होलाष्टक प्रारंभ होने के साथ मांगलिक कार्यों पर आठ दिन के लिए रोक
मुजफ्फरनगर। होलाष्टक प्रारंभ होने के साथ ही एक बार फिर मांगलिक कार्यों पर आठ दिन के लिए रोक लग जाएगी। ऐसे में अब होली के बाद ही शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। सोमवार दोपहर १२.५२ बजे से होलाष्टक प्रारंभ हा गए हैं। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लगेगा।
होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक होलाष्टक दोष माना जाता है, जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण, आदि शुभ कार्य वर्जित हैं। होली से पूर्व के इन आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। इस साल होलाष्टक ०३ मार्च से शुरू हो रहा है जो कि होलिका दहन ;९ मार्च द्ध के दिन तक रहेगा।
मान्यता है कि होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन ही शिव जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इस काल में हर दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं। इसलिए होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं करते हैं लेकिन जन्म और मृत्यु के बाद किए जाने वाले कार्य कर सकते हैं।
जानते हैं कि इन आठ दिनों में कौन से काम नहीं करने चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव पाराशर ने बताया कि होलाष्टक आज २ मार्च से प्रारंभ हो गए हैं, जो ९ मार्च होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाएंगे। इसका मतलब आठ दिनों का यह होलाष्टक दोष रहेगा।
जिसमें सभी शुभ कार्य वर्जित हैं। इस दौरान हिन्दू धर्मों के १६ संस्कारों को न करने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि होलिका से पूर्व ८ दिन दाह-कर्म की तैयारी की जाती है। यह मृत्यु का सूचक है। इस दुःख के कारण होली के पूर्व ८ दिनों तक कोई भी शुभ कार्य नहीं होता।
जब प्रहलाद बच जाता है, उसी खुशी में होली का त्योहार मनाते हैं। होलाष्टक में शुभ कार्य करना अशुभ माना गया है। यदि होलाष्टक में शुभ कार्य किए जाते हैं तो उसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विवाह यदि किया जाए तो जीवनभर पति-पत्नी के बीच संबंधों में टकराव आएगा।
होलाष्टक में हिंदू धर्मों के १६ संस्कारों को न करने की सलाह दी जाती है।

