Yogi Adityanath का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- ‘रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे’, कांग्रेस-सपा पर जालीदार टोपी वाली टिप्पणी से गरमाई सियासत
Dr. S.K. Agarwal
17 min read
VHP, Yogi Adityanath, अयोध्या, अशोक सिंघल, अशोक सिंघल जन्म शताब्दी, उत्तर प्रदेश राजनीति, कांग्रेस, योगी आदित्यनाथ, राम जन्मभूमि, राम मंदिर, राम मंदिर आंदोलन, रामलला प्राण प्रतिष्ठा, लखनऊ समाचार, विश्व हिंदू परिषद, सनातन, सपा, समाजवादी पार्टीलखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या को लेकर कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के शिलान्यास और रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कांग्रेस और सपा नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर टिप्पणी की।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन नेताओं को डर था कि कहीं उनकी “जालीदार टोपी छिटक न जाए।” उन्होंने आगे रामकाज में “कालनेमि” के प्रवेश की बात कहते हुए लोगों को ऐसे तत्वों से सावधान रहने की चेतावनी दी। यह बयान रविवार को गोमतीनगर विस्तार स्थित सीएमएस सभागार में आयोजित अशोक सिंहल जन्म शताब्दी कार्यक्रम के दौरान दिया गया।
मुख्यमंत्री का यह संबोधन मुख्य रूप से अशोक सिंहल के जीवन, राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका और हिंदू समाज के संगठन से जुड़े उनके योगदान पर केंद्रित था। हालांकि भाषण के दौरान उन्होंने समकालीन राजनीति और विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा, जिसके बाद उनके बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी पर लखनऊ में बड़ा आयोजन
विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी वर्ष 2026 में मनाई जा रही है। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम इसी सिलसिले में हुआ, जहां उनके जीवन और सार्वजनिक योगदान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
कार्यक्रम में विहिप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े पदाधिकारियों के अलावा संत समाज तथा उत्तर प्रदेश सरकार के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी से जुड़े कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किए जा रहे हैं। विहिप ने वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों की योजना की जानकारी भी दी है। संगठन के अनुसार, 27 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच देश के 47 प्रमुख स्थानों पर कार्यक्रम प्रस्तावित हैं और इसके बाद भी वर्षभर विभिन्न गतिविधियां जारी रहेंगी।
लखनऊ का कार्यक्रम इसी व्यापक आयोजन श्रृंखला का एक हिस्सा रहा।
योगी ने राम मंदिर आंदोलन को अशोक सिंहल के जीवन से जोड़ा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अशोक सिंहल के जीवन को राम जन्मभूमि आंदोलन से जोड़ते हुए उनके योगदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंहल ने अपने जीवन को श्रीराम जन्मभूमि के लिए समर्पित किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, सिंहल ने 1980 के दशक में जिस विचार और आंदोलन को आगे बढ़ाया, वह बाद में व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में सामने आया।
योगी ने अशोक सिंहल के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन इस भावना से प्रेरित था कि जब तक राम का काम पूरा नहीं होगा, तब तक वह विश्राम नहीं करेंगे। उनके अनुसार सिंहल ने अलग-अलग समूहों और संतों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निचली राजनीति से अलग, यह मुख्यमंत्री के भाषण का वह हिस्सा था जिसमें उन्होंने अशोक सिंहल की संगठन क्षमता और लंबे समय तक चले राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
‘रामकाज में कालनेमि भी घुसेंगे’, योगी की चेतावनी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामकाज में “कालनेमि” भी प्रवेश करेंगे और ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
रामायण के प्रसंग में कालनेमि को एक ऐसे पात्र के रूप में जाना जाता है जिसने हनुमान के मार्ग में बाधा डालने का प्रयास किया था। मुख्यमंत्री ने इसी प्रतीक का इस्तेमाल करते हुए राम मंदिर और हिंदू समाज से जुड़े कार्यों में कथित तौर पर बाधा डालने वाले तत्वों के प्रति सावधान रहने की बात कही।
उनका यह बयान कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच राजनीतिक और वैचारिक संदेश के रूप में भी देखा गया। हालांकि “कालनेमि” का इस्तेमाल मुख्यमंत्री ने रूपक के तौर पर किया था; उन्होंने अपने संबोधन में इसे समकालीन राजनीतिक संदर्भ से जोड़ा।
कांग्रेस और सपा पर राम मंदिर को लेकर निशाना
योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर के शिलान्यास और रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि दोनों दलों के नेता कार्यक्रम में नहीं गए क्योंकि उन्हें वोटबैंक की चिंता थी। इसी संदर्भ में उन्होंने “जालीदार टोपी छिटकने” वाली टिप्पणी की।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है। इस बयान के जरिए उन्होंने विपक्षी दलों की अयोध्या और राम मंदिर से जुड़ी राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाया।
ऐसे बयानों के संदर्भ में यह अंतर रखना जरूरी है कि मुख्यमंत्री ने मंच से एक राजनीतिक दावा और टिप्पणी की है; इसे संबंधित दलों की मंशा का स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन लंबे संघर्ष और सामाजिक लामबंदी के बाद इस मुकाम तक पहुंचा।
उन्होंने राम मंदिर के निर्माण को अशोक सिंहल के लंबे संघर्ष से जोड़कर देखा और कहा कि आज भव्य राम मंदिर के रूप में उनका सपना दिखाई दे रहा है।
राम मंदिर आंदोलन में अशोक सिंहल की भूमिका को विहिप लंबे समय से संगठन के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताता रहा है। जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम भी इसी विरासत को याद करने और उससे जुड़े विचारों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे हैं।
‘गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने के लिए एकजुट होना होगा’
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि देश में गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने के लिए समाज को एकजुट होकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश करने वाले तत्वों से सावधान रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए इसे हिंदू समाज के संगठन और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वालों का स्वयं को रामभक्त बताने का प्रयास उनके अनुसार विहिप की वैचारिक विजय को दर्शाता है।
यह टिप्पणी सीधे तौर पर राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं और वर्तमान राजनीतिक विमर्श के बीच संबंध स्थापित करती है।
2 नवंबर 1990 की घटना को भी किया याद
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में 2 नवंबर 1990 की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय रामभक्तों पर तत्कालीन सरकार ने गोली चलवाई थी और अशोक सिंहल उस दौर में आंदोलन के साथ खड़े रहे।
राम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास में अक्टूबर-नवंबर 1990 की घटनाओं का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उस समय अयोध्या में कारसेवा को लेकर तनाव और पुलिस कार्रवाई हुई थी।
योगी आदित्यनाथ ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ को याद करते हुए कहा कि अशोक सिंहल उस समय सामने खड़े रहे और आंदोलन का नेतृत्व किया।
उनके अनुसार, उस दौर में देखा गया सपना अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर के रूप में सामने आया है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग से लेकर संघ तक का सफर
योगी आदित्यनाथ ने अशोक सिंहल के जीवन के शुरुआती दौर का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि अशोक सिंहल ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसी दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आए। बाद में उन्होंने अपना जीवन संगठनात्मक कार्य और हिंदू समाज से जुड़े मुद्दों के लिए समर्पित कर दिया।
अशोक सिंहल लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी सार्वजनिक भूमिका के कारण वह इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे।
जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में उनके इसी जीवन और योगदान को केंद्र में रखा जा रहा है।
1980 के दशक में प्रज्ज्वलित ‘ज्योति’ का योगी ने किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंहल ने 1980 के दशक में जिस “ज्योति” को प्रज्ज्वलित किया था, वह बाद में “ज्वाला” के रूप में व्यापक सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी।
योगी ने इसे केवल राम जन्मभूमि तक सीमित नहीं बताया, बल्कि हिंदू समाज के संरक्षण और संवर्धन से भी जोड़ा।
उनके भाषण का यह हिस्सा अशोक सिंहल की विचारधारा और उनके संगठनात्मक कार्यों को वर्तमान समय से जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आया।
अशोक सिंहल का ‘रामकाज’ वाला संकल्प
मुख्यमंत्री ने अशोक सिंहल के जीवन के उस कथित संकल्प का भी जिक्र किया कि जब तक राम का काम पूरा नहीं होगा, तब तक विश्राम नहीं करना है।
उन्होंने कहा कि सिंहल ने “चरैवेति-चरैवेति” को जीवन का मंत्र बनाया और लंबे समय तक संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
योगी के अनुसार, राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अलग-अलग संतों और सामाजिक समूहों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
यह कार्यक्रम मूल रूप से इसी विरासत को याद करने के लिए आयोजित किया गया था।
विहिप ने वर्षभर के कार्यक्रमों की बनाई है योजना
अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी को लेकर विहिप की ओर से वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों की जानकारी पहले ही दी जा चुकी है।
संगठन के अनुसार, देश के 47 प्रमुख स्थानों पर 27 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इसके बाद वर्षभर विभिन्न स्थानों पर सेवा, सामाजिक समरसता, जन-जागरण, गोष्ठियों और प्रदर्शनियों जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं।
विहिप ने जन्म शताब्दी वर्ष का उद्देश्य अशोक सिंहल के जीवन, विचार और सामाजिक योगदान को याद करना बताया है।
कार्यक्रम में कई प्रमुख चेहरे रहे मौजूद
लखनऊ के कार्यक्रम में विहिप और संघ से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी तथा संत मौजूद रहे।
कार्यक्रम में विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, आरएसएस के प्रांत प्रचारक कौशल, संत श्रीकृष्ण शाह विद्यार्थी, रविंद्र कीर्ति स्वामी, भंते शीलरत्न, सरदार निर्मल सिंह, महंत अवधेश दास, महंत धर्मेंद्र दास, महंत दिव्य गिरि, विहिप के प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल, क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और एमएलसी महेंद्र सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
इससे कार्यक्रम में संगठनात्मक और धार्मिक दोनों पक्षों की मौजूदगी दिखाई दी।
डॉक्यूमेंट्री के जरिए याद किया गया अशोक सिंहल का जीवन
समारोह के दौरान अशोक सिंहल के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से उनके शुरुआती जीवन, संघ से जुड़ाव, विहिप में उनकी भूमिका और राम जन्मभूमि आंदोलन से संबंधित उनके योगदान को प्रस्तुत किया गया।
ऐसे आयोजन किसी सार्वजनिक व्यक्तित्व की विरासत को नए दौर की पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनते हैं। अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान इसी प्रकार के कार्यक्रम अलग-अलग शहरों में आयोजित किए जाने की योजना है।
राम मंदिर आंदोलन और अशोक सिंहल की भूमिका
अशोक सिंहल का नाम राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेताओं में लिया जाता है। वह विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व से लंबे समय तक जुड़े रहे और आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके समर्थक उन्हें आंदोलन के प्रमुख रणनीतिक और संगठनात्मक चेहरों में गिनते हैं। वहीं, राम जन्मभूमि आंदोलन का राजनीतिक इतिहास व्यापक रूप से बहस और विवाद का विषय भी रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में अशोक सिंहल की भूमिका को सकारात्मक और प्रेरणादायक विरासत के रूप में प्रस्तुत किया।
योगी के बयान से फिर चर्चा में कांग्रेस-सपा की अयोध्या राजनीति
राम मंदिर को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की राजनीतिक स्थिति लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय रही है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने ताजा भाषण में दोनों दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राम मंदिर के कार्यक्रमों से दूरी बनाने के पीछे वोटबैंक की राजनीति थी।
हालांकि, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से इस विशेष भाषण पर प्रतिक्रिया या इन आरोपों पर उनका पक्ष इस रिपोर्ट के उपलब्ध स्रोतों में दर्ज नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री के आरोपों को उनके राजनीतिक वक्तव्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अयोध्या और राम मंदिर अब भी उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम मुद्दा
राम मंदिर का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद भी राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने दृष्टिकोण से उठाते रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ के भाषण में भी राम मंदिर, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा और राम जन्मभूमि आंदोलन को राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श के साथ जोड़ा गया।
अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी का आयोजन इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बीच हो रहा है।
‘रामभक्तों पर गोली चलाने वालों’ वाली टिप्पणी से भी गरमाई बहस
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में 1990 की गोलीबारी का उल्लेख करते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वालों का खुद को रामभक्त बताने का प्रयास उनके अनुसार विहिप की वैचारिक विजय है।
यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें राम जन्मभूमि आंदोलन के पुराने घटनाक्रम को वर्तमान राजनीतिक विमर्श से जोड़ा गया।
ऐतिहासिक घटनाओं की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग दल और संगठन अपने दृष्टिकोण से करते रहे हैं। इसलिए इस बयान को मुख्यमंत्री के राजनीतिक दृष्टिकोण के रूप में रिपोर्ट किया जाना अधिक उपयुक्त है।
अशोक सिंहल की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा
जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के जरिए विहिप अशोक सिंहल की विरासत को व्यापक समाज तक पहुंचाने की तैयारी में है।
संगठन ने सेवा, सामाजिक समरसता, जन-जागरण, गोष्ठियों और प्रदर्शनियों जैसे कार्यक्रमों की योजना की जानकारी दी है। इससे संकेत मिलता है कि जन्म शताब्दी आयोजन केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहने वाला है बल्कि वर्षभर विभिन्न गतिविधियों के रूप में चलाया जाएगा।
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी वाला कार्यक्रम इस अभियान का उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
कार्यक्रम का राजनीतिक संदेश भी साफ दिखाई दिया
अशोक सिंहल की स्मृति में आयोजित समारोह में जहां उनके जीवन और योगदान पर चर्चा हुई, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण में समकालीन राजनीति भी प्रमुखता से दिखाई दी।
राम मंदिर, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वोटबैंक, अयोध्या और 1990 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर सीधा हमला बोला।
इस कारण कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि और जन्म शताब्दी आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक विमर्श का भी मंच बन गया।
‘रामकाज’ पर योगी का संदेश—सावधानी और एकजुटता पर जोर
मुख्यमंत्री के भाषण का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा समाज को एकजुट रहने की अपील से जुड़ा रहा।
उन्होंने गुलामी के चिह्नों को समाप्त करने और समाज को एकजुट होकर काम करने की बात कही। साथ ही “रामकाज में कालनेमि” वाली टिप्पणी के जरिए उन्होंने समर्थकों को उन तत्वों से सावधान रहने का संदेश दिया जिन्हें वह राम मंदिर और हिंदू समाज से जुड़े कार्यों के लिए बाधक मानते हैं।
यह संदेश उनके भाषण में धार्मिक-सांस्कृतिक संदर्भ और राजनीतिक टिप्पणी, दोनों के रूप में सामने आया।
जन्म शताब्दी वर्ष में आगे भी होंगे कई आयोजन
अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी के अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। विहिप के अनुसार, विभिन्न राज्यों में उद्घाटन कार्यक्रमों के अलावा वर्षभर सेवा और जन-जागरण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों में अशोक सिंहल के जीवन और उनके संगठनात्मक योगदान को प्रमुखता से रखा जाएगा।
लखनऊ में आयोजित समारोह इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण ने इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बना दिया।
अब चर्चा में योगी का बयान और अशोक सिंहल की विरासत
लखनऊ के इस कार्यक्रम से दो प्रमुख संदेश सामने आए। पहला, विहिप और उससे जुड़े संगठनों की ओर से अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी को व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी। दूसरा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस और सपा पर किया गया राजनीतिक हमला।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में अशोक सिंहल को राम जन्मभूमि आंदोलन का प्रमुख चेहरा बताते हुए उनकी विरासत को वर्तमान समय से जोड़ा। वहीं कांग्रेस और सपा को लेकर उनकी “जालीदार टोपी” वाली टिप्पणी और “रामकाज में कालनेमि” वाला बयान राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी वर्ष की गतिविधियां अब वर्षभर चलने वाली हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में उनके जीवन, राम जन्मभूमि आंदोलन और हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में और आयोजन देखने को मिल सकते हैं।

