ईशा की नमाज के बाद हुसैन डे कार्यक्रम गुरुवार की सुबह ५ बजे तक चला
बुढ़ाना। बीती बुधवार की देर रात ईशा की नमाज के बाद शुरू हुआ हुसैन डे कार्यक्रम आज गुरुवार की सुबह ५ बजे तक चला। जिसमें शायरों ने हुसैन की याद में शायरी कर जहां सभी श्रोताओं की वाहवाही लूटी वहीं वक्ताओं ने वसीम रिजवी पर लानत भेजी।
बुढ़ाना के करबला ए हिंद में हुए हुसैन डे पर शायर चांद फैजी सांखनवी ने पढ़ा कि अली का काबा, अली की जन्नत, अली हमारा, तुम्हारा क्या है, वली खुदा का, वसी नबी का, हमारा मौला, तुम्हारा क्या है।
शायर मोहसीन औरंगाबादी ने पढ़ा कि जब तक रहा जहान में अब्बास ए बावफा, कुरआन जख्म ख़ाके जमीं पर गिरा नहीं। शायर मासूम अमरोहावी ने पढ़ा कि जिसकी सदियों से हुकुमत है दिले इंसां पे, बाखुदा ऐसे शहंशाह ए जमां हैं शब्बीर सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। ईरान से आये मौलाना कौसेन अली रहीम ने तिलावते कुरआन ए पाक और हदीस ए किसा पढ़ी।
उन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की जीवनी पर प्रकाश डाला और उनकी कुर्बानी के बारे में विस्तार से बताया। यहां पर उन्होंने कुरआन ए पाक से आयत हटाने की बात करने वाले वसीम रिजवी पर लानत भेजी और कहा कि ऐसे लोग भारतीय समाज के लिए खतरा हैं।
ऐसे लोगों से बचें और बहिष्कार करें। यहां पर शायर इजहार आलम बुढ़ानवी, शाद बुढ़ानवी, जफर बुढानवी, अंजुम जाफरी, आसिफ रजा, तहसीन रजा, शाने अब्बास जाफरी, मुश्ब्बिर बुढानवी ने भी हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में शायरी पढ़ी और मौलाना गुलाम हैदर मुरादाबादी और मौलाना इजहार सहारनपुरी आदि ने वसीम रिजवी के खिलाफ बयान किया।
इस दौरान मेंबर कम्यूनिकेशन आईटी मिनिस्ट्री गर्वमेंट आफ इंडिया डाक्टर दिलशाद हुसैन जाफरी, कादिर, अब्दुल गफ्फार, हाजी शराफ़त, बबलू, फ़ैज़, तोसीफ राही व आसिफ रजा आदि मौजूद थे।
इस कार्यक्रम का आयोजन न्याय मंच के वाइस चेयरमैन साजिद जाफरी और संचालन शायर तारिक उस्मानी और अंजुम जाफरी द्वारा संयुक्त रूप से किया।

