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Indian Air Force ने नए मल्टी रोल फाइटर एयरक्रफ्ट की ख़रीद की प्रक्रिया Make in India के तहत तेज

Indian Air Force के लिए सैंगशन फाइटर स्ट्रैथ है 42 लेकिन फ़िलहाल हमारे पास सिर्फ 31 फाइटर स्‍क्‍वाडर्न है; और अगर नए विमान नहीं आए तो 2035 तक ये और कम हो जाएगी. अगर चीन की वायुसेना की ताक़त पर नज़र डालें तो चीन ने अपने सभी पुराने फाइटर एयरक्रफ्ट को 4.5 से 5वीं पीढ़ी के विमानों से बदलना शुरू कर दिया है.

पिछले साल ही अमेरिकी मिनिस्ट्री ऑफ डिफ़ेंस की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि चीनी वायुसेना के पास 2250 विमान है जिनमें 1800 फाइटर एयरक्रफ्ट हैं और जिनमें 800 से ज़्यादा चौथी श्रेणी के हैं और अब तो पाँचवीं श्रेणी के विमान J-20 को भी अपनी Indian Air Force में शामिल कर चुका है, लेकिन कितने J-20 शामिल किए गए हैं. इस पर कोई सटीक आंकड़ा नहीं है.

पश्चिमी मीडिया में छपी कई रिपोर्ट के मुताबिक़ 100 ज्यादा J-20 एयरक्रफ्ट चीन की Indian Air Force में शामिल किए जा चुके हैं. पिछले साल से ही चीन ने इसके प्रोडक्शन को तेज किया. हर साल तक़रीबन 125 J-20 और FC-31 का प्रोडक्शन करने का लक्ष्य है. यानी 2025 तक 500 के क़रीब 5वीं श्रेणी के फ़ाइटर चीन के पास होंगे. FC-31 कैरियर बेस्ड पांचवीं श्रेणी का फाइटर एयरक्रफ्ट है.

Indian Air Force ने नए मल्टी रोल फाइटर एयरक्रफ्ट की ख़रीद की प्रक्रिया तेज कर दी है. रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से पहले ही RFI यानि रिक्वेस्ट फ़ॉर इंफ़ॉरमेशन जारी किया था और अब रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से अगले 3-4 महीने में AON भी जारी किया जा सकता है एक्सेपटंस ऑफ नेनेसिटी किसी भी सैन्य ख़रीद प्रक्रिया का दूसरा चरण है. इस 114 MRFA की रेस में रूस की सुखोई 35 और मिग 29 , फ़्रांस का रफाल, अमेरिका के F-16, F-18, स्वीडन की ग्रिपेन और यूरोप का युरोफाइटर टाइफ़ून शामिल है लेकिन ये खरीद Make in India के तहत किया जाएगा. यानी की कोई भी एयरक्रफ्ट चुना जाता है तो उसका निर्माण भारत में ही होगा. AON जारी होने के बाद पहला एयरक्रफ्ट को आने में 7 से 10 साल का वक्त लग सकता है.

लगातार कम होते फाइटर स्‍क्‍वाडर्न की कमी को पूरा करने के लिए स्वदेशी फाइटर तेजस को Indian Air Force में शामिल किया जा रहा है. जिसमें LCA तेजस अलग- अलग वेरियंट के कुल 123 एयरक्रफ्ट लेने हैं जिसमें LCA तेजस के 40 विमान आ चुके हैं, जबकि 83 LCA Mk 1 A फाइटर एयरक्राफ़्ट की डिलीवरी अगले साल जनवरी से आने शुरू हो जाएंंगे. तेजस Mk1 हर साल 6-7 एयरक्रफ्ट वायुसेना के मिलेंगे. इसके अलावा 36 राफ़ेल के आने से 2 स्क्वाडर्न की कमी भले ही पूरी हो गई हो. लेकिन अभी भी काफ़ी लंबा सफ़र तय करना बाकी है.

फिलहाल मिग के अलग- अलग वेरियंट जिसमें मिग 21 बिज , मिग 21 टाइप 96 और मिग 27 पहले ही फेज आउट हो गए हैं. बाक़ी बचे मिग 21 बाइसन के 3 स्‍क्‍वाडर्न 2025 तक पूरी तरह से फेजआउट हो जाएंगे और मिग 29 भी 2030 से फ़ैज़ आउट होना शुरू हो जाएगें. साथ ही जैगुआर 3 में से पहला स्क्वडर्न और मिराज 2000 के 3 स्‍क्‍वाडर्न भी फेज आउट होना शुरू हो जाएगा. जैगुआर के 6 स्‍क्‍वाडर्न भी फ़ैज आउट के लिए तैयार हो जाएगे. माना जाए साल 2035 तक कुल 12 स्‍क्‍वाडर्न फेजआउट हो जाएंगे.

Indian Air Force  5th जेनेरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट लिए डीआरडीओ के साथ मिलकर काम कर रही है .. AMCA प्रोजेक्ट भी सरकार की मंज़ूरी के लिए पूरी तरह से तैयार है इसके अलावा डीआरडीओ के ADA यानी एयरोनाटिक्ल डिज़ाइन एजेंसी और LCA Mk 2 पर भी तेज़ी से काम कर रहे हैं. (From Internet)

News-Desk

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