Hathras में छह करोड़ के रेलवे ओवरब्रिज की खुली पोल! दो महीने में सड़क पर बड़े गड्ढे, एक माह से बंद रास्ता और सुस्त मरम्मत से हजारों लोग परेशान
News-Desk
11 min read
Hathra, Hathras News, Hathras railway overbridge, Izzatnagar Division, railway construction quality, railway crossing, railway overbridge potholes, ROB repair, Sasni Jalesar Road, service road, traffic jamHathras। सासनी-जलेसर मार्ग पर करीब छह करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) शुरू होने के महज दो महीने के भीतर ही सवालों के घेरे में आ गया है। जिस ओवरब्रिज से लोगों को वर्षों पुरानी रेलवे फाटक की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद थी, उसकी सड़क पर कुछ ही समय में बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए।
सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद रेलवे प्रशासन ने मरम्मत कराने के लिए करीब एक माह पहले ओवरब्रिज पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि रास्ता बंद करने के बावजूद मरम्मत का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। नतीजा यह है कि सासनी से जलेसर, एटा और आगरा की ओर रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को अब वैकल्पिक रास्ते पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ओवरब्रिज बंद होने के बाद यातायात को पुल के नीचे बने संकरा और कच्चा सर्विस रोड की ओर मोड़ दिया गया है। इस रास्ते पर जाम, धूल, फिसलन और दुर्घटना का खतरा लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
दो महीने में ही सड़क पर उभर आए बड़े-बड़े गड्ढे
नवनिर्मित हाथरस रेलवे ओवरब्रिज को लेकर लोगों को उम्मीद थी कि इसके शुरू होने से रेलवे फाटक पर रुकने की समस्या खत्म होगी और सासनी से जलेसर की ओर आवागमन आसान होगा। लेकिन ओवरब्रिज शुरू होने के करीब दो महीने बाद ही इसकी सड़क पर बड़े गड्ढे दिखाई देने लगे।
स्थानीय लोगों ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने मरम्मत के लिए ओवरब्रिज पर यातायात बंद कर दिया।
लोगों का कहना है कि जिस सड़क को लंबे समय तक वाहनों का दबाव झेलने के लिए बनाया गया था, वह इतने कम समय में खराब हो गई। इससे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े किसी भी निष्कर्ष के लिए तकनीकी जांच जरूरी होगी। फिलहाल स्थानीय स्तर पर सड़क की हालत और कम समय में गड्ढे उभरने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक महीने से बंद है ओवरब्रिज, लेकिन मरम्मत की रफ्तार धीमी
ओवरब्रिज पर वाहनों की आवाजाही करीब एक महीने से बंद है। लोगों को उम्मीद थी कि रास्ता बंद होने के बाद तेजी से मरम्मत पूरी की जाएगी और जल्द ही पुल को दोबारा खोल दिया जाएगा।
लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक मरम्मत कार्य की गति काफी धीमी है। इसी कारण ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ वाली स्थिति बनी हुई है।
रास्ता बंद होने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो रोजाना सासनी से जलेसर, एटा और आगरा की ओर आते-जाते हैं। दैनिक यात्रियों, छोटे-बड़े वाहन चालकों और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
पुल के नीचे संकरा सर्विस रोड बना परेशानी की वजह
ओवरब्रिज बंद किए जाने के बाद यातायात को पुल के नीचे बने सर्विस रोड से गुजारा जा रहा है। लेकिन यह रास्ता इतना संकरा बताया जा रहा है कि दो भारी वाहन एक साथ आसानी से नहीं निकल पाते।
जब सामने से दो वाहन आ जाते हैं तो दोनों तरफ यातायात रुक जाता है। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
खासकर ट्रक, डंपर और अन्य भारी वाहनों के गुजरने के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक रोजाना इस मार्ग पर जाम की स्थिति बन रही है।
भीषण जाम से रोजाना जूझ रहे वाहन चालक
वैकल्पिक मार्ग की कम चौड़ाई के कारण यातायात का दबाव संभालना मुश्किल हो रहा है। सामान्य दिनों में भी वाहन चालकों को धीमी गति से निकलना पड़ता है, जबकि दो भारी वाहनों के आमने-सामने आ जाने पर रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है।
इससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग रहा है। जिन लोगों को रोजाना इस रास्ते से गुजरना पड़ता है, उनके लिए समस्या और गंभीर हो गई है।
रेलवे फाटक बंद होते ही 20 से 30 मिनट का इंतजार
सर्विस रोड की समस्या उस समय और बढ़ जाती है जब रेलवे ट्रैक से मालगाड़ी या एक्सप्रेस ट्रेन गुजरती है। ट्रेन के आने से पहले फाटक बंद कर दिया जाता है और दोनों ओर वाहनों की कतार लग जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फाटक खुलने के बाद भी जाम तुरंत खत्म नहीं होता। यातायात को सामान्य होने में करीब 20 से 30 मिनट तक का समय लग जाता है।
जिस समस्या को आरओबी बनने के बाद खत्म होने की उम्मीद थी, ओवरब्रिज बंद होने के कारण लोगों को फिर उसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
धूल के गुबार में बदल जाता है रास्ता
सर्विस रोड की सबसे बड़ी समस्याओं में धूल भी शामिल है। रास्ता कच्चा होने के कारण भारी वाहन जब यहां से गुजरते हैं तो सड़क से धूल का गुबार उठता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार धूल इतनी अधिक होती है कि कुछ समय के लिए आगे का रास्ता ठीक से दिखाई नहीं देता। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को इससे काफी परेशानी होती है।
धूल के कारण दृश्यता कम होने से सड़क पर दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। दोपहिया वाहन चालक असंतुलित होकर गिरने की शिकायत कर रहे हैं।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए बढ़ा खतरा
कच्चे और धूल भरे रास्ते पर दोपहिया वाहन चलाना आसान नहीं है। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क की स्थिति लगातार खराब रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दोपहिया वाहन चालक रास्ते पर फिसलकर गिर चुके हैं। अगर इसी तरह की स्थिति बनी रही तो किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
खासकर जब सामने से भारी वाहन गुजर रहा हो और धूल का गुबार उठ रहा हो, तब दोपहिया वाहन चालक के लिए रास्ते का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
जाम से बचने के लिए गांवों के कच्चे रास्तों का सहारा
मुख्य रास्ते पर लगने वाले जाम और धूल से बचने के लिए स्थानीय लोग आसपास के गांवों के संपर्क मार्गों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
लेकिन ये रास्ते भी पूरी तरह सुरक्षित या सुविधाजनक नहीं हैं। कई रास्ते उबड़-खाबड़ और कच्चे हैं। बारिश या अधिक वाहन दबाव की स्थिति में वहां वाहन फंसने की समस्या भी सामने आती है।
लोगों का कहना है कि पांच से छह किलोमीटर अतिरिक्त घूमकर गांव के रास्तों से जाने पर भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। समय अधिक लगता है और रास्ते की स्थिति के कारण जोखिम बना रहता है।
स्थानीय निवासी बोले- उम्मीद थी फाटक की समस्या खत्म होगी
सासनी से जलेसर तक नियमित आवागमन करने वाले चंदपाल सिंह, निवासी नगला मया ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि जब ओवरब्रिज शुरू हुआ तो उन्हें लगा था कि वर्षों से चली आ रही रेलवे फाटक की समस्या खत्म हो जाएगी।
लेकिन उनके अनुसार करीब दो महीने में ही सड़क पर गड्ढे उभर आए। शिकायत के बाद मरम्मत के लिए रास्ता बंद कर दिया गया, जिससे समस्या और बढ़ गई।
चंदपाल सिंह का कहना है कि अब ट्रेन आने पर लोगों को सर्विस रोड पर धूल के बीच इंतजार करना पड़ता है। उनका आरोप है कि अगर सड़क की मरम्मत पहले ही ठीक ढंग से कर दी जाती तो लोगों को इतनी परेशानी नहीं होती।
कच्चे रास्ते पर सांस लेना मुश्किल: मनोज कुमार
मान महौ निवासी मनोज कुमार ने सर्विस रोड की स्थिति पर चिंता जताई। उनका कहना है कि पुल के नीचे बनाया गया सर्विस रोड पूरी तरह कच्चा और बदहाल है।
उनके अनुसार जब ट्रक और डंपर यहां से गुजरते हैं तो भारी मात्रा में धूल उड़ती है। धूल का गुबार इतना ज्यादा होता है कि कुछ समय के लिए सामने का रास्ता तक दिखाई नहीं देता।
मनोज कुमार के मुताबिक दोपहिया वाहन चालक इस रास्ते पर फिसलकर गिर रहे हैं। उनका कहना है कि ओवरब्रिज की मरम्मत का काम एक माह से चल रहा है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
पिलर के कारण रास्ता और हुआ संकरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरब्रिज के पिलर बनने के बाद पुल के नीचे फाटक के पास पहले की तुलना में रास्ता काफी संकरा हो गया है।
बड़े वाहनों और कारों के गुजरने के दौरान जाम की स्थिति बन सकती है। कई बार वाहन लंबे समय तक फंस जाते हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि जरूरी काम होने पर कई लोगों को पांच से छह किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर गांव के संपर्क मार्गों से जाना पड़ रहा है। हालांकि इन वैकल्पिक रास्तों पर भी सड़क की स्थिति अच्छी नहीं है।
रेलवे अधिकारियों को समस्या की जानकारी नहीं?
मामले में रेलवे के इज्जतनगर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी सफदर हुसैन का कहना है कि यह समस्या फिलहाल उनकी जानकारी में नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी कराकर जल्द से जल्द निस्तारण की कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बने आरओबी की सड़क दो महीने में ही खराब कैसे हुई और मरम्मत शुरू होने के करीब एक महीने बाद भी यातायात कब तक बहाल हो पाएगा।
स्थानीय लोग चाहते हैं कि मरम्मत का काम तेजी से और तकनीकी मानकों के अनुसार पूरा किया जाए, ताकि उन्हें लंबे समय तक इस वैकल्पिक मार्ग की परेशानी न झेलनी पड़े।
हजारों दैनिक यात्रियों पर पड़ रहा सीधा असर
सासनी-जलेसर मार्ग केवल स्थानीय आवागमन का रास्ता नहीं है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग जलेसर, एटा और आगरा की ओर आते-जाते हैं।
दैनिक यात्रियों के लिए रास्ते का बंद होना अतिरिक्त समय और परेशानी का कारण बन रहा है। व्यापारिक और निजी वाहनों के साथ स्कूल, नौकरी और अन्य जरूरी काम से जाने वाले लोगों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
एक ओर ओवरब्रिज की मरम्मत के कारण मुख्य रास्ता बंद है और दूसरी ओर सर्विस रोड की कम चौड़ाई तथा खराब हालत यातायात को प्रभावित कर रही है।
छह करोड़ की परियोजना से अब लोगों को क्या उम्मीद?
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि हाथरस रेलवे ओवरब्रिज की मरम्मत जल्द पूरी हो और पुल को सुरक्षित घोषित करने के बाद ही यातायात के लिए खोला जाए।
सिर्फ गड्ढों को भर देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। क्योंकि ओवरब्रिज के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं, इसलिए लोगों की नजर इस बात पर भी है कि मरम्मत किस तकनीकी तरीके से की जाती है और भविष्य में सड़क दोबारा इतनी जल्दी खराब न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
जब तक ओवरब्रिज दोबारा नहीं खुलता, तब तक सर्विस रोड की चौड़ाई, धूल, जाम और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी है।
अब निगाह रेलवे की अगली कार्रवाई पर
फिलहाल रेलवे की ओर से समस्या की जानकारी लेकर जल्द निस्तारण की बात कही गई है। ऐसे में स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अधिकारियों की ओर से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
आरओबी की सड़क की खराब हालत, मरम्मत में लग रहा समय और सर्विस रोड की स्थिति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। यदि मरम्मत जल्द पूरी नहीं हुई तो हजारों दैनिक यात्रियों को इसी तरह जाम और धूल के बीच सफर करना पड़ सकता है।

