सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर राजनीतिक घमासान शुरू
जनरल बिपिन रावत ने कैंपस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर नाराजगी जाहिर की। रावत ने विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उनके इस बयान पर अब राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम के हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सेनाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है। दिग्विजय ने जहां सांप्रदायिक आधार पर हिंसा को लेकर सवाल पूछा तो वहीं ओवैसी ने उन्हें अपने कार्यक्षेत्र तक सीमित रहने की सलाह दी।
Leadership is knowing the limits of one’s office.
It is about understanding the idea of civilian supremacy & preserving the integrity of the institution that you head https://t.co/qqbxgGj72j
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) December 26, 2019
असदुद्दीन ओवैसी ने सोनाध्यक्ष को नसीहत दी है। उन्होंने ट्वीट कर रहा, ‘अपने कार्यालय के प्रभाव क्षेत्र को भी समझ लेना नेतृत्व है। यह (नेतृत्व) नागरिक की सर्वोच्चता को समझने के बारे में और जिस संस्था के प्रमुख आप हैं उसकी गरिमा को ठीक तरह से जानना भी है।’
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘उनका यह बयान मोदी सरकार को निर्बल करता है। हमारे प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट पर लिखा कि एक छात्र के तौर पर आपातकाल के दौरान उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। तो सेनाध्यक्ष के बयान के अनुसार यह भी गलत है। ‘
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सेनाध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए उनसे सवाल पूछा। उन्होंने कहा, ‘नेता वे नहीं है जो लोगों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करते हैं।
सेनाध्यक्ष ने नागरिकता प्रदर्शन को लेकर यह कहा। मैं जनरल साहेब की बात से इत्तेफाक रखता हूं लेकिन नेता वे भी नहीं होते जो अपने अनुयायियों को सांप्रदायिक आधार पर नरसंहार के लिए भड़काएं। क्या आप मेरी बात से सहमत हैं जनरल साहब?’
"Leaders Not Those Who Lead Masses In Arson": Army Chief On Citizenship Protests
I agree General Saheb but also Leaders are not those who allow their followers to indulge in Genocide of Communal Violence. Do you agree with me General Saheb? https://t.co/rOo0vFGMIf— digvijaya singh (@digvijaya_28) December 26, 2019
