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Muzaffarnagar में गोकशी की तैयारी पर पुलिस का धावा! बामनहेड़ी जंगल में मुठभेड़, दो बदमाश घायल; बछड़ा, तमंचे और औजार बरामद

Muzaffarnagar पुलिस ने गोकशी की कथित तैयारी के मामले में बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। थाना सिविल लाइन क्षेत्र में बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास जंगल में पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, जंगल में कुछ लोग एक गोवंशीय पशु को बांधकर गोकशी की तैयारी कर रहे थे।

पुलिस टीम के पहुंचते ही आरोपियों ने कथित रूप से फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में दो आरोपी पैर में गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद इलाके में कॉम्बिंग अभियान चलाया गया, जिसमें एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

हालांकि तीन आरोपी अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार कॉम्बिंग और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

पुलिस ने मौके से एक जीवित बछड़ा, गोकशी में इस्तेमाल किए जाने वाले कथित उपकरण और दो अवैध तमंचे बरामद किए हैं। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने थाना सिविल लाइन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।

9 अगस्त की घटना के बाद पुलिस ने शुरू की थी आरोपियों की तलाश

पुलिस के अनुसार, 9 अगस्त को थाना सिविल लाइन क्षेत्र में गोकशी का एक मामला सामने आया था। इस घटना के संबंध में थाना सिविल लाइन में मुकदमा अपराध संख्या 212/26 दर्ज किया गया था।

इस मुकदमे में गौवध अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 के तहत कार्रवाई की गई थी। घटना के बाद पुलिस के सामने आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती थी।

एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, मामले के अनावरण और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गईं।

पुलिस ने स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र सक्रिय करने के साथ-साथ संभावित ठिकानों और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई।

इसी जांच के दौरान 11 और 12 अगस्त की दरमियानी रात पुलिस को एक महत्वपूर्ण सूचना मिली।

आधी रात के बाद मुखबिर की सूचना से जंगल में पहुंची पुलिस

पुलिस के मुताबिक मुखबिर ने सूचना दी कि कुछ लोग बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास जंगल में एक गोवंशीय पशु के साथ मौजूद हैं और कथित तौर पर गोकशी करने की तैयारी कर रहे हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना सिविल लाइन के प्रभारी निरीक्षक इंद्रजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम को रवाना किया गया। इसके साथ एसओजी की संयुक्त टीम भी कार्रवाई में शामिल हुई।

रात का समय होने और इलाके में जंगल होने के कारण पुलिस के लिए अभियान चुनौतीपूर्ण था। टीम ने बताए गए स्थान के आसपास पहुंचकर घेराबंदी शुरू की।

पुलिस के अनुसार, वहां पहुंचने पर टीम ने देखा कि कुछ लोगों ने एक गोवंशीय पशु को बांध रखा था।

पुलिस को देखते ही कथित आरोपियों ने शुरू कर दी फायरिंग

पुलिस के अनुसार, टीम जैसे ही आरोपियों के करीब पहुंची, उन्होंने पुलिसकर्मियों पर गोली चला दी। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की और इसके बाद जंगल की तरफ भागने लगे।

अचानक हुई गोलीबारी के बीच पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा के लिए मोर्चा संभाला। पुलिस के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में दो आरोपियों के पैर में गोली लगी।

दोनों घायल होकर जमीन पर गिर गए, जिसके बाद पुलिस टीम ने उन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया।

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान और कॉम्बिंग शुरू की।

दो आरोपी गोली लगने से घायल, मौके से गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार मुठभेड़ में घायल दोनों आरोपियों की पहचान रियासत पुत्र इनाम और लालू उर्फ जावेद पुत्र भूरा उर्फ मन्तशा के रूप में हुई है।

रियासत किदवईनगर, थाना खालापार क्षेत्र का निवासी बताया गया है, जबकि लालू उर्फ जावेद महमूदनगर, थाना सिविल लाइन का रहने वाला है।

दोनों को पुलिस ने घायल अवस्था में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार उन्हें आवश्यक उपचार के लिए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

मुठभेड़ से जुड़े तथ्यों की जांच में घटनास्थल से मिले कारतूस और अन्य साक्ष्य भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

कॉम्बिंग के दौरान तीसरा आरोपी भी पुलिस के हाथ लगा

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इलाके में कॉम्बिंग अभियान जारी रखा। इसी दौरान एक अन्य आरोपी को पकड़ लिया गया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तीसरे आरोपी की पहचान पप्पू उर्फ आस मौहम्मद पुत्र नसीर के रूप में हुई है। वह यामीन कॉलोनी सरवट, थाना सिविल लाइन क्षेत्र का निवासी बताया गया है।

इस तरह पुलिस के अनुसार कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें दो मुठभेड़ के दौरान घायल हुए।

वहीं तीन अन्य आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। उनकी तलाश के लिए पुलिस टीमों को जंगल और आसपास के क्षेत्रों में लगाया गया है।

जंगल में बंधा मिला बछड़ा, पुलिस ने कराया बरामद

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक जीवित गोवंशीय पशु यानी बछड़ा बरामद किए जाने की जानकारी दी है।

पुलिस के अनुसार पशु को जंगल में बांधकर रखा गया था और आरोपियों द्वारा गोकशी की तैयारी की जा रही थी।

पशु की बरामदगी के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर भेजने की प्रक्रिया की गई। मामले में पशु से संबंधित तथ्य भी जांच का हिस्सा होंगे।

चाकू, छूरी, दाव और अन्य उपकरण बरामद

पुलिस के अनुसार मौके से कई ऐसे उपकरण मिले हैं, जिन्हें गोकशी में इस्तेमाल किए जाने वाला बताया गया है।

इनमें चाकू, छूरी, दाव, लकड़ी का गुटका, तराजू और बाट शामिल हैं।

पुलिस अब बरामद सामान को मामले से जोड़कर उसकी भूमिका की जांच करेगी। बरामद उपकरणों को केस की विवेचना में साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है।

315 बोर के दो तमंचे और कारतूस भी बरामद

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने 315 बोर के दो अवैध तमंचे बरामद किए जाने का दावा किया है। इनके साथ 315 बोर के दो जिंदा कारतूस और दो खोखा कारतूस भी मिले हैं।

पुलिस के अनुसार आरोपियों की ओर से फायरिंग की गई थी। ऐसे में घटनास्थल से मिले खोखे और बरामद हथियार जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पुलिस द्वारा हथियारों की बरामदगी को भी मामले में दर्ज किया गया है और आर्म्स एक्ट के तहत अलग से कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पूछताछ में सामने आई गोकशी की कथित गतिविधियां

पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने अपने फरार साथियों के साथ मिलकर गोकशी करने की बात स्वीकार की।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बताया कि वे छुट्टा और आवारा घूमने वाले गोवंश को पकड़कर जंगल में ले जाते थे। वहां कथित तौर पर गोकशी करने के बाद मांस बेचने का काम किया जाता था।

हालांकि पूछताछ के दौरान सामने आए कथित बयानों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है। किसी आरोपी के बयान को अंतिम सत्य मानने के बजाय जांच और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति तय होगी।

दो दिन पहले गाय और बछड़े की गोकशी का भी आरोप

पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि मुठभेड़ से दो दिन पहले थाना सिविल लाइन क्षेत्र में एक गाय और एक बछड़े की गोकशी की गई थी।

इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने एक नया मुकदमा दर्ज किया है।

थाना सिविल लाइन पुलिस के अनुसार इस संबंध में मुकदमा अपराध संख्या 214/26 दर्ज किया गया है।

नए मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/28 और गौवध अधिनियम की धारा 3/8 के तहत कार्रवाई की गई है।

पुराने केस से भी जुड़े बताए गए गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी पहले से दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 212/26 से भी जुड़े हुए हैं।

इसका मतलब यह है कि पुलिस अब दोनों मामलों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है। पुराने मामले में हुई घटना और नए मामले में कथित तौर पर सामने आए आरोपों के बीच क्या कड़ी है, यह जांच का विषय होगा।

पुलिस आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित आरोपियों और घटनाओं की जानकारी भी जुटा रही है।

लालू उर्फ जावेद का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड बताया गया

पुलिस के अनुसार घायल आरोपी लालू उर्फ जावेद का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ चोरी, आर्म्स एक्ट, गौवध अधिनियम और गैंगस्टर एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हैं।

उसके खिलाफ थाना छपार, थाना सिविल लाइन, थाना कोतवाली नगर और थाना नई मंडी में मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।

पुलिस अब उसके पुराने मामलों की भी जानकारी को वर्तमान जांच के साथ जोड़कर देख रही है।

रियासत के खिलाफ भी कई मुकदमों का दावा

दूसरे घायल आरोपी रियासत के संबंध में भी पुलिस ने आपराधिक इतिहास बताया है।

पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ गौवध अधिनियम, आर्म्स एक्ट, चोरी और पशु क्रूरता अधिनियम से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं।

उसके खिलाफ थाना सिविल लाइन, थाना कोतवाली नगर और शामली जनपद के एक थाने में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस उसके पुराने मामलों की प्रकृति और वर्तमान घटना में कथित भूमिका के बीच संबंध की भी जांच कर रही है।

पप्पू उर्फ आस मौहम्मद की भूमिका भी जांच के घेरे में

कॉम्बिंग के दौरान गिरफ्तार किए गए तीसरे आरोपी पप्पू उर्फ आस मौहम्मद के खिलाफ भी थाना सिविल लाइन में मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 212/26 और नया मुकदमा अपराध संख्या 214/26 दर्ज है।

पुलिस उसके अन्य आपराधिक रिकॉर्ड की भी जानकारी जुटा रही है। जांच के दौरान यदि उसके खिलाफ पहले के मामलों का कोई अतिरिक्त रिकॉर्ड सामने आता है तो उसे भी विवेचना में शामिल किया जाएगा।

तीन आरोपी फरार, जंगल में पुलिस का कॉम्बिंग अभियान जारी

मुठभेड़ के दौरान तीन आरोपियों के फरार होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस के मुताबिक इन आरोपियों ने अंधेरे का फायदा उठाया और जंगल की ओर भाग निकले।

रात में जंगल का इलाका होने के कारण तलाशी अभियान चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद पुलिस टीमों ने संभावित रास्तों और आसपास के क्षेत्रों में कॉम्बिंग शुरू कर दी।

पुलिस फरार आरोपियों की पहचान और ठिकानों की जानकारी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जुटा रही है।

संयुक्त टीम ने संभाली पूरी कार्रवाई

इस अभियान में थाना सिविल लाइन पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम शामिल रही।

पुलिस टीम का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक इंद्रजीत सिंह ने किया। टीम में उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेदी, कृष्णकपूर, एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक मोहित सिंह और उपनिरीक्षक अजय गौड़ शामिल रहे।

इसके अलावा हेड कांस्टेबल जितेंद्र त्यागी, हेड कांस्टेबल नितिन मलिक, कांस्टेबल गुरनाम, कांस्टेबल शाकिर अली, मोहित कुमार, मनीष अत्री और योगेंद्र कुमार भी कार्रवाई में शामिल रहे।

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने दी घटना की जानकारी

थाना सिविल लाइन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

एसएसपी के अनुसार पुलिस ने पहले से दर्ज मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीमें गठित की थीं। इसके बाद मिली मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई।

उन्होंने बताया कि संयुक्त टीम ने बामनहेड़ी के जंगल में पहुंचकर आरोपियों की घेराबंदी की और मुठभेड़ के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस मुठभेड़ के दावे की जांच में साक्ष्य अहम होंगे

मुठभेड़ से जुड़े किसी भी मामले में घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं। पुलिस के अनुसार इस मामले में दो तमंचे, जिंदा कारतूस और खोखे बरामद हुए हैं।

आगे की जांच में यह देखा जाएगा कि बरामद हथियारों का फायरिंग से क्या संबंध है और घटनास्थल पर उपलब्ध अन्य साक्ष्य क्या बताते हैं।

फोरेंसिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत बरामद हथियारों और कारतूसों की जांच भी मामले का हिस्सा बन सकती है।

गोकशी के पुराने मामले से जुड़ी जांच को मिली नई दिशा

9 अगस्त को दर्ज हुए मुकदमा अपराध संख्या 212/26 की जांच के दौरान पुलिस को कथित रूप से बामनहेड़ी जंगल में आरोपियों के होने की सूचना मिली।

अब तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद पुलिस को पुराने मामले के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

पूछताछ के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पहले की घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी।

आरोपियों से पूछताछ के आधार पर सामने आ सकते हैं नए नाम

तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब फरार आरोपियों तक पहुंचने पर केंद्रित है।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरार तीन लोगों की पहचान क्या है, वे कहां रहते हैं और घटना में उनकी कथित भूमिका क्या थी।

इसके अलावा पुलिस यह भी जांच सकती है कि कथित रूप से गोवंश को पकड़ने, उसे जंगल तक लाने और मांस बेचने के लिए किसी बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा था या नहीं।

इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

मामले में दर्ज हुईं अलग-अलग धाराएं

पुलिस ने इस घटनाक्रम से जुड़े नए मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/28 और गौवध अधिनियम की धारा 3/8 लगाए जाने की जानकारी दी है।

अलग-अलग कानूनों के तहत कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध के विभिन्न पहलुओं को कानूनी रूप से जांच के दायरे में लाना है।

मामले में आगे पुलिस की विवेचना और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती

एक तरफ पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ानी है, वहीं दूसरी ओर फरार आरोपियों को गिरफ्तार करना भी बड़ी चुनौती है।

जंगल में हुई घटना के बाद फरार हुए आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में दबिश और कॉम्बिंग जारी रखी है।

फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की सभी कड़ियां पूरी तरह सामने आने की उम्मीद है।

गांव और आसपास के इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी

ऐसी घटनाओं के बाद पुलिस आम तौर पर संभावित ठिकानों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाती है। बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन और आसपास के जंगल में भी पुलिस की गतिविधियां बढ़ी हैं।

पुलिस यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि फरार आरोपी क्षेत्र से बाहर न निकल सकें और उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जल्द मिल सके।

गिरफ्तार आरोपियों की मेडिकल और कानूनी प्रक्रिया

मुठभेड़ में घायल हुए दोनों आरोपियों के संबंध में पुलिस को उपचार और मेडिकल प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

मुठभेड़ में लगी चोटों और उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी मामले के रिकॉर्ड का हिस्सा बनेगी।

दूसरे गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ भी पुलिस निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाएगी।

बामनहेड़ी जंगल में देर रात चली पुलिस कार्रवाई

11 और 12 अगस्त की दरमियानी रात बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास जंगल में हुई कार्रवाई कई स्तरों पर महत्वपूर्ण रही। मुखबिर की सूचना, संयुक्त टीम की घेराबंदी, कथित फायरिंग, जवाबी कार्रवाई, दो आरोपियों का घायल होना और तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी—पूरी कार्रवाई कुछ ही समय में आगे बढ़ी।

इसके बाद पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश के लिए कॉम्बिंग अभियान चलाया।

पुलिस के अनुसार अभियान अभी भी जारी है।

Muzaffarnagar Cow Slaughter Case में अब फरार आरोपियों पर नजर

बामनहेड़ी की कार्रवाई के बाद पुलिस की प्राथमिकता अब फरार तीन आरोपियों तक पहुंचना है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस उनके नाम, पते और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों का पहले दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 212/26 में क्या योगदान था और नए मुकदमा अपराध संख्या 214/26 से उनका संबंध किस स्तर तक है।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।

पुलिस की कार्रवाई के बाद जांच अब साक्ष्यों पर केंद्रित

गिरफ्तारियां और बरामदगी जांच की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अब पुलिस को इन बरामद सामानों, हथियारों, कारतूसों, घटनास्थल और आरोपियों के बयानों को आपस में जोड़कर मामले की पूरी तस्वीर तैयार करनी होगी।

इसके साथ ही पुराने मामलों की फाइलें और आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी जांच में शामिल किया जाएगा।

किसी भी आरोपी की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

अपराध पर लगाम के लिए पुलिस की लगातार निगरानी जरूरी

मुजफ्फरनगर जैसे बड़े जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को लगातार स्थानीय सूचना तंत्र और क्षेत्रीय निगरानी पर निर्भर रहना पड़ता है। जंगल, सुनसान इलाके और शहर से जुड़े बाहरी क्षेत्र अपराधियों के लिए छिपने की जगह बन सकते हैं।

बामनहेड़ी की कार्रवाई के बाद पुलिस की ओर से फरार आरोपियों की तलाश जारी रखना इसी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है।

स्थानीय लोगों से मिलने वाली सूचनाएं भी ऐसे मामलों में पुलिस जांच को दिशा दे सकती हैं।

मुठभेड़ के बाद तीन गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी

फिलहाल पुलिस के अनुसार मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें रियासत और लालू उर्फ जावेद मुठभेड़ में घायल हुए, जबकि पप्पू उर्फ आस मौहम्मद को कॉम्बिंग के दौरान पकड़ा गया।

तीन अन्य आरोपी अभी फरार बताए गए हैं।

पुलिस ने बरामद बछड़े और अन्य सामान को कब्जे में लिया है तथा हथियारों से संबंधित कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की संभावना है।

बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास जंगल में हुई पुलिस कार्रवाई ने मुजफ्फरनगर के एक पुराने गोकशी मामले की जांच को नई दिशा दी है। पुलिस के अनुसार 11 और 12 अगस्त की दरमियानी रात मुखबिर की सूचना पर सिविल लाइन पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने जंगल में घेराबंदी की, जहां एक गोवंशीय पशु को बांधकर गोकशी की कथित तैयारी की जा रही थी। पुलिस का दावा है कि टीम को देखते ही आरोपियों ने फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में रियासत और लालू उर्फ जावेद घायल हुए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कॉम्बिंग के दौरान पप्पू उर्फ आस मौहम्मद को भी पकड़ा गया, जबकि तीन आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने एक जीवित बछड़ा, दो 315 बोर तमंचे, कारतूस और कथित गोकशी के उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों का पहले दर्ज मुकदमे से भी संबंध है और नए मामले में भी विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश जारी है और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।

 

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