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Muzaffarnagar News: पूर्व की भांति गुड को कृषि उत्पाद घोषित करे केन्द्र सरकार, मोदी को पत्र लिखकर मांग

मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News)  द गुड खण्डसारी एण्ड ग्रेन मर्चेन्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय मित्तल व मंत्री श्यामसिंह सैनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रदेश सरकार ने एक जिला- एक उत्पाद निति के अंतर्गत गुड को लिया है। गुड गरीब आदमी के खाने की चीज है अब से ३००० साल पहले जब किसी भी प्रकार की टैक्नोलोजी दुनिया में नहीं थी तब भी गुड़ बनता था।

गन्ना किसान आलू, टमाटर व अन्य अनेको कृषि उत्पादों की तरह गन्ने का कोल्ड स्टोरेज में भंडारण नहीं कर सकता। गन्ने का गुड बनाकर ही किसान गुड को भंडारित कर सकता है। विधि द्वारा स्थापित मंड़ीयों में किसान द्वारा उत्पादित सारी कृषि उपज आकर बिकती है इस कृषि उपज को बेचने वाले वही किसान है जो कृषि उत्पाद गुड़ का उत्पादन करते है।

अन्य कृषि उत्पाद जैसे खाद्यान्न गेहूँ, चना, चावल व सभी प्रकार दाले जी.एस.टी. में कर मुक्त है व उनका ट्रांस्पोर्टेशन व कृषि उत्पाद से सम्बन्धित कमीशन भी कर मुक्त है। गुड भी अन्य कृषि उत्पादों की तरह जी.एस.टी. में कर मुक्त है लेकिन उसका ट्रांस्पोर्टेशन व आढत जीएसटी से मुक्त नहीं है तो केवल एक कृषि उत्पाद गुड़ को छांट कर उसकी आढ़त व ट्रांस्पोर्टेशन पर जी.एस.टी लगना तर्क संगत नहीं है क्योंकि गुड़ की बिकी का कार्य भी वही व्यापारी करते हैं जो अन्य जी.एस.टी. मुक्त कृषि उपज वस्तुओं का व्यापार करते है।

जो व्यापारी गुड़ का थोड़ा बहुत ही व्यापार करते है और साल भर में गुड बिक्री पर कमीशन से १०-२० हजार रूपये की आय प्राप्त करते हैं उन्हें भी वर्तमान कानून के अन्तर्गत जी.एस.टी का रजिस्ट्रेशन लेना होगा। जबकि उनके गुड़ के कमीशन का टर्नओवर बीस लाख से बहुत कम होगा। इसका कारण यह है कि कर मुक्त कृषि उपज का टर्नओवर भी गुड़ से प्राप्त आढ़त के टर्नओवर में जोड़ा जायेगा और जैसे ही गुड से प्राप्त आढत का टर्नओवर और कृषि उपज की कर मुक्त वस्तुओं से प्राप्त टर्नओवर जोड़कर बीस लाख से ज्यादा हो जायेगा तो व्यापारी को जी.एस.टी. में रजिस्ट्रेशन लेना पड़ेगा 

उस पर जी.एस.टी. लागू हो। जायेगा। कृषि उपज के व्यापारी अन्य कृषि उपज के साथ-साथ गुड़ का भी व्यापार करते रहे है क्योंकि गुड़ भी कृषि उपज ही है और गुड़ भी उन्हीं मंडीयों में बिकता है जहां अन्य कृषि उपज बिकती है लेकिन सरकार की वर्तमान जी.एस.टी. नीति के कारण गुड़ का व्यापार बंद करना व्यापारी की मजबूरी हो जायेगी। गुड़ के ट्रांस्पोर्टेशन व आढत पर जी.एस.टी. लगाकर सरकार कोई बड़ा राजस्व प्राप्त नहीं कर सकती इस गुड़ की आढत पर टैक्स से गन्ना उत्पादन करने वाले किसानो के हितो पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा और गांव-देहात में फैले गुड़ कोल्हू आदि प्रभावित होंगे

जिससे सरकार का राजस्व घटेगा व भारी बेरोजगारी फैलेगी। यह नीति गन्ना उत्पादक किसानों के साथ भेदभाव करती है इससे गुड़ उत्पादन का कुटीर उद्योग कोल्हू आदि क्रेशर उद्योग की तरह धीरे-धीरे तबाह हो जायेगा। इसलिए आपसे अनुरोध है कि डूबते गुड़ को बचाने के लिए गुड की आढत व ट्रांस्पोर्टेशन पर पूर्व की भांति केन्द्र सरकार से उसी प्रकार छूट दिलायें जैसे अन्य कृषि उत्पादों पर पर मिलती है।

विदित हो कि उ०प्र० कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम-१९६४ में भी गुड़ को कृषि उत्पाद माना गया है। गुड़ को कृषि उत्पाद मानकर ही उ०प्र० में मंडी समिति विभाग १प्रतिशत मंडी शुल्क वसूल रहा है। जबकि जी. एसटी में गुड कृषि उत्पाद नहीं माना गया है। यह कानून की विरोधाभासी स्थिति है इसे तुरंत दूर किया जाएं।

 

News-Desk

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