Mathura: पुलिस एवं एसओजी की संयुक्त कार्रवाई- 50 हजार का इनामी बदमाश मुठभेड़ में गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के Mathura में हुए इस पुलिस एनकाउंटर ने फिर एक बार समाज में चर्चा का विषय बना दिया है। इस घटना ने पुलिस की कठिन परिस्थितियों में भी उसकी क्षमता और साहस को प्रकट किया है, जब एक अंतरराष्ट्रीय इनामी बदमाश को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया। यह घटना समाज में सुरक्षा की महत्वता को दर्शाती है, लेकिन साथ ही इसे भी विचार का विषय बनना चाहिए कि ऐसे एनकाउंटर क्या समाज के मोरल और नैतिकता पर क्या प्रभाव डालते हैं।
पुलिस और अपराधी के बीच हुई मुठभेड़ के बाद, जिसमें दोनों पैरों में गोली लगने से बदमाश घायल हो गया, यह एक ओर अपराधिक घटना थी, जिसमें अपराधी को सजा मिली, लेकिन दूसरी ओर यह सोचने का मुद्दा भी उठता है कि क्या इस तरह के एनकाउंटर समाज में नैतिकता और मोरलिटी की अवधारणा पर क्या प्रभाव पड़ता है।
Mathura पुलिस एवं एसओजी ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 50 हजार के अंतरराज्यीय इनामी बदमाश को मुठभेड़ के दौरान पकड़ लिया। मुठभेड़ में लुटेरे के दोनों पैरों में गोली लग गई। गोली लगने से घायल बदमाश को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। पकड़े गए लुटेरे पर हरियाणा और राजस्थान में मुकदमे दर्ज हैं।
रविवार देररात एसओजी टीम को पांच वर्ष पुराने डकैती, लूट, रंगदारी वसूली में वांछित चल रहे 50 हजार के इनामी बदमाश की न्यू कामर रोड पर होने की सूचना मिली। सूचना के बाद कोसी पुलिस वहां पहुंच गई। पुलिस और बदमाश के बीच फायरिंग होने लगी।
बाइक सवार बदमाश दोनों पैरों में गोली लगने से वह घायल हो गया। पुलिस ने घायल अवस्था में सीएचसी में भर्ती कराया। आरोपी ने अपना नाम अलीजान मेव उर्फ लीलो पुत्र नवाब उर्फ नब्बे निवासी कावांन का वास थाना खोह जिला डीग बताया।
2019 से Mathura में दर्ज आठ मुकदमों में वांछित शातिर बदमाश अलीजान लूट, डकैती, वाहनों को लूटना, रंगदारी वसूलने आदि में नामजद था। मथुरा के थाना फरह, वृंदावन और कोसी में इसके खिलाफ आठ मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस इसको 2019 से तलाश कर रही थी। अलीजान के न मिलने पर मथुरा पुलिस की तरफ से 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।शातिर लुटेरा अलीजान रविवार देर रात किसी वारदात को अंजाम देने आया था। सूचना मिलने पर पुलिस सक्रिय हुई और घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
इस घटना से साफ होता है कि पुलिस को अपराधियों के साथ मुठभेड़ करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह भी मान्य है कि ऐसी स्थितियों में जान को खतरा नहीं डालना चाहिए। इस प्रकार के एनकाउंटर सिर्फ अपराधियों को सजा देने का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका समाज के नैतिक मूल्यों और मोरलिटी पर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
अब यह भी देखा जाना चाहिए कि कैसे इस घटना को समाज में स्थानीय प्रमुखों, धार्मिक आधारों और नेताओं के द्वारा स्थितान्तरित किया जाता है। क्या इसे केवल अपराध नियंत्रण के संदर्भ में ही देखा जा रहा है, या इसमें समाज के मोरल और नैतिकता की भी चिंता की जा रही है।
एनकाउंटर जैसी स्थितियों में यह भी सोचने की बात है कि क्या समाज में ऐसे प्रकार के अपराधियों की उत्पत्ति का कारण क्या है। क्या हमारी समाज में ऐसे वातावरण हैं जो लोगों को अपराध की ओर धकेलते हैं। इससे जुड़े समाज के मोरल और नैतिकता के मुद्दे भी विचार किए जाने चाहिए।

