राघव अब WPL में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं। गुजरात जायंट्स से मिला मौका उनके लिए नई शुरुआत है और उनकी सबसे बड़ी मंजिल भारतीय टीम की जर्सी पहनकर देश के लिए खेलना है।
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