Muzaffarnagar में महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा का ऐलान: क्षत्रिय महासभा की विचार गोष्ठी में गूंजा राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का संकल्प
Shyama Charan Panwar
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cultural events, Kshatriya Mahasabha, maharana pratap, Muzaffarnagar News, National Pride, Rajput Samaj, Statue Announcement, uttar pradesh newsMaharana Pratap statue Muzaffarnagar को लेकर जनपद में ऐतिहासिक और भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के आह्वान पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक श्रद्धांजलि एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के भीतर राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाला क्षण बन गया। सभागार में गूंजते “जय महाराणा प्रताप” के नारों के बीच उपस्थित जनसमूह ने यह स्पष्ट कर दिया कि महाराणा प्रताप का व्यक्तित्व आज भी हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
🔴 श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसमर्थन, दिखी सामाजिक एकता
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी एवं विचारक डॉ. लाखन सिंह जी ने की। मंच पर समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामयी स्वरूप प्रदान किया। युवा, वरिष्ठ, अधिवक्ता, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी—सभी ने एक मंच पर आकर महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके अडिग समर्पण को स्मरण किया।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि वे भारत की आत्मा, स्वतंत्रता की भावना और आत्मसम्मान के प्रतीक थे। उनके संघर्षों ने यह सिखाया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, राष्ट्र और धर्म के प्रति निष्ठा कभी कमजोर नहीं होनी चाहिए।
🔴 ऐतिहासिक प्रस्ताव: मुजफ्फरनगर में भव्य प्रतिमा की स्थापना
कार्यक्रम का सबसे अहम और भावनात्मक क्षण तब आया, जब सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि जनपद मुजफ्फरनगर के नगर क्षेत्र में किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह निर्णय न केवल स्थानीय समाज के लिए गौरव का विषय बना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी प्रेरणा चिन्ह बनने की दिशा में एक मजबूत कदम माना गया।
सभा में मौजूद सभी बुद्धिजीवियों और समाज के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वर्ष 2026 की 9 मई से पूर्व इस पुण्य कार्य को हर हाल में पूरा किया जाएगा। इस संकल्प के साथ यह भी कहा गया कि जिस तरह भामाशाह जी ने अपने सर्वस्व से महाराणा प्रताप का साथ दिया था, उसी भावना के साथ समाज के लोग तन, मन और धन से इस अभियान में सहयोग करेंगे।
🔴 विचार गोष्ठी में गूंजे इतिहास के स्वर्णिम पन्ने
वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। हल्दीघाटी का युद्ध, जंगलों में संघर्ष, घास की रोटियां खाकर भी आत्मसम्मान से समझौता न करने की कथा—हर प्रसंग ने श्रोताओं की आंखों में गर्व और संवेदना दोनों को जीवंत कर दिया।
कहा गया कि महाराणा प्रताप का जीवन हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र की स्वतंत्रता केवल तलवार से नहीं, बल्कि चरित्र, त्याग और संकल्प से सुरक्षित होती है। उनकी प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की संरचना नहीं होगी, बल्कि यह उस विचारधारा का प्रतीक बनेगी, जो समाज को एकजुट और मजबूत बनाती है।
🔴 प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे अनूप सिंह राठी (एडवोकेट), संजय मिश्रा, सुनील तायल, तरुण मित्तल, भूपेंद्र गोयल और हर्षद राठी। इनके साथ-साथ अधिवक्ता अग्रिश राणा जी, अधिवक्ता अशोक कुशवाहा जी, अधिवक्ता संदीप पुंडीर जी, हरेंद्र राणा जी, संजीव राणा जी, दिनेश पंडित जी, मुकेश पुंडीर आर्य जी, समर ठाकुर जी, अमित पुंडीर जी, मनोज पुंडीर जी, पंकज राणा जी, विवेक चौहान जी, विशाल पुंडीर जी एवं जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी सहभागिता से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
हर वक्ता ने अपने संबोधन में समाज की एकता, युवाओं की भूमिका और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर जोर दिया। यह संदेश स्पष्ट था कि महाराणा प्रताप की प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का केंद्र बनेगी।
🔴 अध्यक्षीय उद्बोधन में राष्ट्रभक्ति की हुंकार
डॉ. लाखन सिंह जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि महाराणा प्रताप केवल क्षत्रिय समाज के नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष के गौरव हैं। उनकी प्रतिमा की स्थापना समाज को एकता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की दिशा में प्रेरित करेगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास को केवल किताबों में न पढ़ें, बल्कि अपने आचरण में उतारें।
उनका कहना था कि जब समाज अपने नायकों को सम्मान देता है, तब वह अपनी जड़ों को मजबूत करता है। यही मजबूती भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाती है।
🔴 सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव की नई लहर
Maharana Pratap statue Muzaffarnagar का यह संकल्प केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन का रूप लेता दिखा। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रतिमा की स्थापना से शहर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। यह स्थान आने वाले समय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, युवाओं की गतिविधियों और सामाजिक संवाद का केंद्र बन सकता है।
🔴 समापन में गूंजा गर्व का स्वर
कार्यक्रम का समापन महाराणा प्रताप जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर और “जय महाराणा प्रताप” के उद्घोष के साथ किया गया। पूरे सभागार में राष्ट्रभक्ति की भावना, गर्व और एकजुटता की लहर साफ महसूस की गई।

