Mahoba में शराब ठेके पर महिलाओं का धावा, 55 पेटी शराब बर्बाद करने का दावा; बस्ती में ठेका खुलने से थीं नाराज
Mahoba के चरखारी विकासखंड के सूपा गांव में रविवार की शाम महोबा शराब ठेका उस समय अचानक विरोध का केंद्र बन गया, जब बड़ी संख्या में महिलाएं वहां पहुंच गईं और ठेके के अंदर घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। महिलाओं ने देसी शराब की पेटियां बाहर निकालकर फेंक दीं और शराब के क्वार्टरों को पैरों से कुचलकर अपना विरोध जताया। महिलाओं का कहना था कि गांव की बस्ती के भीतर शराब की दुकान होने से परिवारों में लगातार विवाद और परेशानी बढ़ रही है।
महिलाओं के इस विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से नहीं की गई है। घटना के बाद आबकारी विभाग और पुलिस को सूचना दी गई है।
बस्ती के बीच शराब ठेका होने से महिलाओं में नाराजगी
सूपा गांव की महिलाओं का आरोप है कि शराब की दुकान बस्ती के भीतर होने के कारण गांव के कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि परिवार के कुछ सदस्य ठेके से शराब खरीदकर घर लौटते हैं और नशे की हालत में विवाद करते हैं।
महिलाओं के मुताबिक, गांव से शराब का ठेका हटाने की मांग पहले भी कई बार उठाई जा चुकी थी। उनका दावा है कि संबंधित अधिकारियों से शिकायत और मांग के बावजूद ठेका गांव से बाहर नहीं किया गया। इसी नाराजगी के बीच रविवार शाम महिलाओं का गुस्सा अचानक सड़क से शराब की दुकान तक पहुंच गया।
शाम करीब चार बजे ठेके पर पहुंचीं महिलाएं
बताया गया कि रविवार को शाम करीब चार बजे महिलाओं का समूह शराब के ठेके पर पहुंचा। इसके बाद महिलाओं ने ठेके के भीतर जाकर शराब की पेटियों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। देखते ही देखते दुकान के बाहर देसी शराब के क्वार्टर बिखर गए।
महिलाओं ने कई क्वार्टरों को अपने पैरों से कुचल दिया। इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ युवकों ने भी ठेके के बाहर फेंके गए शराब के क्वार्टर उठा लिए। घटना के दौरान वहां काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
शराब पीकर बाइक दुर्घटना में युवक की मौत का भी जिक्र
महिलाओं के विरोध के पीछे गांव में हुई एक हालिया दुर्घटना का भी जिक्र सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले गांव के मिठ्ठू की शराब पीने के बाद बाइक दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस घटना ने शराब की बिक्री को लेकर गांव में पहले से मौजूद नाराजगी को और बढ़ा दिया।
महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण केवल घरेलू विवाद ही नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि नशे में वाहन चलाने जैसी घटनाएं भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से वे गांव के अंदर शराब की दुकान संचालित किए जाने का विरोध कर रही हैं।
55 पेटी शराब बर्बाद होने का दावा
ठेके के सेल्समैन अजय के अनुसार, महिलाओं की तोड़फोड़ में करीब 55 पेटी शराब बर्बाद हुई है। उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों को दिए जाने की बात कही है।
हालांकि, शराब की कितनी मात्रा वास्तव में नष्ट हुई, इसका अंतिम आंकड़ा जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल सेल्समैन की ओर से 55 पेटी शराब के नुकसान का दावा किया गया है।
वायरल वीडियो में दिखा विरोध, लेकिन पुष्टि नहीं
घटना के बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित होने लगा। वीडियो में महिलाओं को शराब की दुकान के बाहर और अंदर विरोध करते हुए देखा जा रहा है। शराब के क्वार्टरों को बाहर फेंके जाने और उन्हें पैरों से कुचले जाने के दृश्य भी चर्चा में हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो की तरह इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम को लेकर अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
आबकारी विभाग ने जांच की बात कही
घटना की जानकारी मिलने के बाद आबकारी विभाग भी सक्रिय हुआ है। जिला आबकारी अधिकारी अतुल सिंह ने कहा कि मामले की मौके पर जाकर जांच कराई जाएगी। जांच के बाद घटना में हुए नुकसान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इससे यह भी साफ होगा कि शराब की दुकान में कितना नुकसान हुआ, तोड़फोड़ की घटना किन परिस्थितियों में हुई और महिलाओं की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
महिलाओं की मांग अब जांच के घेरे में
सूपा गांव की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में शराब की दुकानों के स्थान को लेकर होने वाले विवाद को सामने ला दिया है। महिलाओं का कहना है कि बस्ती के बीच शराब की दुकान होने से उन्हें रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और घरों में विवाद की स्थिति बनती है।
दूसरी ओर, ठेके में तोड़फोड़ और शराब नष्ट किए जाने की घटना अपने आप में अलग प्रशासनिक और कानूनी पहलू रखती है। अब आबकारी विभाग और पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि आगे क्या कार्रवाई होती है और गांव की महिलाओं की ठेका हटाने की मांग पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।
सूपा गांव की घटना के बाद अब प्रशासन के फैसले पर नजर
फिलहाल सूपा गांव में हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर शराब की दुकान को लेकर चल रहे विरोध को खुलकर सामने ला दिया है। महिलाओं की ओर से लंबे समय से ठेका हटाने की मांग किए जाने की बात कही जा रही है, जबकि रविवार को विरोध तोड़फोड़ तक पहुंच गया।
अब जिला आबकारी अधिकारी के निर्देश पर होने वाली जांच महत्वपूर्ण होगी। इसी जांच से नुकसान का वास्तविक आकलन, घटना की पूरी परिस्थितियां और महिलाओं की शिकायतों को लेकर प्रशासन की अगली कार्रवाई तय होगी।
सूपा गांव में शराब ठेके के खिलाफ महिलाओं का यह विरोध केवल एक दुकान में हुई तोड़फोड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की उस शिकायत को सामने लाता है जिसमें वे बस्ती के भीतर शराब की बिक्री से होने वाली कथित सामाजिक परेशानियों का मुद्दा उठा रही हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रशासन इस विवाद का क्या समाधान निकालता है और महिलाओं की ठेका हटाने की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।

