अमृत भारत योजना की असलियत: दो साल में सिर्फ बिजनौर स्टेशन तैयार, बाकी अभी अधूरे! Railways की रफ्तार पर उठे सवाल”
Railways के बड़े-बड़े वादों की हकीकत सामने आने लगी है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मुरादाबाद मंडल के 19 स्टेशनों को आधुनिक रूप देने का सपना दिखाया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि दो साल में सिर्फ बिजनौर स्टेशन ही पूरी तरह विकसित हो पाया है। बाकी सभी स्टेशन आज भी अधूरे काम, बजट परिवर्तन, तकनीकी उलझनों और विभागीय खींचतान के चलते निर्माण कार्य में पिछड़े हुए हैं।
🚉 बिजनौर स्टेशन बना ‘आदर्श’, बाकी स्टेशन फाइलों में उलझे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2023 को देशभर के 508 रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प की नींव रखी थी। मुरादाबाद मंडल से उस समय 12 स्टेशनों को इस योजना में शामिल किया गया था। रेलवे प्रशासन ने तब दावा किया था कि सिर्फ छह महीने में इन स्टेशनों की सूरत बदल जाएगी। लेकिन हकीकत ये है कि 730 दिन बाद भी सिर्फ बिजनौर स्टेशन ही पूरी तरह से विकसित हो सका है।
धामपुर स्टेशन का लोकार्पण अगले एक-दो महीने में संभावित है, लेकिन रामपुर, चंदौसी, गजरौला, शाहजहांपुर, स्योहारा और अमरोहा जैसे प्रमुख स्टेशनों को विकसित होने में अब भी कम से कम एक साल का वक्त लग सकता है।
🏗 विकास की रफ्तार में रोड़े: बारिश, लेबर की कमी और तकनीकी उलझनें
बिजनौर और धामपुर स्टेशन की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग को दी गई थी, जबकि अन्य स्टेशनों की डेवेलपमेंट का जिम्मा गति शक्ति यूनिट को सौंपा गया। परंतु गति शक्ति यूनिट के द्वारा काम की धीमी गति और बारिश, मजदूरों की कमी, कार्ययोजना में लगातार हो रहे बदलाव, विभागों के बीच आपसी समन्वय की कमी जैसे कई कारण विकास कार्यों में बाधा बने हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन तमाम अड़चनों को पार कर सभी स्टेशन 2026 तक पूरी तरह से विकसित किए जा सकेंगे।
🛤️ सुविधाओं का वादा: बड़े-बड़े पोस्टर, छोटी-सी हकीकत
अमृत भारत योजना के तहत स्टेशनों पर निम्नलिखित सुविधाएं दी जानी थीं:
बेहतर प्रवेश और निकास द्वार
वातानुकूलित प्रतीक्षालय
स्वच्छ एवं आधुनिक शौचालय
डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड
लिफ्ट और एस्केलेटर
दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधा
कैफेटेरिया और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था
ओवरब्रिज व फर्श की मरम्मत
लेकिन ground reality ये है कि इन सुविधाओं का केवल एक हिस्सा ही अब तक कुछ स्टेशनों पर दिखाई दे रहा है।
📉 एफओबी चौड़ाई में भारी कटौती: यात्रियों को समझौता करना पड़ा मजबूरी
योजना की डीपीआर में तीन बार बदलाव किए गए। पहले सभी स्टेशनों पर 12 मीटर चौड़े फुट ओवरब्रिज (FOB) बनाए जाने थे, लेकिन बजट और जगह की कमी के चलते अब इनकी चौड़ाई घटाकर 7.6 मीटर या मात्र 3 मीटर कर दी गई है।
स्टेशनवार एफओबी स्थिति:
12 मीटर चौड़ाई: हापुड़, अमरोहा, चंदौसी, नजीबाबाद, नगीना, हरदोई
7.6 मीटर चौड़ाई: रुड़की, स्योहारा, रामपुर, शाहजहांपुर, गजरौला, बालामऊ
3 मीटर चौड़ाई: बिजनौर, धामपुर, कोटद्वार, आंवला
इस बदलाव से स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ रहा है। भविष्य में यात्री भार बढ़ने पर यह डिजाइन सवालों के घेरे में आ सकता है।
⛰ चार धाम रेल प्रोजेक्ट भी लेट: 2025 नहीं, अब 2026 तक का इंतजार
उत्तराखंड में बन रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, जो कि चार धाम यात्रा को रेलवे से जोड़ने का सपना थी, अब 2026 तक खिंच चुकी है। पहाड़ों के बीच सुरंग निर्माण, तकनीकी बाधाएं और मौसम की कठिनाइयों के कारण प्रोजेक्ट की डेडलाइन एक साल और बढ़ा दी गई है।
इस परियोजना का 156 किलोमीटर हिस्सा मुरादाबाद मंडल में आता है। इसके लिए डीआरएम कार्यालय के पास नया कंट्रोल रूम भी बनकर तैयार हो चुका है, जो जल्द ही संचालन कार्यों के लिए सक्रिय होगा।
📌 कौन-कौन से स्टेशन अमृत भारत योजना में शामिल हैं?
मुरादाबाद मंडल के 19 स्टेशन जो इस योजना के तहत हैं:
बिजनौर, रामपुर, चंदौसी, गजरौला, अमरोहा, स्योहारा, धामपुर, नगीना, नजीबाबाद, शाहजहांपुर, हापुड़, हर्रावाला, कोटद्वार, रुड़की, हरदोई, बुलंदशहर, गढ़मुक्तेश्वर, आंवला, बालामऊ
रेलवे के अनुसार स्टेशनों के भवन अब “आकर्षक” बनाए जा रहे हैं, लेकिन यात्रियों के अनुसार अब भी जमीनी सुविधाएं नदारद हैं।
🚧 बार-बार बदली जा रही योजना, फाइलों की भूलभुलैया बनी परियोजना
रेलवे सूत्रों के अनुसार, हर बदलाव के साथ नई योजना बनती है, जिसे फिर से अनुमोदन के लिए भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में महीनों का वक्त लग जाता है। यही कारण है कि अधूरी योजनाएं अधूरे वादों में बदलती जा रही हैं।
रेलवे अधिकारी आदित्य गुप्ता (सीनियर DCM) का कहना है:
“अमृत भारत योजना में स्टेशनों के निर्माण में कई बदलाव किए गए हैं। पुलों की चौड़ाई घटाई गई है। दोबारा प्लान बनाकर स्वीकृति लेना व बजट परिवर्तन में समय लगता है। बदलावों के चलते समय लगा है लेकिन स्टेशनों के भवन आकर्षक तरीके से बन रहे हैं।”
🚦 जनता का सवाल: क्या रेलवे वादों की रफ्तार पकड़ पाएगा?
रेलवे की अमृत भारत योजना ने एक सपना तो जरूर दिखाया — आधुनिक, सुरक्षित और सुंदर रेलवे स्टेशन का। लेकिन दो साल बीतने के बाद भी ज़मीनी हकीकत बताती है कि रेलवे अभी उस ट्रैक पर नहीं चल रहा, जिसकी उम्मीद जनता ने की थी।

