Indus Water Treaty पर पाकिस्तान की फिर धमकी: मंत्री बोले- ‘पानी रोकने की कोशिश हुई तो हाथ काट देंगे’, भारत के फैसले पर फिर जताया विरोध
News-Desk
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Indus Water Treaty, अंतरराष्ट्रीय समाचार, अताउल्लाह तरार, आसिम मुनीर, जल विवाद, पाकिस्तान, भारत-पाक संबंध, भारत-पाकिस्तान, मुसादिक मलिक, शहबाज शरीफ, सिंधु जल संधिभारत और पाकिस्तान के बीच Indus Water Treaty को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की गई तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है और भारत इसे एकतरफा समाप्त या संशोधित नहीं कर सकता।
दोनों मंत्रियों ने इस्लामाबाद में संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान अपने-अपने विचार रखे और सिंधु जल संधि को पाकिस्तान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
मुसादिक मलिक का विवादित बयान
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश कर रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि कोई पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करेगा या उसे रोकने का प्रयास करेगा तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
उनके इस बयान को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पाकिस्तान का दावा- संधि अब भी कानूनी रूप से लागू
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता है और पाकिस्तान के अनुसार यह अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का मानना है कि भारत इस संधि को एकतरफा न तो स्थगित कर सकता है, न समाप्त कर सकता है और न ही इसमें बदलाव कर सकता है।
तरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पाकिस्तान अपने अधिकारों की रक्षा करेगा।
इस्लामाबाद में होगा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार
पाकिस्तानी मंत्रियों ने जानकारी दी कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में जल विशेषज्ञ, कानूनी विशेषज्ञ और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है। सेमिनार में संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
पाकिस्तान का कहना है कि इस मंच के माध्यम से वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखेगा।
शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के बयान का भी किया उल्लेख
अताउल्लाह तरार ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि पानी पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है और यह देश की “रेड लाइन” है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ा विषय मानता है।
इससे पहले रक्षा मंत्री भी दे चुके हैं बयान
इससे पहले 21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर टिप्पणी की थी।
उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि यदि पाकिस्तान को अपनी जल सुरक्षा खतरे में महसूस हुई तो वह भारत के खिलाफ कठोर कदम उठा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि भारत पानी को रणनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
हालांकि उसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इस विषय पर हालिया घटनाक्रम की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।
भारत ने क्यों स्थगित की थी सिंधु जल संधि
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था।
उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत सरकार ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा।
भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
यह संधि सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों—सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज—के जल उपयोग से संबंधित है।
यह समझौता दुनिया के सबसे लंबे समय तक लागू रहने वाले अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में से एक माना जाता है।
पाकिस्तान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संधि
पाकिस्तान की कृषि का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश की अधिकांश सिंचित कृषि भूमि को पानी इसी नदी तंत्र से प्राप्त होता है।
कृषि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार का प्रमुख आधार है। इसलिए सिंधु जल संधि को वहां आर्थिक और खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।
दोनों देशों के बीच बढ़ा कूटनीतिक तनाव
हाल के वर्षों में सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा से जुड़े मुद्दों के कारण भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव बना हुआ है। सिंधु जल संधि का मुद्दा भी अब दोनों देशों के बीच प्रमुख कूटनीतिक विषयों में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विषय पर दोनों देशों की अलग-अलग कानूनी और राजनीतिक व्याख्याएं हैं तथा भविष्य में इस पर होने वाली कूटनीतिक और कानूनी प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी रहेगी।

