Ukraine में फंसे भारतीयों के लिए रूस ने जारी की एडवाइजरी,हमले के विरोध में दुनियाभर में प्रदर्शन
Russia Ukraine Conflict: यूक्रेन में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंतित उनके परिवार वालों, भारत सरकार और खुद उन फंसे हुए लोगों के लिए मंगलवार को राहत भरी खबर आई. रूस ने यूक्रेन में फंसे भारतीय लोगों की मदद के लिए एडवाजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि पैनिक की जरूरत नहीं है. रूस हर तरह से आपकी मदद करेगा.
रूस भारत का पुराना दोस्त रहा है. भारत ने Ukraine के साथ चल रहे विवाद में अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों के दबाव के बावजूद रूस का साथ नहीं छोड़ा है. उसने शुरू से इस मामले में तटस्थ भूमिका निभाई. यही नहीं यूएन में 2 बार रूस के खिलाफ हो रही वोटिंग में भारत ने शामिल न होकर दोस्ती का परिचय दिया. अब रूस ने भी दोस्ती निभाते हुए यूक्रेन में फंसे भारतीय लोगों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है.
दरअसल, 1 दिन पहले कुछ वीडियो वायरल हुए थे. इसमें यूक्रेनी पुलिस भारतीयों के साथ रेसिज्म करते हुए दिख रहे थे. बॉर्डर पर खड़े भारतीय स्टूडेंट्स को यूक्रेन के पुलिस वाले पीटते नजर आ रहे थे. इसके अलावा इंडियन स्टूडेंट्स के खाने पीने को लेकर हो रही दिक्कतों का वीडियो भी वायरल हुआ था.
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के एक समूह ने भारत की आगे की यात्रा शुरू करने के लिए पोलैंड में प्रवेश किया है।#UkraineRussiaWar pic.twitter.com/h0BzTNhJOX
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रूस-Ukraine में चल रही युद्ध का आज छठा दिन है. एक तरफ जहां यूक्रेन लगभग तबाह हो गया है वहीं दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन दोनों में से कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है. रूस के हमले से पहले यूक्रेन में मानवता के खिलाफ युद्ध अपराध और दूसरे अपराधों को लेकर अंतराष्ट्रीय अपराध अदालत (आईसीसी) में मुकदमा दर्ज किया है.
इस बीच अंतराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court) के वकील करीम खान ने सोमवार को बताया कि वह रूस के आक्रमण के बाद “यूक्रेन की स्थिति” पर एक जांच शुरू की कर रहा है. खान ने एक बयान में कहा, ” मैंने यूक्रेन में चल रहे युद्ध को देखते हुए जल्द से जल्द जांच शुरू करने का फैसला किया है.”
उन्होंने कहा कि, “हाल के दिनों में यूक्रेन में हो रही तबाही और संघर्ष को देखते हुए, मेरा इरादा है कि यह जांच मेरे कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसी भी नए कथित अपराधों को भी शामिल करेगी जो किसी भी पार्टी द्वारा यूक्रेन के क्षेत्र के किसी भी हिस्से पर संघर्ष के लिए किए गए हैं. “उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि इस जांच के दौरान रूसी हमले के पहले किए गए कथित अपराधों की जांच की जाएगी.
चीफ प्रोसिक्यूटर ने कहा कोर्ट ने रूस समर्थक यूक्रेनी प्रशासन को साल 2013-14 में कीव में किए गए यूक्रेन समर्थक प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने से जुड़े अपराधों और क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन में कथित अपराधों की प्रारंभिक जांच पहले ही कर ली है.
Ukraine के 102 लोगों की मौत
यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स की तरफ से बताया गया था कि, अब तक रूसी हमले में यूक्रेन के 102 लोगों की मौत हो चुकी है. जिनमें 7 बच्चे भी शाल हैं. मिये आंकड़ा खार्कीव शहर में हुई 11 मौतों से पहले जारी किया गया था. इसके अलावा यूक्रेन के जवानों की मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. यूएन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर हमले नहीं रुके तो मौत के आंकड़े तेजी से बढ़ सकते हैं. उधर यूक्रेन की तरफ से भी दावा किया जा रहा है कि उसने रूस को जोरदार नुकसान पहुंचाया है.
इस जंग के बीच रूस और यूक्रेन की बैठक खत्म हुई है. करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक में यूक्रेन ने कहा कि, रूस जल्द से जल्द अपने सैनिकों को यहां से निकाले. सभी प्रमुख शहरों से रूसी सेना को हटाएं. लेकिन रूस की तरफ से फिलहाल कुछ भी सकारात्मक रुख नहीं दिखाया गया है.
Ukraine-ऑपरेशन गंगा
भारत सरकार ने Ukraine में फंसे भारतीय छात्रों को वापस लाने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया है। साथ ही सरकार ने चार केंद्रीय मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजने का फैसला किया है।
यूक्रेन में संघर्ष बढ़ने के साथ ही युद्धग्रस्त इलाकों में फंसे गुजरात के कई छात्रों ने बताया कि उन्हें दूतावासों द्वारा निकासी के लिए सलाह दी गई और बाद में चेक पॉइंट से वापस लौटा दिया गया। यूक्रेन और पोलैंड के बीच Shehyni-Medyka सीमा पर कुछ भारतीय छात्र 72 घंटे से अधिक समय से फंसे हुए हैं, जिन्हें निकासी के लिए निकाला गया है।
एक छात्र ने बताया कि, “हम शुक्रवार शाम से कड़ाके की ठंड में इंतजार कर रहे हैं और यूक्रेन के सीमा रक्षक हमें पोलैंड जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। उन्होंने लड़कियों और लड़कों को अलग कर दिया है। कुछ लड़कियों को 40 घंटे बाद जाने की इजाजत दी गई, लेकिन उसके बाद एक भी भारतीय को जाने की इजाजत नहीं दी गई। वे भारतीय छात्रों को मार रहे हैं और लात मार रहे हैं, जो सवाल पूछ रहे हैं और हमें हमारे विश्वविद्यालयों में वापस जाने के लिए कह रहे हैं। हममें से कुछ घायल भी हुए हैं।”
वडोदरा की ज्ञानीषा पटेल जिन्होंने रविवार को अपनी सहेली के साथ Shehyni चेक पोस्ट पार किया, उन्हें सोमवार शाम तक यूक्रेन से बाहर निकलने में करीब 36 घंटे लग गए। ज्ञानिषा ने बताया कि, “हमें चेक पोस्ट पार करने की अनुमति देने के बाद भी इंतजार करने के लिए कहा गया। बाहर निकलने के लिए वे हमारे पासपोर्ट पर मुहर लगाने को तैयार नहीं थे। हम अब पोलैंड पहुंच गए हैं और भारतीय दूतावास से आगे के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यूक्रेन में हमारे मित्र जोखिम में हैं और हम उनके बारे में चिंतित हैं।”
यूक्रेन की राजधानी कीव में वडोदरा के एक चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र ने कहा कि, “भारतीय दूतावास से सलाह के बाद छात्रों ने यूक्रेन छोड़ने का फैसला किया है। हालांकि हम भी डरे हुए हैं। हमने सुना है कि अन्य सीमाओं पर भारतीय छात्रों पर हमले हुए हैं।”
#OperationGanga के तहत चल रहे निकासी प्रयासों को बढ़ाने के लिए, पीएम #NarendraModi ने भारतीय वायु सेना #IAF को निकासी प्रयासों में शामिल होने का आह्वान किया है। हमारी वायु सेना की क्षमताओं का लाभ उठाने से यह सुनिश्चित होगा कि कम समय में अधिक लोगों को निकाला जा सके। pic.twitter.com/Dlvseppju5
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भारत सरकार ने यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया है। साथ ही भारतीयों की सुरक्षित निकासी की निगरानी के लिए भारत सरकार ने 4 मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी हंगरी, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया रोमानिया जाकर प्रबंधन देखेंगे। जबकि किरण रिजिजू स्लोवाकिया से और जनरल वीके सिंह पोलैंड से प्रबंधन देखेंगे।
यह जंग हर बीतते दिन के साथ खतरनाक होता जा रहा है. दोनों देशों में हो रही युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से बेहद खतरनाक संकेत सामने आए हैं. दरअसल रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बीते रविवार को देश के परमाणु प्रतिरोधी बलों को विशेष अलर्ट पर रखने का आदेश जारी किया था. उनका कहना है कि पश्चिमी देश रूस के खिलाफ उकसाने वाली कार्रवाई कर रहे हैं. वहीं रूस के परमाणु धमकी पर कई देश नाराज हैं और यूक्रेन पर हमले को लेकर पश्चिमी देशों ने रूस के विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है.
एक तरफ यूक्रेन में रूसी सैनिक जंग लड़ रहे है और दूसरी तरफ अमेरिका और रूस के बीच कूटनीतिक जंग भी लड़ी जा रही है. रूस ने पश्चिमी देशों के बयानों को झूठ का साम्राज्य करार दिया तो वहीं अमेरिका दुनिया के देशों को इकट्ठा कर रूस पर आर्थिक वार कर रहा है. रूस के हमले से यूक्रेन की हालत कितनी खराब है यह अलग-अलग शहरों से आई तस्वीरें बता रही हैं. वहीं पश्चिमी देशों और रूस के बीच कूटनीति की चालें भी चली जा रही हैं. अमेरिका सहयोगी देशों के जरिए रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्पति जो बाइडेन ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘यूक्रेन पर रूस के आक्रमण पर चर्चा करने के लिए मैंने आज मित्र राष्ट्रों और भागीदारों के साथ बात की. हम अपने देश की रक्षा में लगे यूक्रेनी लोगों के लिए अपना समर्थन जारी रख रहे हैं. हमारी सहमति बनी है कि अगर रूस तनाव नहीं घटाता है तो उसे इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़े. ‘
यूएनजीए अध्यक्ष @UN_PGA @abdulla_shahid की अध्यक्षता में 28 फरवरी को यूक्रेन की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन विशेष सत्र। pic.twitter.com/3TZkAgP7x8
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प्रतिबंधो की ताजा कड़ी में अमेरिकी तेल कंपनी शेल ने रूस में निवेश से हाथ खींच लिया है. इसके अलावा कनाडा ने भी रूस से तेल आयात पर रोक लगा दी है और यूरोपीय यूनियन ने 26 रूसी अधिकारियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं.
दरअसल अमेरिकी कदमों से रूस पर कड़ी चोट पड़ी है. सोमवार को रूसी करेंसी रूबल में 30 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली थी. पुतिन ने आर्थिक हालात के चलते रूसी सेंट्रल बैंक और और वित्तिय संस्थानों से हालात पर चर्चा भी की. बैठक के बाद रूस ने पश्चिमी देशों को झूठ का साम्राज्य खड़ा करने का आरोप लगाया.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, ‘मैंने आपको अर्थव्यवस्था के बारे में बात करने के लिए बुलाया है हमने इस विषय पर रूसी पीएम मिखाइल व्लादिमीरोविच के साथ चर्चा की है, हमने उन प्रतिबंधों के बारे में बात की जो तथाकथित पश्चिमी समुदाय ने लगाए हैं. मैं उन्हें ‘झूठ का साम्राज्य’ कहता हूं.’
पुतिन ने इस पश्चिम देशों के लिए झूठ का साम्राज्य शब्द दूसरी बार इस्तेमाल किया है. इससे पहले पुतिन ने हमले से पहले भी पश्चिमी देशों को झूठ का साम्राज्य बोला था. वहीं संयुक्त राष्ट्र में रूस ने दावा किया कि उसका यूक्रेन पर कब्जे का कोई इरादा नहीं है. जबकि पश्चिमी देश पर आरोप लगा रहे हैं कि पुतिन का इरादा यूक्रेन में अपनी मर्जी की सरकार बैठाने का है. लेकिन फिलहाल यूक्रेन के विरोध के चलते पुतिन ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाए हैं.
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