स्वास्थ्य

अफारा /गैस बनना : कारण और उपचार (भाग-1)

कभी-कभी भूख न लगना, गलत-खान पान और लापरवाही आदि के कारण पेट में दूषित वायु इकट्ठी हो जाती है, जो आध्यमान या अफारा को पैदा करती है, इसके परिणामस्वरूप पेट की नसों में खिंचाव महसूस होने लगता है।

ऐसी अवस्था में मरीज बेचैन हो उठता है। पेट फूलने लगता है। जब यह गैस (अफारा) ऊपर की ओर बढ़ने लगती है तो हृदय पर दबाब बढ़ता है जिससे घबराहट सी महसूस होती है।

यह गैस जब पेट में काफी समय तक रुक जाती है तो पेट में काफी दर्द करती है, जिसे अफारा या पेट में गैस का बनना कहते है।अफारा यानी (पेट में गैस का बनना) वायु के इकट्ठा होने से पेट के फूलने के कारण पेट में कब्ज़ पैदा हो जाती है।

कब्ज के कारण जब आंतों में मल एकत्रित (इकट्ठा) होता है तो मल के सड़ने से दूषित वायु (गैस) की उत्पति होती है। दूषित वायु को जब कहीं से निकलने का रास्ता नहीं मिलता है तो उस दूषित वायु से पेट फूलने लगता है।

इससे अग्निमांद्य (भूख का न लगना, अपच) और अतिसार (दस्त) आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिक मात्रा में भोजन करने, बाजारों में अधिक तेल-मिर्च, गर्म मसालों का सेवन करने से पाचन क्रिया की विकृति के साथ आध्यमान की बढ़ोत्तरी होती है।

कषैली, कड़वी, तीखी और रूक्ष (सूखा) वस्तुओं को खाने, खेद (दु:ख), अत्यन्त ठण्डे पदाथों का सेवन, अधिक संभोग के कारण वीर्य की कमी, मल-मूत्र के प्रेशर के रोकने से, चिंता, भय (डर), अधिक रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से मांस क्षीण, अधिक उल्टी और दस्त के कारण अफारा हो जाता है।

आमदोष और वृद्धावस्था से व्यक्तियों की नसों में वायु (गैस) भरकर दोषों को बढ़ाकर शरीर के अंगों को जकड़ कर दर्द पैदा हो जाने से यह विकार उत्पन्न हो जाता है।

अफारा या वायु के इकट्ठा होने से पेट में दर्द, जी मिचलाना, श्वास (सांस) लेने में कष्ट के साथ ही रोगी को बहुत घबराहट होती है। छाती में जलन होती है। दूषित वायु जब ऊपर की ओर चढ़ती है तो सिर में दर्द होने लगता है, रोगी को चक्कर आने लगते हैं। जब तक रोगी को डकार नहीं आती या मलद्वार से वायु नहीं निकलती है तब तक रोगी को बेचैनी और पेट में दर्द होता रहता है।

छोटा अनाज, पुराना शालि चावल, रसोन, लहसुन, करेला फल, शिग्रु, पटोल के पत्ते, फल और बथुआ आदि आध्यमान (अफारा) से पीड़ित रोगी इन सभी का प्रयोग खाने में कर सकते हैं।

बंदगोभी, कचालू, अरबी, भिण्डी और ठण्डी चीजें वायुकारक खाद्य पदार्थ हैं, जिसके सेवन करने से पेट में वायु बनती है और अफारा हो जाता है। चावल, राजमा, उड़द की दाल, दही, छाछ, लस्सी और मूली का प्रयोग न करें क्योंकि यह अफारा को अधिक कर देता है।

अफारा होने पर कड़वे, तीखे, कषैले, सूखे और भारी अनाज (अन्न), तिल, शिम्बी मांसाहारी भोजन, अप्राकृतिक और विषम आसन, मैथुन, रात में जागना, व्यायाम और क्रोध (गुस्सा) आदि को छोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से अफारा रोग होता है।

उपचार-

1. सोंठ :सोंठ का चूर्ण 3 ग्राम और एरण्ड का तेल 8 ग्राम सेवन करने से कब्ज के कारण होने वाला आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है।
सोंठ का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम भाग में कालानमक मिलाकर सुबह और शाम लेने से लाभ होता है।
सोंठ और कायफल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से गैस मिट जाती है।

2. पोदीना :पोदीना के 5 मिलीलीटर रस में थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है।
पोदीने का रस 50 मिलीलीटर, मिश्री 5 ग्राम और 2 ग्राम यवक्षार मिलाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) दूर हो जाता है।
पोदीने के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से अफारा में लाभ होता है।

3. कुलंजन : कुलंजन का चूर्ण 2 ग्राम और 10 ग्राम गुड़ को पानी के साथ पीने से आध्यमान (अफारा, गैस) को निकाल देता है।

4. अदरक : अदरक 3 ग्राम, 10 ग्राम पिसे हुए गुड़ के साथ सेवन करने से आध्यमान (अफारा, गैस) समाप्त होता है।

5. लहसुन : लहसुन का पिसा हुआ मिश्रण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग को घी के साथ सेवन करने से पेट में बनी गैस बाहर निकल जाती है।

6. सुगंधबाला : सुगंधबाला चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम को शहद के साथ सुबह-शाम पीने से अफारे में लाभ होता है।

7. तारपीन :तारपीन के तेल की 60 से 120 बूंद को साबुन के घोल में मिलाकर बस्ति (एक क्रिया जिसमें गुदा मार्ग से पानी डालते हैं) देने से पेट की गैस दूर हो जाती है।
फलालेन के कपड़े को गुनगुने पानी में भिगोकर और इसमें कुछ बूंदे तारपीन के तेल की छिड़ककर पेट पर रखने से पेट की गैस में लाभ होता है।
8. सौंफ :सौंफ 25 ग्राम को 500 मिलीलीटर पानी में उबालें, जब 100 मिलीलीटर पानी बच जाये तब सेंधानमक व काला नमक 2-2 ग्राम मिलाकर रख लें, फिर इस काढ़े को छानकर पीने से आध्यमान (अफारा, गैस) नष्ट हो जाता है।
सौंफ को कूटकर चूर्ण बनाकर रख लें। 5 ग्राम चूर्ण हल्के गरम पानी के साथ सेवन करने से जल्दी पेट का फूलना (अफारा) नष्ट होता है।
सौंफ का काढ़ा बनाकर बस्ति (एक क्रिया जिसमें गुदा मार्ग से पानी डालते हैं) देने से गैस में लाभ होता है।

9. जायफल : जायफल का चूर्ण, सोंठ का चूर्ण और जीरे को पीसकर बारीक पाउडर बना लें। इस बने पाउडर को भोजन करने से पहले पानी के साथ लेने से आध्यमान (अफारा, गैस) को पैदा होने नहीं देता है।

10. बदियाण : बदियाण रूमी (एक प्रकार का सौंफ) लगभग आधा ग्राम से लेकर 2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम लेने से लाभ मिलता है।

11. बाबूना : पेट का फूलना (आनाह) में बाबूना के फूल 3 से 4 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।

12. बैंगन :बैंगन को अंगारों पर सेंककर उसमें सज्जीखार मिलाकर पेट पर बांधने से, पेट में भार हो गया हो तो वह दूर होता है।
बैंगन की सब्जी में ताजे लहसुन और हींग का छौंक लगाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) को होने से रोकता है।

13. पीपल :पीपल का चूर्ण 3 ग्राम, सेंधानमक 1 ग्राम को मिलाकर 150 मिलीलीटर छाछ (मट्ठे या तक्र) के साथ पीने से पेट की वायु (गैस) निकल जाती है जिससे आध्यमान (अफारा, गैस) समाप्त हो जाता है।
3 पीपल को पीसकर इतने ही काले नमक में मिलाकर गर्म पानी से सुबह-शाम खाने के आधे घण्टे बाद फंकी लेने से पेट की गैस बाहर निकल जायेगी।

14. इलायची : इलायची, आंवले का रस या चूर्ण में भुनी हुई हींग लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग और थोड़ा सा नींबू का रस एक साथ मिलाकर सेवन करें। इससे गैस, दर्द और अफारा मिट जाता है।

15. अंगूर : अंगूर के 50 मिलीलीटर रस में 5 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम यवक्षार मिलाकर पीने से आध्यमान (अफारा, गैस) दूर होता है।

16. लौंग :3 ग्राम लौंग को 200 ग्राम चीनी में उबाल लें। फिर छानकर इस पानी को पीने से अफारा दूर होता है।
लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौंग को पीसकर गर्म पानी से छान लें। इसे सुबह-शाम रोजाना पीने से अफारा में लाभ होता है।
मिश्री में 1 से 3 बूंद लौंग के तेल या गोंद को मिलाकर सेवन करने से अफारा मिटता है।
17. दालचीनी : दालचीनी के तेल की 1 से 3 बूंद को मिश्री के साथ सुबह और शाम देने से अफारे (गैस) में लाभ होता है।

18. तेजपात (तेजपत्ता) : तेजपात का पिसा हुआ चूर्ण 1 से 4 ग्राम सुबह-शाम लेने से पेट में गैस नहीं बनती है।

19. केसर : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग केसर को शहद के साथ लेने से अफारा (गैस), अतिसार (दस्त) और वमन (उल्टी) ठीक हो जाते हैं।

20. जटामांसी : जटामांसी 200 ग्राम, मिश्री 400 ग्राम, दालचीनी 50 ग्राम, शीतलचीनी 50 ग्राम, सौंफ 50 ग्राम और 50 ग्राम सोंठ को लेकर मिलाकर मिश्रण बना लें, फिर यह मिश्रण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता है।

21. आक (मदार) : आक के पत्तों में एरण्ड का तेल लगाकर गर्म करके पेट पर बांधने से शौच (ट्टटी) खुलकर आने से पेट साफ हो जाता है।

22. धतूरे : धतूरे के पत्तों का लेप या पत्तों के काढ़े से सेंकने या पत्तों के तेल से मालिश करने से पेट की गैस दूर हो जाती है।

23. अडूसा : अडूसा (बाकस) के पत्तों का 5 से 15 मिलीलीटर रस को खुराक के रूप में देने से अफारा में लाभ होता है।

24. कचनार : कचनार की मूल (जड़) का काढ़ा सेवन करने से अफारा (गैस) ठीक हो जाता है।

25. अगियाखार :अगियाखार की फांट या घोल 40 मिलीलीटर की सुबह-शाम लेने से अफारा में लाभ होता है।
अगियाखार के तेल की 1 से 3 बूंद तक लेने से अफारा समाप्त हो जाता है।          (क्रमशःअगले भाग-2 में )

Left Writing Hand Emoji (U+1F58E)डॉ. ज्योति ओम प्रकाश गुप्ता (N.D.)

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