उत्तर प्रदेश

Meerut: थापरनगर प्रॉपर्टी विवाद: सईद अहमद को मकान खरीदना पड़ा भारी, पुलिस ने घर पर ताला लगाया—कॉलोनी में तनाव बढ़ा

Meerut: थापरनगर क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से एक प्रॉपर्टी सौदे को लेकर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। Thaparnagar property dispute उस समय भड़क उठा जब जलीकोठी निवासी सईद अहमद ने अनुभव कालरा से लगभग एक करोड़ रुपये में मकान खरीदा और रजिस्ट्री पूरी होने के बाद अपने परिवार के साथ मकान में रहने लगे।
स्थानीय लोगों और कुछ हिंदू संगठनों का दावा है कि “थापरनगर में हमेशा से केवल हिंदू ही रहते आए हैं और वे नहीं चाहते कि किसी मुस्लिम को इस कॉलोनी में मकान बेचा जाए।”
यही वजह रही कि शुक्रवार को जानकारी फैलते ही विरोध तेज हो गया और देखते ही देखते यह मामला प्रशासन तक पहुंच गया।


कॉलोनी में विरोध, थाने में धरना—हिंदू संगठनों ने जोरदार हंगामा किया

रजिस्ट्री होने और शांति से रहने के केवल कुछ ही दिनों के भीतर, शुक्रवार को कॉलोनी के लोग और हिंदू संगठन अचानक सक्रिय हो गए।
अमरजीत सिंह, हरमीत सिंह, राजेश जुनेजा, सचिन डालडा, अमित हरजीत, पवन, ऋषभ सहित कई लोगों ने सदर थाने में पहुंचकर आरोप लगाया कि कॉलोनी के “धार्मिक स्वरूप” को बदलने की कोशिश की जा रही है।

विरोध में संगठन के सदस्यों ने थाने में दरी बिछाकर बैठना शुरू कर दिया, और मांग उठाई कि—

  • मकान किसी हिंदू के नाम दोबारा रजिस्ट्री किया जाए

  • जब तक सईद अहमद मकान वापस नहीं करते, प्रदर्शन जारी रहेगा

संगठन की ओर से कहा गया कि यह मामला सामान्य प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री का नहीं है, बल्कि “कॉलोनी की संरचना और परंपरा” से जुड़ा विषय है।
विरोध बढ़ने पर प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और पुलिस ने तनाव नियंत्रित करने के लिए तेजी से कदम उठाए।


पुलिस की कार्रवाई—सईद अहमद के मकान पर ताला, चाबी पुलिस के पास

स्थिति बिगड़ती देख पुलिस तुरंत थापरनगर पहुँची और विवादित मकान को अस्थायी रूप से खाली कराकर ताला लगा दिया
थाना प्रभारी विजय कुमार राय और टीम ने चाबी अपने पास रख ली और दोनों पक्षों को शनिवार को थाने बुलाने का फैसला किया।

स्थानीय लोगों में यह संदेश तेजी से फैल गया कि “अब निर्णय थाने में ही होगा”, जिसके बाद शनिवार को और बड़ा प्रदर्शन होने लगा।


सच्चिन सिरोही के नेतृत्व में घेराव, ‘मकान वापस कराओ’ की मांग तेज

शनिवार को अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही के नेतृत्व में कॉलोनीवासियों ने फिर से सदर थाने का घेराव किया।
उनका कहना था—

  • “जब तक मकान किसी हिंदू को वापस नहीं दिया जाता, धरना उठेगा नहीं।”

  • “कॉलोनी के धार्मिक स्वरूप से समझौता नहीं किया जाएगा।”

थाने के बाहर लगातार नारेबाज़ी, बैठा-बैठी और चर्चा जारी रही, जिससे पूरा क्षेत्र पुलिस की निगरानी में आ गया।


थाने में बुलाए गए सईद अहमद को हार्ट अटैक

शनिवार को जब पुलिस ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए थाने बुलाया, तभी हैरान कर देने वाली घटना हुई।
उधर से आए सईद अहमद अचानक सीने में दर्द की शिकायत करते हुए गिर पड़े
डॉक्टरों के अनुसार उन्हें हार्ट अटैक आया, जिसके बाद परिवारजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुँचे, जहाँ उपचार जारी है।

परिवार का कहना है कि—

  • “सईद साहब ने कानूनी तरीके से, पूरी रजिस्ट्री के साथ मकान खरीदा है। अचानक ऐसे विवाद और भीड़ दबाव में उनकी तबीयत बिगड़ गई।”

इस घटना ने Thaparnagar property dispute को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।


‘मेरा कसूर क्या?’—सईद अहमद की पीड़ा

ताला लगाए जाने के बाद सईद अहमद ने पुलिस और मीडिया को बताया कि उन्होंने यह मकान नियमों के अनुसार खरीदा था।
उनके मुताबिक—

  • अनुभव कालरा यह मकान लंबे समय से बेचना चाहते थे

  • कॉलोनी में कोई हिंदू खरीदार नहीं मिल रहा था

  • जनप्रतिनिधियों के दबाव के कारण मकान विक्रेता बेच नहीं पा रहे थे

  • आखिरकार दोनों पक्षों की सहमति से रजिस्ट्री हुई

सईद का सवाल था—
“अगर सब कुछ कानून के अनुसार हुआ है, तो फिर विवाद क्यों? मेरे परिवार को घर से निकालकर पुराने मकान में भेज देना—आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों?”


कॉलोनी में केवल हिंदू रहने की परंपरा?—स्थानीयों का दावा फिर चर्चा में

स्थानीय लोगों का तर्क है कि थापरनगर एक “एक-धार्मिक कॉलोनी” रही है जहाँ हमेशा हिंदू परिवार रहते आए हैं।
उनका कहना है कि—

  • किसी भी समुदाय का व्यक्ति घर खरीद सकता है, यह कानून कहता है

  • लेकिन कुछ कॉलोनियों में “परंपरागत संरचना” बनाए रखना जरूरी होता है

  • प्रशासन को प्रॉपर्टी सौदों में “सामाजिक समरसता” को ध्यान में रखना चाहिए

कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि मकान बेचने वाले और खरीदने वाले ने जानबूझकर कॉलोनी को बिना जानकारी दिए रजिस्ट्री की।


प्रशासन की प्रतिक्रिया—SP सिटी का बयान

SP सिटी आयुष विक्रम सिंह ने कहा कि पूरा मामला संवेदनशील है और पुलिस तटस्थ रुख अपनाकर जांच कर रही है।
उनके मुताबिक—

  • “विवाद की सभी परिस्थितियाँ देखी जा रही हैं।”

  • “पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए अस्थायी कदम उठाए हैं।”

  • “कानून के दायरे में आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

पुलिस टीम लगातार कॉलोनी, थाने और अस्पताल—तीनों जगह की स्थिति पर नजर रख रही है।


प्रॉपर्टी विवाद के बढ़ते सामाजिक संकेत—शहर में नई बहस

यह घटना शहर में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।
लोगों में सवाल उठ रहे हैं—

  • क्या किसी भी नागरिक को किसी भी जगह संपत्ति खरीदने का अधिकार नहीं?

  • क्या सामाजिक दबाव कानून से ऊपर हो सकता है?

  • क्या कॉलोनियों को धार्मिक आधार पर तय किया जाना चाहिए?

  • अगर सौदा कानूनी है, तो हस्तक्षेप किस हद तक उचित है?

यह घटना आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकती है, क्योंकि कई दल इसे “सामाजिक सौहार्द बनाम सामाजिक परंपरा” के रूप में पेश कर सकते हैं।


थापरनगर में सईद अहमद द्वारा कानूनी रूप से खरीदे गए मकान पर बढ़ते विवाद ने शहर में एक गंभीर बहस छेड़ दी है—क्या कानून की प्रक्रिया पर सामाजिक दबाव हावी हो सकता है? मकान पर पुलिस ताला, थाने में धरना, और खरीदार की तबीयत बिगड़ने जैसी घटनाएँ दर्शाती हैं कि यह मामला केवल एक प्रॉपर्टी विवाद नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुका है, जिसकी दिशा आने वाले कुछ दिनों में तय होगी।

 

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