किसान भाई फसल अवशेषों को जलाने के बजाय प्रबंधन करेंः जिलाधिकारी
मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर सेल्वा कुमारी जे. ने आज कलेक्ट्रेट सभागार में फसल अवशेषों को जलाने से खेती/मृदा/पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने तथा फसल अवशेष प्रबन्धन के बारे में प्रेस वार्ता कर विस्तार से चर्चा की। जिलाधिकारी ने इस प्रेस वार्ता में यह अपील की
कि कुछ किसान भाई प्रायः अज्ञानतावश गन्ने की सूखी पत्तियों और धान की पराली को खेत मे ही जला देते है जिस कारण न केवल मृदा का जीवांश पदार्थ जलकर नष्ट हो जाता है बल्कि इसी के साथ ही साथ मृदा का तापमान अत्यधिक बढ जाने के कारण मृृदा मे उपलब्ध मित्र जीवाणू और फफूंद जैसे एजोटोबैक्टर, अजोस्पिरिलम, ट्राय कोडरमा तथा केंचुआ आदि की मृत्यू हो जाती है। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि यदि किसान भाई गन्ने की सूखी पत्तियों और धान की पराली को खेत मे आधुनिक कृषि यन्त्रों जैसे टैऊश मल्चर, एम.बी.प्लाऊ, हैरो और कल्टीवेटर की सहायता से काटकर खेत में ही (इन-सीटू) मिला दें तो जहां इससे एक ओर मृदा का जीवांश पदार्थ बढेगा वही दूसरी ओर फसल अवशेषों को जलाने से होने वाली पर्यावरणीय क्षति भी नही होगी। फसन अवशेषों के प्रबन्धन से मृदा के मित्र कीट, जीवाणू, फफूंद, केचुए आदि भी नही मरेंगे। मृदा की जल धारण शक्ति बढेगी और खरपतवार भी कम होंगे।
जिलाधिकारी ने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से एक एकड खेत से लगभग ४०० किलोग्राम जीवांष नष्ट हो जाता है वहीं यदि किसान भाई इसका खेत मे ही प्रबन्धन कर दे ंतो लगातार दो वर्षाे मे लगभग ०.२ से ०.३ प्रतिषत तक जीवांश की मात्रा बढ जायेगी। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद के प्रत्येक न्याय पंचायत मे कस्टम हायरिंग सिस्टम की स्थापना कृषि विभाग की ओर से कराई गई है जहां ट्रेश मल्चर सहित अन्य सभी उपयोगी कृषि यंत्र उपलब्ध है
किसान भाई सम्पर्क कर इन कृषि यंत्रों को किराए पर लेकर अपने फसल अवशेषों का प्रबन्धन कर सकते है। जनपद मे कुल २४५ कस्टम हायरिंग सिस्टम स्थापित है।
जनपद की सभी गन्ना समितियों और प्रत्येक विकास खंड के दो-दो किसान सेवा/साधन सहकारी समितियों पर भी उक्त कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करायी जा रही है।
जिलाधिकारी ने बताया कि फसल अवशेष प्रबन्धन से जनपद के किसानो को जागरूक करने के लिए अगले दस दिनों के अंदर प्रत्येक ग्राम पंचायत में फसल अवशेष के प्रबन्धन का लाइव डेमो कराया जायेगा। किसान भाई अपने फसल अवशेष का प्रबन्धन कर मृदा की उर्वरा शक्ति बढाएं और जलाने से पर्यावरण को होने वाली क्षति से बचाकर राष्ट्र निर्माण मे अपना सहयोग दें।
जिलाधिकारी ने बताया कि फसल अवशेषों को जलाकर पर्यावरण की क्षति करने वाले किसानों से पर्यावरणीय क्षति अर्थदण्ड वसूले जाने की विधिक व्यवस्था है, जिसके अन्तर्गत प्रति घटना पर दो एकड से कम भूमि वाले किसानो से रूपये १५००, दो से पांच एकड भूमि वाले किसानो से रूपये ५००० तथा पांच एकड से ऊपर भूमि वाले किसानो से रूपये १५००० की वसूली की जाएगी।
