भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक में शुमार लक्ष्मी विलास बैंक के प्रस्तावित विलय पर रोक लगा दी है। अप्रैल में इंडियाबुल्स ने इस विलय की घोषणा की थी। बैंक ने इसी साल सात मई को आरबीआई के समक्ष प्रस्तावित विलय के लिए आवेदन किया था। आरबीआई ने बुधवार को कहा कि इस आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। अब इसके बाद बैंक का इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और इंडियाबुल्स कमर्शियल क्रेडिट लिमिटेड में विलय नहीं होगा।
लक्ष्मी विलास बैंक का मुख्यालय चेन्नई में स्थित है। लक्ष्मी विलास बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक ने सख्त कार्रवाई करते हुए उसको पीसीए फ्रेमवर्क में डाल दिया है। 790 करोड़ रुपये की हेराफेरी होने के बाद बैंक ने यह फैसला लिया है। बैंक ने बताया कि नेट एनपीए ज्यादा होने, अपर्याप्त कैपिटल टू रिस्क-वेटेड असेट्स रेश्यो (सीआरएआर) और कॉमन इक्विटी टियर 1 (सीईटी1) जैसी वजहों से आरबीआई ने कार्रवाई की।
देश के प्रमुख निजी बैंकों में शुमार लक्ष्मी विलास बैंक के निदेशकों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 790 करोड़ रुपये का गबन करने केआरोप में मुकदमा दर्ज किया था। यह मुकदमा पुलिस ने वित्तीय सेवा कंपनी रेलिगेयर फिनवेस्ट की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए किया है।
दिल्ली पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में रेलिगेयर ने कहा है कि उसने 790 करोड़ रुपये की एक एफडी बैंक में की थी, जिसमें से हेरा-फेरी की गई है। पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच में ऐसा लग रहा है कि पैसों में हेराफेरी पूरी योजना बद्ध तरीके से की गई है। फिलहाल पुलिस ने बैंक के निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात, हेराफेरी व साजिश का मुकदमा दर्ज किया है।