उत्तर प्रदेश

Lucknow UP Cabinet Expansion: योगी मन्त्रिमण्डल का विस्तार, नए चेहरों को कार्य करने का मौका

Lucknow UP Cabinet Expansion:  यूपी में मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलों के बाद आज जाकर विराम लगा । आज का शपथ ग्रहण कार्यक्रम राजभवन के गांधी सभागार में आयोजित हुआ। जिसमें योगी सरकार के इन विधायक ने मंत्री पद के लिए शपथ ली।जितिन प्रसाद सन् 2001 में भारतीय युवा कांग्रेस में सचिव बने। सन् 2004 में अपने गृह लोकसभा सीट, शाहजहाँपुर से 14 वीं लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमायी ।

पहली बार जितिन प्रसाद सन् 2008 में केन्द्रीय राज्य इस्पात मंत्री नियुक्त किया गया।उसके बाद सन् 2009 में जितिन प्रसाद 15 वीं लोकसभा चुनाव लोकसभा धौरहरा से लड़े व 184,509 वोटों से विजयी भी हुए।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग , पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, मानव संसाधन एवं विकास आदि विभागों में यूपीए सरकार के समय केन्द्रीय राज्यमंत्री रहें हैं। जितिन प्रसाद शाहजहाँपुर ,लखीमपुर तथा सीतापुर में काफी लोकप्रिय नेता हैं। हालाँकि 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव में लखीमपुर खीरी की धौरहरा सीट से हारे। वही 2017 में विधान सभा चुनाव में शाहजहाँपुर की तिलहर विधान सभा से भी वह जीतने में काम नहीं हो सके।

आगरा के खंदौली के हाजीपुर खेड़ा निवासी धर्मवीर विधान परिषद सदस्य हैं। पर वह मूलरूप से हाथरस जिले के बहरदोई के रहने वाले हैं। वह माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। प्रजापति भाजपा में महत्वपूर्ण दायित्व संभाल चुके हैं। धर्मवीर प्रजापति ने आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में समाज के लिए सेवा के कार्य आरंभ किए। इसके बाद उन्होंने भाजपा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2002 मे पहली बार उन्हें प्रदेश का दायित्व मिला।

तत्कालीन पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ में वह प्रदेश के महामंत्री बने। इसके बाद दो बार प्रदेश संगठन में मंत्री का दायित्व संभाला। जनवरी, 2019 में उन्हें माटी कला बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। अयोध्या में श्रीराम के दीपोत्सव कार्यक्रम के लिए उन्होंने आगरा, एटा, कन्नौज सहित दूसरे जिलों से डिजाइनर दिए की व्यवस्था कराई थी। इसे लेकर वह ख़ूब चर्चा में रहे।

वह हस्तिनापुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं।44 वर्षीय दिनेश खटीक मवाना थाना क्षेत्र के कस्बा फलावदा के रहने वाले हैं। दिनेश ने 2017 में पहली बार भाजपा के टिकट हस्तिनापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। बसपा प्रत्याशी योगेश वर्मा को पराजित कर जीत हासिल की। दिनेश खटीक आरएसएस कार्यकर्ता हैं ।

से ही भाजपा में रहे हैं। इनके पिता भी संघ के कार्यकर्ता रहे हैं। दिनेश के भाई नितिन खटीक जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। दिनेश खटीक का फलावदा में ईंट भट्टे का व्यवसाय है। फिलहाल वह मेरठ के गंगानगर में रहते हैं।विधायक का दावा है कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों में हस्तिनापुर विधानसभा में 442 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को धरातल पर उतारा है।

गाजीपुर सदर से भाजपा विधायक डॉ संगीता बिंद बलवंत छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हैं।वह ओबीसी की ज़मीनी नेता हैं।संगीता बलवंत का जन्म गाजीपुर शहर में ही हुआ। उनके पिता स्व. रामसूरत बिंद रिटायर्ड पोस्टमैन थे। संगीता पीजी कॉलेज, गाजीपुर छात्रसंघ की उपाध्यक्ष भी रही हैं। वह पहले जमानियां क्षेत्र से निर्दल जिला पंचायत सदस्य थीं। संगीता बलवंत ने जमानियां कस्बा निवासी होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ.अवधेश से शादी की है।

अपने क्षेत्र में वह काफी लोकप्रिय भी हैं। संगीता बलवंत के राजनीतिक करियर की शुरुआत बसपा के साथ हुई थी। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन्हें भाजपा में शामिल कराया। कहा जाता है कि मनोज सिन्हा के प्रयासों के कारण संगीता को 2017 विधानसभा चुनाव में सदर से टिकट मिला था।

उन्हें नेशनल वीमेन वेलफेयर दिल्ली में प्रदेश के प्रतिनिधित्व करने का उन्हें मौका मिला था। बाद में उन्हें महिला आयोग समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 20 फरवरी, 2020 को दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें आदर्श युवा विधायक सम्मान से सम्मानित किया गया। इस वर्ष यह सम्मान पाने वाली डॉ. संगीता प्रदेश में इकलौती विधायक थीं।

आरएसएस से नजदीकी और जातीय समीकरणों ने संजय को शिखर पर पहुँचाया। 2017 के विधानसभा चुनाव में ऐन वक्त पर की भाजपा में इनकी इंट्री हुई थी। वह सपा में थे। आदिवासी समुदाय में उनकी खासी पहचान है। डाला में आरएसएस से जुड़े खन्ना कैंप के बगल में निवास होने के कारण पिछले कई वर्ष से उनकी नजदीकियां आरएसएस के लोगों से भी थी। जब अचानक से ओबरा विधानसभा सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने का एलान चुनाव आयोग की तरफ से हुआ। तब आनन-फानन में फाइनल किए गए टिकट में आरएसएस के लोगों से बनी नजदीकी का फायदा उठाते हुए संजय गोंड़ ने विधायक के टिकट की बाजी मार ली। इससे पहले 2012 में हुए चुनाव में ओबरा विधानसभा सीट पर बसपा ने ही जीत दर्ज की थी। यहां से सपा ने भी गोंड़ बिरादरी के डा. रवि गोंड़ बड़कू को प्रत्याशी बनाया था। सपा की हार हुई। बता दें कि जिले में दुद्धी और ओबरा विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। प्रदेश में यही दोनों विधानसभा सीट है जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। संजय इस समाज के बड़े नेता हैं।

शून्य से शिखर तक पहुंचे बलरामपुर सदर क्षेत्र से भाजपा विधायक पल्टूराम ने इसे साबित कर दिया है। अति गरीब दलित परिवार में पले बढ़े पल्टूराम ने अपनी मेहनत और जनसेवा के माध्यम से राजनीति का उच्च मुकाम हासिल किया है। सियासी रसूख से दूर रह कर रात दिन जनसेवा के काम में लगे भाजपा विधायक पल्टूराम राजनीतिक रसूख के दौर में भी सादगी का शानदार उदाहरण हैं।

20 साल से उनकी जीत का सिलसिला जारी है।गोंडा जिला मुख्यालय से सटे परेड सरकार गांव के अत्यंत गरीब किसान परिवार में जन्में विधायक पल्टूराम वर्ष 2000 में पहली बार भदुआ तरहर क्षेत्र से सदस्य और गोंडा जिला पंचायत के उपाध्यक्ष चुने गए। साल 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद जब महिला के लिए आरक्षित हुआ तो इसी क्षेत्र से चुनाव जीतकर उनकी पत्नी ज्ञानमती जिला पंचायत की अध्यक्ष बनीं। साल 2007 के विधान सभा चुनाव में बसपा ने उन्हें मनकापुर सुरक्षित सीट से लड़ाया ।किन्तु वे मात्र 4622 मतों से हार गए। वर्ष 2010 में पल्टूराम की पत्नी ने भदुआ तरहर क्षेत्र से पुनः जीत दर्ज की। इसके बाद साल 2015 में उन्होंने क्षेत्र बदलकर गिर्द गोंडा क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता। पार्टी के प्रति निष्ठा एवं समर्पण को देखते हुए वर्ष 2017 में उन्हें भाजपा ने पड़ोसी जिले बलरामपुर सदर सुरक्षित सीट से प्रत्याशी बनाया , तो वहां भी भारी मतों से जीत गए। चुनाव में उन्होंने सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी शिवलाल को 25 हजार मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज करायी। लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय से परास्नातक तक शिक्षित पल्टूराम की छवि एक ईमानदार विधायक के रूप में है । वे गोंडा-बलरामपुर की जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

छात्र राजनीति से अपने जीवन का राजनैतिक सफर शुरू करने वाले पलटू राम गोंडा नगर के सिविल लाइन क्षेत्र के रघुकुल नगर में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पत्नी, दो पुत्र व एक पुत्री के साथ रहते हैं। बलरामपुर सदर के भाजपा विधायक पल्टूराम कहते हैं कि मेरे पास रसूख के लिए जनता जनार्दन के अलावा कुछ नहीं है। वह अपनी घर की बागवानी की देखरेख स्वयं करते हैं। घरेलू कामों को भी निपटाते हैं। लोक कल्याण के लिए परिसर में बने मंदिर में सुबह पूजा प्रार्थना भी करते हैं। कोरोना काल में सब्जी के पौधों को पानी और देखरेख करते हुए विधायक की तस्वीर खूब वायरल हुई थी, जिसे देखकर खेती-किसानी से जुड़े लोगों ने खूब वाह-वाही की थी। विवादों से सदैव दूर रहने वाले विधायक पल्टूराम के साथ वाहनों का कोई काफिला नहीं चलता और न ही सुरक्षा गार्डों की फौज होती है। इसलिए कोई अदना सा आदमी भी उनसे बेरोकटोक मिल सकता है।

कार्यशैली से राजनीतिक क्षेत्र में लोकप्रियता का लोहा मनवाने वाले विधायक पल्टूराम ने 90 के दशक से देवी पाटन मंडल में सर्वाधिक लोकप्रिय नेता सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भी आर्शीवाद देने पर विवश कर दिया। पहली बार जिला पंचायत सदस्य के पद पर विजई होने के बाद जब सांसद ने इस युवा नेता की प्रतिभा देखा तो तमाम विरोध के बावजूद जिला पंचायत उपाध्यक्ष की कुर्सी तक पहंचा दिया। इसके बाद पल्टूराम उनके अति विश्वसनीय होकर राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते गए। आज भी बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रिय माने जाते हैं।

बरेली जिले की बहेड़ी से भाजपा विधायक छत्रपाल गंगवार को 2002 में भाजपा से पहली बार टिकट मिला ।.लेकिन वह सपा के मंज़ूर अहमद से हार गए थे। छत्रपाल ने 2007 के चुनाव में सपा के अताउर्रहमान को मात्र 18 वोटों से हराया था। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी नसीम अहमद को हराकर वह दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। छत्रपाल गंगवार को सरकार में शामिल करने से फैसले से कुर्मी वोट बैंक पर भाजपा की पकड़ मजबूत होगी। इसे पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की राजनीतिक भरपाई के रूप में देखा जा रहा है।

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