Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कहते है….धरने पर बैठे मास्टर विजय सिंह की बेदाग छवि
लोग कहते है कि जिला मुख्यालय Muzaffarnagar पर पिछले पौने तीन दशक से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे मास्टर विजय सिंह के दिन और स्टेट्स अब दिनों दिन बदलने लगा है। शामली जनपद के झिंझाना इलाकों के बाहुबलियों के कारनामों की जांच और कार्यवाही कराने की मांग को लेकर मास्टर विजय सिंह तब से अब तक Collectorate में धरना देतेआ रहे है।
कोरोना काल के दौरान तत्कालीन Muzaffarnagar जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. पता नहीं किन कारणों से मास्टरजी से खफा हो गई थी, लोगों के बीच बचाव करने पर मास्टर जी के साथ उन्होंने इतनी रियासत कर दी कि उनसे कहा गया कि वे अपना बिस्तर बोरिया कलक्टज्डेट से बदलकर शिवचौक पर ले जाये, जहां गोल मार्किट में बरामद में वे अब भी विराजमान है।
लोग बताते है कि नगर की हृदयस्थली शिवचौक धर्म भीरू लोगों का कैंटीन बन हुआ है, वहीं पर हर जाति-बिरादरी औरहर पार्टी का नेता शिवचौक पर अपनेराजनीतिक प्रोजेक्ट को पूरा कर यह समझलेता है कि वह राजनीति में कामयाब होगया है।
ऐसे में Muzaffarnagar शिवचौक पर कई साधु संत व पंडित भी अपनी रोजी-रोटीकी तलाश में गोल मार्किट मंे डेरा जमायेरखते है। लोग कहते है कि शिवचौक परआने वाले श्रवालुओं में पुरुषों की अपेक्षामहिलाओं की भीड ज्यादा रहती है।सोमवार के दिन तो संध्या के समयलम्बी-लम्बी लाईनें लग जाती है।एकादशी हो अमावस्या महिलाएं सोचतीहै कि गोलमार्किट में बैठा साफ-सुथरीपोशाक शांत व गंभीर रहने वाले मास्टरजी भी किसी संत महात्मा से कम नहीं है।
इसी चक्कर में वे भोजन सामग्री, खाद्यपदार्थ और अन्य सामान मास्टर जी केमना करने पर भी जबरदस्ती उनके स्थलपर रख जाती है। महिलाओं की हालतदेखकर मास्टर जी चुपचाप रह जाते हैऔर उनके जाने के बाद वे महिलाओं द्वारादी गई सामग्री को जरूरतमंदों में बंटवादेते है। यह है मास्टर जी की दरियादिली।
इस काम में सुन्दर बाबू भी उनकी मददकरते है। लोगों कहना है कि धरना देते-देते मास्टर जी इतने सोशल हो गये है किकिसी चित परिचित के यहां गम हो याखुशी वे कुछ समय निकालकर उसकेयहां हाजिरी जरूरत लगाते है और रात मेंअपनी कुटिया में विश्राम करते है।
Muzaffarnagar मीडियाजगत में मास्टर जी के दाल-चावल पहले की मशहूर है। मास्टर जी के कारणशिवचौक पर धरना प्रदर्शन करने वालेनेता उनकी मौजूदगी से परेशान जरूरतरहते है, लेकिन मास्टर जी अपनी मांगोंके अलावा किसी भी पार्टी या दल मेंशरीक नहीं होते। यही उनकी बेदाग छविका राज है।
जब भी कुछ होता है तो वह लोगों की जुबां पर चर्चा का केन्द्र बन जाता है, ना काहूं सेदोस्ती न काहूं से बैर की नीति पर चलते हुए यह article पाठकों को समर्पित है।
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हमने क्रांतिकारी तो नही देखे परंतु मास्टर विजय सिंह जी को देखकर लगता है कि निश्चित तौर पर क्रांतिकारी ऐसे ही होंगे। लगभग 28 वर्षो तक शांतिपूर्ण धरना चलाना अपने आप मे एक गाथा है।
मास्टर जी का व्यक्तित्व साफ सुथरी छवि का है, उनके धैर्य एवम संघर्ष को शत शत नमन।